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Kotdwar News: कवियों ने रचनाओं के माध्यम से भरा देशभक्ति का भाव
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Tue, 27 Jan 2026 07:27 PM IST
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साहित्यांचल संस्था की ओर से गणतंत्र दिवस पर किया काव्य गोष्ठी का आयोजन
कोटद्वार। साहित्यिक संस्था साहित्यांचल की ओर से गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में नगर निगम सभागार में एक काव्य गाेष्ठी का आयोजन किया गया।
काव्य गोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि मेयर शैलेंद्र सिंह रावत, प्रकाश कोठारी व शिव प्रकाश कुकरेती ने संयुक्त रूप से किया। मीना डबराल ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। गायक यतेंद्र गौड़ ने अपनी गढ़वाली कविता आंखा खोलि की, अंठ धौरी की सुण ले रै मनिखी से वाहवाही लूटी। राकेश मोहन ने अपनी व्यंग्य कविता हम चिल्लाए आजाद हो गया, पहले कौन आसन पर था और अब किसने कब्जाया, हरि सिंह भंडारी ने भगवान श्रीकृष्ण ने द्वारिका में राजधानी बनाया, व्यंग कवि बलवीर सिंह रावत ने उत्तराखंड आज तरुण नौजंवा है, पर इसका जोश जवानी कहां है सुनाकर स्रोताओं को गुदगुदाया।
ललन प्रसाद बुड़ाकोटी ने बाबा नागार्जुन पर हे समग्र क्रांति के संस्कृति पुरुष, हे पायावर कवि, मिथिलावासी नागार्जुन सुनाकर जयहरीखाल में बिताए उनके दिनों की याद दिला दी। डॉ. बीना वशिष्ठ ने बालाकोट घटना के बाद वीर सैनिकों के बलिदान पर कहिं हाथ गिरा, कहिं देह गिरी से वातावरण को गमगीन कर दिया। कौशल्या जखमोला ने वंदे मातरम का गायन किया।
अनुसूया डंगवाल ने उठो अब चेत जाओ, इस हवा का रुख बदलना है, डॉ. अनुराग शर्मा ने गणतंत्र के पावन पर्व पर देश सजा है दुल्हन सा कविता सुनाई। प्रवेश नवानी ने बचपन गुजरा बिना टीवी फ्रिज हीटर के आखिरी पीढ़ी सुनाकर अतीत के दर्शन कराए। जेपी ध्यानी, दिनेश ध्यानी, अमित नैथानी ने स्वतंत्रता के भोर के प्रकाश में बढ़े चलो, आओ गणतंत्र दिवस मनाए सुनाकर सबको भाव विभोर कर दिया।
शिव प्रकाश कुकरेती ने आजाद हिंद फौज के नायक सुभाष चंद्र बोस, भगवती कंडवाल ने आज भारत जाग रहा है, कुलदीप मैंदोला ने यहां रंग बसंती है, राग बसंती सुनाकर कार्यक्रम को रोचक बनाया। कवियत्री रिद्धि भट्ट ने मां भारती की भाल पर चंदन लगाने आई हूं कविता सुनाई। कार्यक्रम अध्यक्ष चंद्रप्रकाश नैथानी ने तुमसे ये तन मैने पाया इस पर तेरा है अधिकार गाकर गोष्ठी का समापन किया।
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कोटद्वार। साहित्यिक संस्था साहित्यांचल की ओर से गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में नगर निगम सभागार में एक काव्य गाेष्ठी का आयोजन किया गया।
काव्य गोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि मेयर शैलेंद्र सिंह रावत, प्रकाश कोठारी व शिव प्रकाश कुकरेती ने संयुक्त रूप से किया। मीना डबराल ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। गायक यतेंद्र गौड़ ने अपनी गढ़वाली कविता आंखा खोलि की, अंठ धौरी की सुण ले रै मनिखी से वाहवाही लूटी। राकेश मोहन ने अपनी व्यंग्य कविता हम चिल्लाए आजाद हो गया, पहले कौन आसन पर था और अब किसने कब्जाया, हरि सिंह भंडारी ने भगवान श्रीकृष्ण ने द्वारिका में राजधानी बनाया, व्यंग कवि बलवीर सिंह रावत ने उत्तराखंड आज तरुण नौजंवा है, पर इसका जोश जवानी कहां है सुनाकर स्रोताओं को गुदगुदाया।
ललन प्रसाद बुड़ाकोटी ने बाबा नागार्जुन पर हे समग्र क्रांति के संस्कृति पुरुष, हे पायावर कवि, मिथिलावासी नागार्जुन सुनाकर जयहरीखाल में बिताए उनके दिनों की याद दिला दी। डॉ. बीना वशिष्ठ ने बालाकोट घटना के बाद वीर सैनिकों के बलिदान पर कहिं हाथ गिरा, कहिं देह गिरी से वातावरण को गमगीन कर दिया। कौशल्या जखमोला ने वंदे मातरम का गायन किया।
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अनुसूया डंगवाल ने उठो अब चेत जाओ, इस हवा का रुख बदलना है, डॉ. अनुराग शर्मा ने गणतंत्र के पावन पर्व पर देश सजा है दुल्हन सा कविता सुनाई। प्रवेश नवानी ने बचपन गुजरा बिना टीवी फ्रिज हीटर के आखिरी पीढ़ी सुनाकर अतीत के दर्शन कराए। जेपी ध्यानी, दिनेश ध्यानी, अमित नैथानी ने स्वतंत्रता के भोर के प्रकाश में बढ़े चलो, आओ गणतंत्र दिवस मनाए सुनाकर सबको भाव विभोर कर दिया।
शिव प्रकाश कुकरेती ने आजाद हिंद फौज के नायक सुभाष चंद्र बोस, भगवती कंडवाल ने आज भारत जाग रहा है, कुलदीप मैंदोला ने यहां रंग बसंती है, राग बसंती सुनाकर कार्यक्रम को रोचक बनाया। कवियत्री रिद्धि भट्ट ने मां भारती की भाल पर चंदन लगाने आई हूं कविता सुनाई। कार्यक्रम अध्यक्ष चंद्रप्रकाश नैथानी ने तुमसे ये तन मैने पाया इस पर तेरा है अधिकार गाकर गोष्ठी का समापन किया।