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Pauri News: अहिल्या बाई होलकर को सौंपी मालवा की शासक की बागडोर
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Wed, 11 Mar 2026 07:34 PM IST
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गढ़वाल विवि के चौरास परिसर में नाट्य प्रस्तुति देते कलाकार---स्रोत विवि
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फोटो
हिमाद्री नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन अहिल्याबाई नाटक का किया गया मंचन
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। हिमाद्री नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन अहिल्याबाई नाटक का मंचन किया गया। नाटक से पूर्व कार्यक्रम का उद्घाटन राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध कवि नीरज नैथानी ने किया। नाटक में दिखाया गया कि कैसे मल्हार राव होलकर ने सती प्रथा का विरोध किया और अहिल्या बाई होलकर को मालवा की शासक की बागडोर सौंपी।
मुकेश झा की ओर से लिखित तथा रोहित त्रिपाठी निर्देशित नाटक में न्यायप्रिय शासक अहिल्या बाई होलकर के जीवन की यात्रा का प्रभावशाली ढंग से मंचन किया गया। नाटक की शुरुआत उस ऐतिहासिक प्रसंग से होती है जब मराठा साम्राज्य के महान सेनापति मल्हार राव होलकर चौंडी गांव पहुंचते हैं। वहां मंदिर में प्रार्थना कर रही बालिका अहिल्या के संस्कार और प्रतिभा से प्रभावित होकर वे उसे अपने पुत्र खंडेराव होलकर के लिए वधू के रूप में चुन लेते हैं। नाटक में दुखद मोड़ तब आता है जब युद्धभूमि में खंडेराव वीरगति को प्राप्त हो जाते हैं। इस घटना के बाद समाज की कुरीति सती प्रथा का दबाव अहिल्या पर पड़ता है लेकिन मल्हार राव होलकर और गौतमी बाई इसका विरोध करते हुए उन्हें सती होने से रोकते हैं। इस दृश्य को देखकर दर्शकों की आंखें नम हो जाती हैं। इसके बाद अहिल्या बाई का राजतिलक होता है और वे मालवा की शासक के रूप में राज्य की बागडोर संभालती हैं। नाटक में उनके पुत्र माले राव होलकर की ओर से एक निर्दोष व्यक्ति की हत्या, अहिल्याबाई का अपने पुत्र को कठोर दंड देने का निर्णय के प्रसंगों का कलाकारों ने शानदार मंचन किया। इस मौके पर केंद्र निदेशक गणेश खुगशाल, डाॅ. संजय पांडेय आदि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। हिमाद्री नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन अहिल्याबाई नाटक का मंचन किया गया। नाटक से पूर्व कार्यक्रम का उद्घाटन राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध कवि नीरज नैथानी ने किया। नाटक में दिखाया गया कि कैसे मल्हार राव होलकर ने सती प्रथा का विरोध किया और अहिल्या बाई होलकर को मालवा की शासक की बागडोर सौंपी।
मुकेश झा की ओर से लिखित तथा रोहित त्रिपाठी निर्देशित नाटक में न्यायप्रिय शासक अहिल्या बाई होलकर के जीवन की यात्रा का प्रभावशाली ढंग से मंचन किया गया। नाटक की शुरुआत उस ऐतिहासिक प्रसंग से होती है जब मराठा साम्राज्य के महान सेनापति मल्हार राव होलकर चौंडी गांव पहुंचते हैं। वहां मंदिर में प्रार्थना कर रही बालिका अहिल्या के संस्कार और प्रतिभा से प्रभावित होकर वे उसे अपने पुत्र खंडेराव होलकर के लिए वधू के रूप में चुन लेते हैं। नाटक में दुखद मोड़ तब आता है जब युद्धभूमि में खंडेराव वीरगति को प्राप्त हो जाते हैं। इस घटना के बाद समाज की कुरीति सती प्रथा का दबाव अहिल्या पर पड़ता है लेकिन मल्हार राव होलकर और गौतमी बाई इसका विरोध करते हुए उन्हें सती होने से रोकते हैं। इस दृश्य को देखकर दर्शकों की आंखें नम हो जाती हैं। इसके बाद अहिल्या बाई का राजतिलक होता है और वे मालवा की शासक के रूप में राज्य की बागडोर संभालती हैं। नाटक में उनके पुत्र माले राव होलकर की ओर से एक निर्दोष व्यक्ति की हत्या, अहिल्याबाई का अपने पुत्र को कठोर दंड देने का निर्णय के प्रसंगों का कलाकारों ने शानदार मंचन किया। इस मौके पर केंद्र निदेशक गणेश खुगशाल, डाॅ. संजय पांडेय आदि मौजूद रहे।
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