Haldwani News: उत्तरायणी पर्व पर उत्थान मंच से निकली शोभायात्रा में दिखा आस्था और उत्सव का संगम
उत्तरायणी पर्व पर हल्द्वानी की सड़कों पर निकली विशाल शोभायात्रा में ढोल-दमाऊ, झांकियों और लोक आस्था के संग पर्वतीय संस्कृति की झलक देखने को मिली।
विस्तार
हल्द्वानी में ढोल-दमाऊ की गूंजती थाप के साथ जब आस्था ने कदम बढ़ाए और परंपराओं की पालकी पर सजी संस्कृति शहर की सड़कों पर उतरी तो भाबर एक दिन के लिए पूरा पहाड़ बन गया। उत्तरायणी पर्व पर निकली विशाल शोभायात्रा में लोकदेवता गोलज्यू की जयकार, झांकियों की रंगत और जनमानस की भागीदारी ने आस्था, लोक उत्सव और सांस्कृतिक एकता का अद्भुत दृश्य रच दिया।
उत्तरायणी पर्व पर पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच के संरक्षक हुकम सिंह कुंवर, अध्यक्ष खड़क सिंह बगडवाल सहित मंच के पदाधिकारियों ने बुधवार को विधिवत शोभायात्रा को मेला स्थल से रवाना किया। सबसे आगे गोलज्यू की शोभायात्रा और निशान शामिल रहा। शोभायात्रा और जनमानस की भीड़ ने पर्व के उल्लास को चौगुना कर दिया। लोक संस्कृति, परंपराओं और पर्व-त्योहारों की जीवंत झलक देखने के लिए सड़कों के दोनों ओर लोगों का हुजूम उमड़ा। पुष्पवर्षा कर लोगों ने शोभायात्रा का स्वागत किया।
30 झांकियों में दिखीं संस्कृति की झलक
शोभायात्रा में भैरव पूजा, सातूं-आठूं पर्व सहित करीब 30 मनमोहक झांकियां शामिल हुईं। गोलज्यू के अल्मोड़ा स्थित चितई मंदिर के प्रतिरूप वाली झांकी, सीमांत बरपटिया (ज्येष्ठरा) जनजाति उत्थान समिति मुनस्यारी, फूलदेई त्योहार, शिवालय कालोनी डहरिया का गोलज्यू जागर, नटराज आर्ट की ओर से नृत्य प्रस्तुति, राजपुरा से घोड़ों के साथ विवाह नृत्य भी शामिल रहा। दुल्हा-दुल्हन और मांगलिक गीतों के साथ पहाड़ी बर्यात की झांकी आठ साल बाद निकली। रामाश्रय जन समिति तल्ली बमौरी की शोभायात्रा में महिलाएं शगुन आखर गाते हुए निकली। हीरानगर से श्री केदारनाथ की झांकी पहली बार देखने को मिली। गौरया संरक्षण को लेकर एक वाहन भी आकर्षण का केंद्र रहा। नंदा राजजात की भव्य झांकी ने भी लोगों को बांधे रखा। शाम को झांकियों के परिणाम घोषित किए गए। इसमें पहाड़ी बर्यात को पहला स्थान मिला। हमार मातृभूमि हमार पहाड़ ऊंचापुल को दूसरा, सीमांत कठघरिया को तीसरा और नंदा राजजात यात्रा को सांत्वना पुरस्कार मिला।
राज्य बनने के बाद सपनों के पूरा न होने का दर्द भी दिखा
पूर्व कमाडेंट सरदार आरके सिंह झांकी में अपने शरीर पर पंफलेट के माध्यम से शिक्षा, पर्यटन, स्वास्थ्य, कृषि की वकालत करते दिखे। उन्होंने कहा कि राज्य बने 25 साल हो गए हैं लेकिन जिस अवधारणा के साथ उत्तराखंड का निर्माण हुआ वह अभी साकार नहीं हुआ है। साथी संगठन से जुड़ीं महिलाओं और बालिकाओं ने बेटी बचाओ का संदेश दिया।
कहीं रेवड़ी बंटी तो कहीं आलू-चना
जेल रोड चौराहे से लेकर शोभायात्रा कालाढूंगी रोड, तिकोनिया, रेलवे बाजार, सिंधी चौराहे से होते हुए वापस हीरानगर पहुंची। इस दौरान यात्रा मार्ग पर जगह-जगह संगठनों की ओर से लोगों को रेवड़ी, आलू, चना आदि बांटे गए। टैंट एसोसिएशन, सिख समाज, व्यापार मंडल, टेलीकॉम के अलावा तिकोनिया चौराहे के पास विधायक सुमित हृदयेश की ओर से भी भंडारे का आयोजन किया किया।
अधिवक्ताओं और निगम कर्मियों ने किया स्वागत
एसडीएम कोर्ट के बाहर अधिवक्ताओं ने शोभायात्रा का स्वागत किया। नगर निगम के बाहर मेयर गजराज बिष्ट, दुग्धसंघ अध्यक्ष मुकेश बोरा, प्रबंधक अनुराग शर्मा, संजय भाकुनी, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, दायित्व धारी दिनेश आर्य, रंजन बर्गली, पूर्व मेयर जोगेंद्र रौतेला, प्रताप रैकवाल, पार्षद सचिन तिवारी, विशंभर कांडपाल, हेम अवस्थी, कैलाश तिवारी समेत कई लोगों ने शोभायात्रा का भव्य स्वागत किया।
शहर के प्रमुख लोग रहे शामिल
उत्थान मंच के उपाध्यक्ष गोपाल सिंह बिष्ट, सचिव देवेंद्र तोलिया, कोषाध्यक्ष त्रिलोक बनोली, भुवन जोशी के अलावा विधायक बंशीधर भगत, भाजपा नेता महेश शर्मा, कांग्रेस नेता ललित जोशी, लक्ष्मण सिंह लमगड़िया, पूर्व सांसद डॉ. महेंद्र पाल सिंह, कैलाश जोशी, हेम भट्ट, शोभा बिष्ट आदि मौजूद रहे।
आज पुरस्कारों के साथ समापन
हीरानगर में आयोजित उत्तरायणी महोत्सव में बुधवार शाम हुई सांस्कृतिक संध्या में सूरज प्रकाश और पवन कार्की के गीतों पर लोग खूब झूमे। सचिव देवेंद्र तोलिया ने बताया कि पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच में चल रहे उत्तरायणी महोत्सव का बृहस्पतिवार को पुरस्कार वितरण के साथ समापन होगा।
जब उत्थान मंच के लिए बलवंत चुफाल के नेतृत्व में हुआ था जन आंदोलन
पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच हीरानगर से मकर संक्रांति पर बुधवार को निकली शोभायात्रा में उमड़े जन सैलाब से निसंदेह उन आंदोलनकारियों को सुकून मिला होगा, जिन्होंने यहां पर्वतीय समाज की स्थापना के लिए कड़ा संघर्ष किया। पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच के संस्थापक अध्यक्ष स्व. बलवंत सिंह चुफाल के नेतृत्व में 1982 में जेसी शर्मा, पान सिंह, जमन सिंह, राम सिंह कुंवर, धारा बल्लभ जोशी, पूरन चंद्र उप्रेती, हुकम सिंह कुंवर समेत करीब 116 लोगों ने भूमि के लिए धरना शुरू किया था। यह बाद में एक बड़े जन आंदोलन के रूप में तब्दील हो गया और कई लोग जेल भी गए। उत्थान मंच के संरक्षक हुकम सिंह कुंवर का कहना है कि उत्तरायणी मेला करने का मुख्य कारण संस्कृति को बढ़ावा देना और अपनी जड़ों से जुड़ने का आह्वान था।
- बच्चे हमारी पुरातन संस्कृति को सीखते नहीं हैं। पारंपरिक पहनावा नहीं पहनते हैं। ऐसे पर्व और मेले युवा पीढ़ी को सकारात्मक संदेश देते हैं। - तारा पांगती, मुनस्यारी
- उत्थान मंच में संस्कृति देखने को मिल रही है। हमें बच्चों को घर में तो सिखाना चाहिए, ऐसी जगहों पर भी ले जाना चाहिए अन्यथा उन्हें संस्कृति का पता नहीं चलेगा। - खष्टी देवी, धानमिल
- मैं शोभायात्रा में फूलदेई पर्व की झांकी के साथ शामिल हुई हूं। संस्कृति को अपनाने में शर्म कैसी, यह बात में अपने साथ वालों को भी कहती हूं। - रुचि, ऊंचापुल
- यहां आकर हमें अपने त्योहार और संस्कृति की झलक देखने को मिल रही है। पर्वतीय समाज के लोग एक साथ दिखाई दे रहे हैं बहुत अच्छा लग रहा है। - विदुशी, हल्द्वानी
18 इंस्पेक्टर के साथ 600 पुलिस कर्मियों ने शोभायात्रा में संभाली सुरक्षा की कमान
उत्तरायणी पर्व के तहत बुधवार को शहर में शोभायात्रा निकाली गई। इसमें 18 इंस्पेक्टर के साथ ही तकरीबन 600 पुलिस की कर्मियाें की तैनाती की गई। हीरानगर से कालाढूूंगी रोड होते हुए तिकोनिया और वर्कशॉप लाइन की तरफ चप्पे-चप्पे पर पुलिस की मौजूदगी रही। एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी नगर निगम तो कालूसिद्ध मंदिर के पास एसपी सिटी मनोज कुमार कत्याल ने खुद तैनात रहकर व्यवस्था का जायजा लिया। इसके पहले मंगलवार रात पुलिस ने चेकिंग अभियान चलाया। एसपी ट्रैफिक डॉ. जगदीश चंद्र के नेतृत्व में टीमों ने यातायात नियमों का उल्लंघन करते हुए वाहन चलाने वाले 187 के चालान काटते हुए 70,250 रुपये का जुर्माना वसूला। पांच वाहनों को सीज किया। एक वाहन चालक के लाइसेंस को निरस्त करने की संस्तुति की। इसी प्रकार संदिग्ध रूप से मिले 59 लोगों का पुलिस एक्ट में चालान करते हुए 12,250 रुपये जमा कराए ।

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