{"_id":"6a672c4a268016e7c8021777","slug":"guru-purnima-on-29th-july-2026-07-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Guru Purnima 2026: 29 जुलाई को मनाई जाएगी गुरु पूर्णिमा, जानें क्यों है खास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Guru Purnima 2026: 29 जुलाई को मनाई जाएगी गुरु पूर्णिमा, जानें क्यों है खास
Mon, 27 Jul 2026 03:30 PM IST
Heera
अमर उजाला नेटवर्क, हल्द्वानी
अमर उजाला नेटवर्क, हल्द्वानी
Published by: Heera
Updated Mon, 27 Jul 2026 03:30 PM IST
सार
29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा मनाई जाएगी। यह दिन गुरु के प्रति कृतज्ञता और समर्पण का प्रतीक है। इस वर्ष मकर राशि में चंद्रमा, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और बृहस्पति की दृष्टि का विशेष ज्योतिषीय संयोग इस पर्व को और खास बना रहा है।
विज्ञापन
Guru Purnima 2026
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारतीय संस्कृति में गुरु को ज्ञान, संस्कार और सद्मार्ग का आधार माना गया है। 29 जुलाई, बुधवार को गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व श्रद्धा एवं आस्था के साथ मनाया जाएगा। यह दिन अपने गुरु के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और समर्पण व्यक्त करने का विशेष अवसर है। गुरु अपने ज्ञान और अनुभव से शिष्य के जीवन को उचित दिशा प्रदान करते हैं तथा अज्ञानरूपी अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं।
विज्ञापन
इस वर्ष गुरु पूर्णिमा पर विशेष ज्योतिषीय संयोग बन रहा है। 29 जुलाई को चन्द्रमा मकर राशि में उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में रहेंगे और देवगुरु बृहस्पति की पूर्ण दृष्टि चन्द्रमा पर रहेगी। बुधवार के दिन बनने वाला यह संयोग गुरु पूर्णिमा के ज्योतिषीय महत्व को और विशेष बनाता है।
विज्ञापन
ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति को गुरु, ज्ञान, धर्म, विवेक, सद्बुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का कारक माना गया है, जबकि चन्द्रमा मन, भावनाओं और मानसिक शांति के कारक हैं। ऐसे में गुरु पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा पर देवगुरु बृहस्पति की पूर्ण दृष्टि ज्ञान और मन के सुंदर समन्वय का प्रतीक है।
विज्ञापन
गुरु पूर्णिमा के दिन प्रातः स्नान कर अपने इष्टदेव का स्मरण करें। अपने गुरु का श्रद्धापूर्वक पूजन एवं चरण वंदन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। गुरु को श्रद्धानुसार पीले वस्त्र, पीले पुष्प, फल, मिठाई अथवा अन्य पीली वस्तुएँ उपहार स्वरूप अर्पित करें। साथ ही गुरु से प्राप्त ज्ञान एवं संस्कारों को जीवन में उतारने का संकल्प लें।
सायंकाल चन्द्रोदय के पश्चात चन्द्रमा को जल में थोड़ा दूध एवं अक्षत मिलाकर अर्घ्य अर्पित करें। भगवान शिव का ध्यान करते हुए “ॐ सोमेश्वराय नमः” मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें तथा मन की शांति, सद्बुद्धि और जीवन में सकारात्मकता की प्रार्थना करें। गुरु पूर्णिमा का वास्तविक संदेश केवल गुरु पूजन तक सीमित नहीं है, बल्कि गुरु द्वारा दिए गए ज्ञान को अपने आचरण में उतारना और उनके दिखाए सद्मार्ग पर चलना ही गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा है।