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हाईकोर्ट : सभी विभागों के सचिव से स्वीकृत रिक्तियों का डाटा दाखिल करने के दिए निर्देश

अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: गायत्री जोशी Updated Thu, 15 Jan 2026 10:18 AM IST
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सार

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने विभागों में स्वीकृत पदों पर नियमित भर्तियां नहीं करने के मामले में मुख्य सचिव को सभी विभागों की रिक्तियों का डाटा शपथ पत्र सहित दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

High Court: Directed all department secretaries to submit data on approved vacancies
हाईकोर्ट।
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विस्तार
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 उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने एक याचिका पर सुनवाई के बाद राज्य सरकार की ओर से विभागों में स्वीकृत पदों पर नियमानुसार भर्तियां नहीं करने के मामले में मुख्य सचिव को सभी विभागों के सचिव से स्वीकृत रिक्तियों का डाटा एकत्र कर शपथ पत्र के माध्यम से दाखिल करने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 फरवरी की तिथि नियत की है।

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न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने 9 जनवरी के आदेश में सरकारी कार्यालयों में भर्तियों को लेकर सरकारी सिस्टम पर सख्त टिप्पणी की थी। न्यायालय ने अपने आदेशों में कहा कि उन्होंने कई याचिकाओं में यह अनुभव किया है कि विभिन्न विभागों में कई वैकेंसी होने के बावजूद, राज्य सरकार उन्हें भरने के लिए सामान्य भर्ती प्रक्रिया संबंधी कोई कदम नहीं उठा रही है। न्यायालय ने कहा कि जब ये पद स्वीकृत और उपलब्ध हैं तो सरकार इन्हें भरने का काम क्यों नहीं कर रही है।

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याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने न्यायालय को अवगत कराया कि राज्य में विभिन्न विभागों के स्वीकृत स्थाई पदों के विरुद्ध राज्य सरकार के अधिकारियों की ओर से रिक्तियों को आउटसोर्सिंग, ठेकेदार के माध्यम से या अस्थाई व्यवस्था से भरने का प्रयास किया जा रहा है, जो पूरी तरह से अनुचित है और ऐसी प्रथा स्पष्ट रूप से शोषणकारी, मनमानी, अनुचित, तर्कहीन, अतार्किक और भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 का खुला उल्लंघन है।

ये संविधान के भाग 4 के आदेश के भी विपरीत है। कोर्ट ने याचिका के दायरे को बढ़ाते और युवा पीढ़ी को ध्यान में रखते हुए पाया कि बड़ी संख्या में योग्य और पात्र युवा पीढ़ी, नियमित नियुक्ति की प्रतीक्षा में कतारबद्ध है। रिक्तियां मौजूद हैं, लेकिन प्रतिवादी/अधिकारी नियमित भर्ती प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ा रहे हैं, जो राज्य अधिकारियों की ओर से निष्क्रियता प्रतीत होती है। एकलपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि प्रत्येक विभाग में बड़ी संख्या में स्थाई और स्वीकृत रिक्तियां उपलब्ध होने के बावजूद, कोई नियमित चयन प्रक्रिया नहीं अपनाई जा रही है और नियमित चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बजाय, स्वीकृत पदों को आउटसोर्सिंग, दैनिक वेतन भोगी, अकास्मिक तदर्थ कर्मचारियों के माध्यम से भरा जा रहा है और समय बीतने के साथ-साथ वे अधिक आयु के हो जाते हैं, जो निश्चित रूप से एक चिंताजनक स्थिति है।


न्यायालय ने अपने आदेश में मुख्य सचिव से प्रत्येक विभाग के सचिव से स्वीकृत रिक्तियों का पूरा डाटा एकत्र करने के बाद शपथ पत्र दाखिल करने को कहा है। इसके साथ ही न्यायालय ने स्थाई, नियमित और स्वीकृत रिक्तियों की उपलब्धता के बावजूद नियमित भर्ती प्रक्रिया क्यों शुरू नहीं की जा रही है और इन रिक्तियों को आउटसोर्स, दैनिक वेतनभोगी या तदर्थ कर्मचारियों द्वारा क्यों भरा जा रहा है। इस पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। न्यायालय ने क्लास 4 के पदों को विलुप्त होता कैडर क्यों घोषित किया है।


 

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