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UK: तंग गलियां और झूलते तार...बड़े हादसे का न्योता है हल्द्वानी का बाजार, क्या प्रशासन को है इसकी फिक्र?

अमर उजाला नेटवर्क, हल्द्वानी Published by: Heera Updated Thu, 25 Jun 2026 07:43 AM IST
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सार

हल्द्वानी का मुख्य बाजार तंग गलियों, अतिक्रमण, अवैध पार्किंग और झूलते बिजली के तारों के कारण आग की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी बड़े प्रतिष्ठान में आग लगी तो दमकल वाहनों का घटनास्थल तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा।

Illegal parking has narrowed the internal roads of the Haldwani market
हल्द्वानी बाजार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

हल्द्वानी शहर का प्रमुख बाजार आग के लिहाज से बेहद संवेदनशील होता जा रहा है, लेकिन हालात सुधारने की दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। बाजार की तंग गलियां, बढ़ता अतिक्रमण, अवैध पार्किंग, सड़क किनारे ठेले और नीचे झूलते बिजली के तार किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाजार के भीतर किसी बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान में आग लगती है तो दमकल वाहनों के लिए घटनास्थल तक पहुंचना ही सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है। ऐसे में आग पर समय रहते काबू पाना मुश्किल हो जाएगा और जान-माल के बड़े नुकसान की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता।

मटर गली: जहां आग लगी तो बचाव की कोई उम्मीद नहीं
रोडवेज के सामने स्थित मटर गली महज दो से तीन फीट चौड़ी और 150 मीटर चौड़ी है। इस गली में 100 से अधिक दुकानें संचालित हो रही हैं। अधिकतर दुकानें कपड़े और इलेक्ट्रॉनिक सामान की हैं। यहां बिजली के झूलते तार अनहोनी को दावत दे रहे हैं। इतनी संवेदनशील गली में दमकल की बड़ी गाड़ी तो दूर बुलेट बाइक तक पहुंचना मुश्किल है।

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पटेल चौक: अतिक्रमण और अवैध पार्किंग का अड्डा
मटर गली से आगे निकलकर जैसे ही पटेल चौक के पास पहुंचेंगे तो यह इलाका भी आग लगने की स्थिति में संवेदनशील है। यहां दोनों तरफ दुकानों के आगे अतिक्रमण मिलेगा। सड़क के दोनों ओर दुकानों का अतिक्रमण, सड़क पर ठेले वालों का कब्जा और हर तरफ बेतरतीब खड़ी बाइकें किसी भी आपातकालीन वाहन का रास्ता रोक सकती हैं।

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मीरामार्ग: हादसे ने चेताया, लेकिन सिस्टम अब भी सो रहा है
मंगलवार रात मीरा मार्ग क्षेत्र में ही जूते की दुकान में आग लगी थी। इस इलाके की तंग गलियों में दर्जनों दुकानें हैं। यदि आग लगी तो इन क्षेत्रों का दमकल का पहुंचना मुश्किल होगा। खासकर दिन के समय यहां काफी भीड़ होती है और अतिक्रमण से सड़क की चौड़ाई कई फुट घट जाती है।

वीआईपी के लिए ग्रीन कॉरिडोर, दमकल के लिए क्यों नहीं
जब किसी वीआईपी का काफिला निकलता है तो मिनटों में सड़कें खाली करा दी जाती हैं और ग्रीन कॉरिडोर बना दिया जाता है। लेकिन जब किसी दुकान, मकान या बाजार में आग लगती है तब वही प्रशासन और पुलिस व्यवस्था नदारद हो जाती है। सोमवार को केवीएम स्कूल में लगी आग के दौरान दमकल की टीम समय पर रवाना हुई लेकिन रास्ते में जाम ने उसकी रफ्तार रोक दी। आग की घटनाओं में हर मिनट कीमती होता है। फिर भी फायर ब्रिगेड के लिए कोई आपातकालीन यातायात व्यवस्था नहीं है।

बेतरतीब पार्किंग रोक देती है राहत
दो साल पहले अंबिका विहार कॉलोनी में कपड़ों के गोदाम में आग लग गई। दमकल की गाड़ी मुख्य मार्ग तक तो पहुंच गई लेकिन जैसे अंबिका विहार की गली में घुसी तो सड़क पर बेतरतीब तरीके से खड़े चारपहिया वाहनों ने उनका रास्ता रोक लिया। बाद में वाहनों को हटाकर दमकल टीम मौके पर पहुंची। इससे बचाव कार्य 20 से 25 मिनट की देरी से शुरू हुआ।

वीडियो बनाने वालों का तमाशा
अग्निकांड की घटनाओं में मौके पर तमाशबीनों की भीड़ जुट जाती है। इससे दमकल वाहनों का रास्ता बाधित होता है। इन दिनों सोशल मीडिया पर रील डालने के लिए भी कई लोग मोबाइल से वीडियो बनाने लगते हैं और फायरकर्मियों के काम में बाधा डालते हैं।

लोग दे देते हैं अलग-अलग जानकारी
जब आग लगती और फायर स्टेशन को इसकी सूचना मिलती है तो महज दो से तीन मिनट के अंदर ही पूरी टीम तैयार होकर निकलती है। इस तीन मिनट में ही आग की सूचना देने के लिए कई लोग फोन कर देते हैं। हर कॉलर आग की घटना को अपने हिसाब से ब्रीफ करता है। कई बार अस्पष्टता के कारण टीम को अग्निकांड की भयावहता का सही अनुमान नहीं लगने के कारण तैयारी करने में समस्या आती है।

दो हाईड्रेंट खराब मिले, पूर्व में नहीं थी जानकारी
फायर विभाग के रिकॉर्ड में सही हाईड्रेंट की सूचना होती है जिसके आधार पर टीम काम करती है। मंगलवार को जब मीरा मार्ग पर जूते के दुकान में आग लगी तो दमकल के पास दो हाईड्रेंट का रिकॉर्ड था। जब टीम ने वहां से पानी भरने की कोशिश की तो पता चला कि हाईड्रेंट लंबे समय खराब हैं। सूत्रों के अनुसार खराबी की जानकारी जल संस्थान ने दमकल विभाग को नहीं दी थी।

आग की घटना की सूचना मिलते ही दमकल टीम को दो से तीन मिनट के अंदर ही रवाना किया जाता है। रास्ते में जाम लगने या तंग गलियों की वजह से कभी-कभी दिक्कत होती है। आग लगने पर संबंधित रास्ते को भी महज दो से तीन मिनट के अंदर खाली कराना जरूरी होता है। जितनी जल्दी वाहन पहुंचेगा आग बुझा दी जाएगी। आग के मामले में एक-एक मिनट कीमती होता है। - गौरव किरार, सीएफओ

 

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