{"_id":"69888be6880302e29406cb86","slug":"women-are-shaping-their-own-future-using-rambans-and-ringal-kotdwar-news-c-49-1-sdrn1009-121613-2026-02-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kotdwar News: रामबांस व रिंगाल से खुद अपना भविष्य गढ़ रहीं महिलाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kotdwar News: रामबांस व रिंगाल से खुद अपना भविष्य गढ़ रहीं महिलाएं
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Sun, 08 Feb 2026 06:43 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
रामबांस श्रेष्ठता केंद्र में महिलाओं ने सीखे उत्पाद तैयार करने के गुर
स्वरोजगार कर अपनी आर्थिकी मजबूत करने का है इरादा
कोटद्वार। उत्तराखंड बांस एवं रेशा प्रशिक्षण केंद्र पनियाली में चल रहे कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यशाला में क्षेत्र की 20 महिलाएं रामबांस व रिंगाल से अपने सुनहरे भविष्य के सपने बुन रही है। महिलाएं रामबांस और रिंगाल से सजावटी हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करने का हुनर सीख रही हैं।
उत्तराखंड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद व उद्योग विभाग की ओर से व्यापक हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजना के तहत जारी प्रशिक्षण शिविर में महिलाओं को 30 से अधिक सजावटी हस्तशिल्प उत्पाद बनाना सिखाया जा रहा है। प्रशिक्षण ले रही प्रमिला, रीना देवी, सरस्वती देवी, रीता देवी ने बताया कि उन्होंने पिछले 50 दिनों में रामबांस व रिंगाल से कई उत्पाद बनाने सीखे हैं। यह आसान काम है और घर के काम निपटाने के बाद खाली समय में इन उत्पादों को वह आसानी से तैयार कर सकती है। यदि कच्चा माल आसानी से उपलब्ध हो जाए तो वह अपना स्वयं का रोजगार कर अपने परिवार की आर्थिकी को मजबूत कर सकती है।
प्रशिक्षण कार्यशाला में 17 महिलाएं और तीन पुरुष प्रतिभाग कर रहे हैं। सभी प्रशिक्षणार्थियों ने गहन व बारीकी से प्रशिक्षण प्राप्त किया है और अब वह हस्तशिल्प उत्पादों को तैयार कर अपनी आर्थिकी को मजबूत कर सकते हैं।
- पंकज गढ़वाली, मास्टर ट्रेनर।
प्रशिक्षण के बाद प्रशिक्षणार्थी स्वयं या समूह में कुटीर उद्योग से लेकर बड़े उद्योग तक स्थापित कर सकते हैं। इसके लिए विभागीय योजनाओं का लाभ भी ले सकते हैं। साथ ही दोबारा प्रशिक्षण भी प्राप्त कर सकते हैं। चयनित प्रशिक्षणार्थियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों में सहभागिता का मौका भी मिलेगा।
- उपासना सिंह, प्रबंधक जिला उद्योग केंद्र कोटद्वार।
Trending Videos
स्वरोजगार कर अपनी आर्थिकी मजबूत करने का है इरादा
कोटद्वार। उत्तराखंड बांस एवं रेशा प्रशिक्षण केंद्र पनियाली में चल रहे कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यशाला में क्षेत्र की 20 महिलाएं रामबांस व रिंगाल से अपने सुनहरे भविष्य के सपने बुन रही है। महिलाएं रामबांस और रिंगाल से सजावटी हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करने का हुनर सीख रही हैं।
उत्तराखंड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद व उद्योग विभाग की ओर से व्यापक हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजना के तहत जारी प्रशिक्षण शिविर में महिलाओं को 30 से अधिक सजावटी हस्तशिल्प उत्पाद बनाना सिखाया जा रहा है। प्रशिक्षण ले रही प्रमिला, रीना देवी, सरस्वती देवी, रीता देवी ने बताया कि उन्होंने पिछले 50 दिनों में रामबांस व रिंगाल से कई उत्पाद बनाने सीखे हैं। यह आसान काम है और घर के काम निपटाने के बाद खाली समय में इन उत्पादों को वह आसानी से तैयार कर सकती है। यदि कच्चा माल आसानी से उपलब्ध हो जाए तो वह अपना स्वयं का रोजगार कर अपने परिवार की आर्थिकी को मजबूत कर सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रशिक्षण कार्यशाला में 17 महिलाएं और तीन पुरुष प्रतिभाग कर रहे हैं। सभी प्रशिक्षणार्थियों ने गहन व बारीकी से प्रशिक्षण प्राप्त किया है और अब वह हस्तशिल्प उत्पादों को तैयार कर अपनी आर्थिकी को मजबूत कर सकते हैं।
- पंकज गढ़वाली, मास्टर ट्रेनर।
प्रशिक्षण के बाद प्रशिक्षणार्थी स्वयं या समूह में कुटीर उद्योग से लेकर बड़े उद्योग तक स्थापित कर सकते हैं। इसके लिए विभागीय योजनाओं का लाभ भी ले सकते हैं। साथ ही दोबारा प्रशिक्षण भी प्राप्त कर सकते हैं। चयनित प्रशिक्षणार्थियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों में सहभागिता का मौका भी मिलेगा।
- उपासना सिंह, प्रबंधक जिला उद्योग केंद्र कोटद्वार।