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Kotdwar News: अस्पताल में संसाधन भरपूर, फिर भी मरीज मजबूर
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Thu, 08 Jan 2026 07:40 PM IST
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मरीजों को इलाज के लिए लगानी पड़ रही है मीलों की दौड़
नई टिहरी। टिहरी जिले के दूरस्थ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थत्यूड़, कंडीसौड़ और मदननेगी में दंत रोग चिकित्सक की तैनाती नहीं होने से क्षेत्रवासियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उक्त तीनों अस्पतालों में डेंटल चेयर, दांतों के उपचार के उपकरण और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है। डॉक्टर नहीं होने के कारण दंत उपचार की सुविधा कागजों तक सिमट कर रह गई है।
जिले के 14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में दंत रोग चिकित्सक के एक-एक पद स्वीकृत है। 14 दंत रोग चिकित्सकों के पदों के सापेक्ष वर्तमान में कहने को 13 डॉक्टर कार्यरत हैं लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कंडीसौड़ और थत्यूड़ में कार्यरत डॉक्टर पीजी की पढ़ाई करने जिले से बाहर गए हुए हैं।
मदननेगी अस्पताल में पद रिक्त चल रहा है। उक्त तीनों सरकारी अस्पतालों में लोगों को दांत संबंधी समस्या का इलाज नहीं मिलने के कारण मरीजों को मजबूरी में निजी चिकित्सालयों का रुख करना पड़ रहा है। क्षेत्रों के लोगों को दांतों के उपचार के लिए 60 से 70 किमी की दूरी तय कर चंबा, नई टिहरी या देहरादून का रुख करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में दंत रोग चिकित्सक की तैनाती हो जाए तो उन्हें अपने क्षेत्र में ही इलाज मिल सकेगा। मदननेगी निवासी रमेश सिंह रावत का कहना है कि अस्पताल में डेंटल चेयर और मशीनें तो लगी है लेकिन डॉक्टर नहीं है। दांत में दर्द होने पर मजबूरी में दूर जाना पड़ता है।
जिले के अधिकांश अस्पतालों में दंत रोग चिकित्सक कार्यरत हैं। जिन दो-तीन अस्पतालों में डॉक्टर नहीं हैं वहां अस्पताल में यदि दांत से संबंधित रोगी आते हैं तो उन्हें जिला अस्पताल में बेहतर उपचार के लिए जाने की सलाह दी जाती है।
- डाॅ. श्याम विजय, सीएमओ टिहरी
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नई टिहरी। टिहरी जिले के दूरस्थ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थत्यूड़, कंडीसौड़ और मदननेगी में दंत रोग चिकित्सक की तैनाती नहीं होने से क्षेत्रवासियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उक्त तीनों अस्पतालों में डेंटल चेयर, दांतों के उपचार के उपकरण और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है। डॉक्टर नहीं होने के कारण दंत उपचार की सुविधा कागजों तक सिमट कर रह गई है।
जिले के 14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में दंत रोग चिकित्सक के एक-एक पद स्वीकृत है। 14 दंत रोग चिकित्सकों के पदों के सापेक्ष वर्तमान में कहने को 13 डॉक्टर कार्यरत हैं लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कंडीसौड़ और थत्यूड़ में कार्यरत डॉक्टर पीजी की पढ़ाई करने जिले से बाहर गए हुए हैं।
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मदननेगी अस्पताल में पद रिक्त चल रहा है। उक्त तीनों सरकारी अस्पतालों में लोगों को दांत संबंधी समस्या का इलाज नहीं मिलने के कारण मरीजों को मजबूरी में निजी चिकित्सालयों का रुख करना पड़ रहा है। क्षेत्रों के लोगों को दांतों के उपचार के लिए 60 से 70 किमी की दूरी तय कर चंबा, नई टिहरी या देहरादून का रुख करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में दंत रोग चिकित्सक की तैनाती हो जाए तो उन्हें अपने क्षेत्र में ही इलाज मिल सकेगा। मदननेगी निवासी रमेश सिंह रावत का कहना है कि अस्पताल में डेंटल चेयर और मशीनें तो लगी है लेकिन डॉक्टर नहीं है। दांत में दर्द होने पर मजबूरी में दूर जाना पड़ता है।
जिले के अधिकांश अस्पतालों में दंत रोग चिकित्सक कार्यरत हैं। जिन दो-तीन अस्पतालों में डॉक्टर नहीं हैं वहां अस्पताल में यदि दांत से संबंधित रोगी आते हैं तो उन्हें जिला अस्पताल में बेहतर उपचार के लिए जाने की सलाह दी जाती है।
- डाॅ. श्याम विजय, सीएमओ टिहरी