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Kotdwar News: लैंसडौन के नाम परिवर्तन के विरोध के साथ पक्ष में भी उतरे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Wed, 29 Apr 2026 07:37 PM IST
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वीर सैनिक जसवंत सिंह रावत के सम्मान में जसवंतगढ़ छावनी करने की मांग भी हुई तेज
जयहरीखाल। लैंसडौन का नाम बदलकर जसवंतगढ़ किए जाने के विरोध के साथ ही पक्ष की मांग भी जोर पकड़ने लगी है। क्षेत्रवासियों ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भेजा है। कहा कि उनकी मांग देश के महान वीर सैनिक शहीद जसवंत सिंह रावत के सम्मान से जुड़ी है।
ज्ञापन में कहा गया है कि शहीद जसवंत सिंह रावत ने देश की रक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनकी वीरता की गाथा आज भी पूरे देश में सम्मान के साथ याद की जाती है। ऐसे में उनके नाम पर किसी प्रमुख स्थान का नामकरण करना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। क्षेत्रवासियों का तर्क है कि किसी महान सैनिक के सम्मान में नामकरण और क्षेत्र का विकास दो अलग-अलग विषय हैं, जिन्हें आपस में जोड़ना तर्कसंगत नहीं है।
कहा कि देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले वीर सैनिकों का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए। कहा कि लैंसडौन का नाम बदलकर जसवंतगढ़ करने से क्षेत्र का गौरव बढ़ेगा। बौंठा के प्रधान विनय कुकशाल, ऑडल की प्रधान रेखा देवी, सुरमाड़ी तल्ली की प्रधान सपना देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य मीना देवी, कर्नल कुलदीप गुसाईं (रि.) सहित कई जनप्रतिनिधियों ने नाम परिवर्तन का समर्थन किया है। ज्ञापन में कहा गया है कि शहीद के सम्मान के लिए नाम परिवर्तन का विरोध करना उचित नहीं है।
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सोशल मीडिया पर भी बहस
लैंसडौन का नाम बदलकर इसे जसवंतगढ़ रखने के प्रस्ताव पर सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कई लोग लैंसडौन का नाम यथावत रखने के पक्ष में तर्क दे रहे हैं। वहीं, कुछ लोग नाम बदलकर जसवंतगढ़ करने की मांग का समर्थन कर रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच लगातार राय और तर्कों का आदान-प्रदान चल रहा है। पूरे क्षेत्र में यह विषय अब जनचर्चा का प्रमुख मुद्दा बन गया है।
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जयहरीखाल। लैंसडौन का नाम बदलकर जसवंतगढ़ किए जाने के विरोध के साथ ही पक्ष की मांग भी जोर पकड़ने लगी है। क्षेत्रवासियों ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भेजा है। कहा कि उनकी मांग देश के महान वीर सैनिक शहीद जसवंत सिंह रावत के सम्मान से जुड़ी है।
ज्ञापन में कहा गया है कि शहीद जसवंत सिंह रावत ने देश की रक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनकी वीरता की गाथा आज भी पूरे देश में सम्मान के साथ याद की जाती है। ऐसे में उनके नाम पर किसी प्रमुख स्थान का नामकरण करना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। क्षेत्रवासियों का तर्क है कि किसी महान सैनिक के सम्मान में नामकरण और क्षेत्र का विकास दो अलग-अलग विषय हैं, जिन्हें आपस में जोड़ना तर्कसंगत नहीं है।
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कहा कि देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले वीर सैनिकों का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए। कहा कि लैंसडौन का नाम बदलकर जसवंतगढ़ करने से क्षेत्र का गौरव बढ़ेगा। बौंठा के प्रधान विनय कुकशाल, ऑडल की प्रधान रेखा देवी, सुरमाड़ी तल्ली की प्रधान सपना देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य मीना देवी, कर्नल कुलदीप गुसाईं (रि.) सहित कई जनप्रतिनिधियों ने नाम परिवर्तन का समर्थन किया है। ज्ञापन में कहा गया है कि शहीद के सम्मान के लिए नाम परिवर्तन का विरोध करना उचित नहीं है।
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सोशल मीडिया पर भी बहस
लैंसडौन का नाम बदलकर इसे जसवंतगढ़ रखने के प्रस्ताव पर सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कई लोग लैंसडौन का नाम यथावत रखने के पक्ष में तर्क दे रहे हैं। वहीं, कुछ लोग नाम बदलकर जसवंतगढ़ करने की मांग का समर्थन कर रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच लगातार राय और तर्कों का आदान-प्रदान चल रहा है। पूरे क्षेत्र में यह विषय अब जनचर्चा का प्रमुख मुद्दा बन गया है।
