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Nainital News: प्रकृति की गूंज और कविताओं की फुहार के बीच जीवंत हुई लोक संस्कृति
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हल्द्वानी। क्रिएटिव उत्तराखंड की ओर से उत्थान मंच में आयोजित किताब कौतिक के दूसरे दिन साहित्य और लोक संवेदनाओं का संगम देखने को मिला। यह मेला उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन को समर्पित रहा। इस आयोजन ने स्थानीय कला और साहित्य को बढ़ावा दिया।
मेले का मुख्य आकर्षण बहुभाषी काव्य सम्मेलन रहा। इसमें हिंदी, कुमाऊंनी और नेपाली भाषाओं में कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। पुष्पलता जोशी, राजेंद्र ढैला, हेमा हरबोला, अमृता पांडे, दयाल पांडे और दया ऐठानी ने अपनी कविताओं से दर्शकों की वाहवाही बटोरी। दिन का आगाज नेचर वॉक से हुआ। इसमें पक्षी विशेषज्ञ राजेश भट्ट और वनस्पति वैज्ञानिक बी एस कलाकोटी ने जैव विविधता संरक्षण पर जोर दिया। इसके बाद कविता कारवां में प्रतिभागियों ने पसंदीदा कवियों की रचनाओं का पाठ किया। वैचारिक सत्र में वक्ता शिव प्रसाद सेमवाल ने गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों के भावार्थ पर चर्चा की।
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. नवीन चंद्र लोहनी, मानस कॉलेज के निदेशक अशोक पंत और डॉ. संजीव जोशी ने रोजगारपरक और व्यावहारिक शिक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। ऐपण, शतरंज प्रतियोगिता और कठपुतली वर्कशॉप जैसी गतिविधियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। दिन का समापन सांस्कृतिक संध्या के साथ हुआ। इस दौरान दिवंगत प्रसिद्ध लोकगायक दीवान कनवाल को श्रद्धांजलि दी गई। गायक मनोज बोरा और मोहन जोशी ने उनके सदाबहार गीतों को स्वर दिया।
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बारिश ने बढ़ाई पुस्तक प्रेमियों की मुश्किलें
किताब कौतिक के दूसरे दिन सुबह हुई बारिश ने आयोजकों और पुस्तक प्रेमियों की मुश्किलें बढ़ा दी। दोपहर बाद जैसे ही धूप खिली तो पुस्तक प्रेमियों का हुजूम उमड़ पड़ा और शाम को लोगों ने स्टालों पर अपनी पसंदीदा किताबों की जमकर खरीदारी की।
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मेले का मुख्य आकर्षण बहुभाषी काव्य सम्मेलन रहा। इसमें हिंदी, कुमाऊंनी और नेपाली भाषाओं में कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। पुष्पलता जोशी, राजेंद्र ढैला, हेमा हरबोला, अमृता पांडे, दयाल पांडे और दया ऐठानी ने अपनी कविताओं से दर्शकों की वाहवाही बटोरी। दिन का आगाज नेचर वॉक से हुआ। इसमें पक्षी विशेषज्ञ राजेश भट्ट और वनस्पति वैज्ञानिक बी एस कलाकोटी ने जैव विविधता संरक्षण पर जोर दिया। इसके बाद कविता कारवां में प्रतिभागियों ने पसंदीदा कवियों की रचनाओं का पाठ किया। वैचारिक सत्र में वक्ता शिव प्रसाद सेमवाल ने गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों के भावार्थ पर चर्चा की।
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उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. नवीन चंद्र लोहनी, मानस कॉलेज के निदेशक अशोक पंत और डॉ. संजीव जोशी ने रोजगारपरक और व्यावहारिक शिक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। ऐपण, शतरंज प्रतियोगिता और कठपुतली वर्कशॉप जैसी गतिविधियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। दिन का समापन सांस्कृतिक संध्या के साथ हुआ। इस दौरान दिवंगत प्रसिद्ध लोकगायक दीवान कनवाल को श्रद्धांजलि दी गई। गायक मनोज बोरा और मोहन जोशी ने उनके सदाबहार गीतों को स्वर दिया।
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बारिश ने बढ़ाई पुस्तक प्रेमियों की मुश्किलें
किताब कौतिक के दूसरे दिन सुबह हुई बारिश ने आयोजकों और पुस्तक प्रेमियों की मुश्किलें बढ़ा दी। दोपहर बाद जैसे ही धूप खिली तो पुस्तक प्रेमियों का हुजूम उमड़ पड़ा और शाम को लोगों ने स्टालों पर अपनी पसंदीदा किताबों की जमकर खरीदारी की।