{"_id":"69c674c828f29ee3d80cec46","slug":"health-preservation-and-promotion-possible-through-marma-therapy-prof-joshi-shrinagar-news-c-53-1-sri1002-121383-2026-03-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"मर्म चिकित्सा से स्वास्थ्य संरक्षण और संवर्धन संभव: प्रो. जोशी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मर्म चिकित्सा से स्वास्थ्य संरक्षण और संवर्धन संभव: प्रो. जोशी
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Fri, 27 Mar 2026 05:45 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
- मर्म चिकित्सा शिविर का समापन, विशेषज्ञों ने बताए लाभ
देवप्रयाग। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में योग विज्ञान विभाग के तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय मर्म चिकित्सा शिविर का समापन शुक्रवार को हुआ। इस अवसर पर मर्म विशेषज्ञ एवं उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. सुनील कुमार जोशी ने कहा कि मर्म चिकित्सा के परिणाम अत्यंत आश्चर्यजनक होते हैं और यह प्रकृति प्रदत्त क्षमता का प्रभावी उपयोग है। उन्होंने बताया कि यह पद्धति रोग निवारण के साथ-साथ स्वास्थ्य संरक्षण, संवर्धन और प्रतिरक्षण में भी सहायक है तथा योग के साथ मिलकर अधिक लाभकारी सिद्ध हो रही है। समापन समारोह की अध्यक्षता परिसर निदेशक प्रो. पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने की और छात्रों से मर्म चिकित्सा को स्वयं एवं समाज के हित में अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में योग विज्ञान विभाग के संयोजक डॉ. सुधांशु वर्मा और डॉ. रश्मिता भी उपस्थित रहे। शिविर के अंतिम दिन प्रो. जोशी ने योग प्राध्यापकों के साथ लगभग 20 मरीजों का उपचार किया, जिनमें कमर दर्द, अंगों में अकड़न, अपच, आंखों के रोग तथा सेरेब्रल पाल्सी से ग्रस्त एक 10 वर्षीय बालक शामिल था।
Trending Videos
देवप्रयाग। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में योग विज्ञान विभाग के तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय मर्म चिकित्सा शिविर का समापन शुक्रवार को हुआ। इस अवसर पर मर्म विशेषज्ञ एवं उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. सुनील कुमार जोशी ने कहा कि मर्म चिकित्सा के परिणाम अत्यंत आश्चर्यजनक होते हैं और यह प्रकृति प्रदत्त क्षमता का प्रभावी उपयोग है। उन्होंने बताया कि यह पद्धति रोग निवारण के साथ-साथ स्वास्थ्य संरक्षण, संवर्धन और प्रतिरक्षण में भी सहायक है तथा योग के साथ मिलकर अधिक लाभकारी सिद्ध हो रही है। समापन समारोह की अध्यक्षता परिसर निदेशक प्रो. पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने की और छात्रों से मर्म चिकित्सा को स्वयं एवं समाज के हित में अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में योग विज्ञान विभाग के संयोजक डॉ. सुधांशु वर्मा और डॉ. रश्मिता भी उपस्थित रहे। शिविर के अंतिम दिन प्रो. जोशी ने योग प्राध्यापकों के साथ लगभग 20 मरीजों का उपचार किया, जिनमें कमर दर्द, अंगों में अकड़न, अपच, आंखों के रोग तथा सेरेब्रल पाल्सी से ग्रस्त एक 10 वर्षीय बालक शामिल था।