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Pithoragarh News: सेब की खुशबू से महक रहा है एप्पल मैन मनोज का बगीचा
Wed, 22 Jul 2026 11:36 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Wed, 22 Jul 2026 11:36 PM IST
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पिथौरागढ़। निजी नौकरी छोड़ पिछले 10 सालों से खेती में जुटे नाकोट क्षेत्र के सिंतोली गांव के मनोज खड़ायत आज बागवानी से सफल आजीविका चला रहे हैं। एप्पल मैन के नाम से चर्चित मनोज की 10 नाली भूमि में 500 सेब के पेड़ लगे हैं, जिनमें से 200 पेड़ फलों से लदे हुए हैं। वह सेब उत्पादन के साथ-साथ क्षेत्र के अन्य लोगों को भी सेब के पौधे उपलब्ध कराकर स्वरोजगार की राह दिखा रहे हैं।
एप्पल मैन मनोज ने बताया कि उन्होंने पूर्व में कई जगहों पर कंप्यूटर क्षेत्र में कार्य किया। वर्ष 2016 में उन्होंने सेब उत्पादन की तकनीक सीखी। साथ ही हिमाचल और चाफी स्थित इंडो डच नर्सरी से सेब की डिलेसियस और गाला प्रजाति की पौध मंगाई। ठंडी जगह होने से उत्पादन अच्छा होने लगा तो उन्होंने खुद ही पौधे तैयार करने शुरू किए।
अब वह जिले के अन्य काश्तकारों को भी पौधे उपलब्ध करा रहे हैं। वर्तमान में उनका बगीचा लाल सेबों की खुशबू से महक रहा है। उन्होंने बताया कि अभी पांच-छह क्विंटल सेब का उत्पादन होता है। बगीचे में लगाए गए अन्य पौधों के बढ़े होने के बाद उत्पादन भी बढ़ जाएगा।
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इन दिनों सेब पक कर तैयार है और उन्हें तोड़ने का कार्य चल रहा है। मनोज खड़ायत ने बताया कि ग्राहक सेब खरीदने के लिए घर में आते हैं। डिलेसियस 200-250 और गाला सेब 300 रुपये किलोग्राम बिक रहा है। सड़क नहीं होने से ढुलान अधिक पड़ता है।
बॉक्स
सड़क नहीं होने से हो रहा है व्यवधान
एप्पल मैन मनोज खड़ायत ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में सेब का बगीचा तैयार करने में काफी लागत लगाई है। मंडी व्यवस्था एवं बगीचे तक सड़क नहीं होने की वजह से उत्पादन बढ़ाने में व्यवधान हो रहा है। सरकार की योजनाओं में मानक के अनुरूप कार्य नहीं होता है। इसलिए कोई योजना नहीं ली।
जिले में होता है 1537 क्विंटल सेब का उत्पादन
उद्यान विभाग के अनुसार जिले में सेब का 233.59 हेक्टेयर क्षेत्रफल है। यहां 1537 क्विंटल सेब का उत्पादन होता है। मुख्य उद्यान अधिकारी अभिनव कुमार ने बताया कि एम-9 एवं एम-111 प्रजाति के पौधे किसानों को उपलब्ध कराए जाते हैं। 20 नाली भूमि पर 12 लाख रुपये की लागत से एम-9 के पौधे लगाने पर सरकार की ओर से 60 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। 20 नाली में 7.50 की लागत से एम-111 प्रजाति के पौधे लगाने पर काश्तकार को 60 फीसदी सब्सिडी दी जा रही है। इसके अलावा इच्छुक किसानों को निशुल्क पौध उपलब्ध कराई जा रही है।
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एप्पल मैन मनोज ने बताया कि उन्होंने पूर्व में कई जगहों पर कंप्यूटर क्षेत्र में कार्य किया। वर्ष 2016 में उन्होंने सेब उत्पादन की तकनीक सीखी। साथ ही हिमाचल और चाफी स्थित इंडो डच नर्सरी से सेब की डिलेसियस और गाला प्रजाति की पौध मंगाई। ठंडी जगह होने से उत्पादन अच्छा होने लगा तो उन्होंने खुद ही पौधे तैयार करने शुरू किए।
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अब वह जिले के अन्य काश्तकारों को भी पौधे उपलब्ध करा रहे हैं। वर्तमान में उनका बगीचा लाल सेबों की खुशबू से महक रहा है। उन्होंने बताया कि अभी पांच-छह क्विंटल सेब का उत्पादन होता है। बगीचे में लगाए गए अन्य पौधों के बढ़े होने के बाद उत्पादन भी बढ़ जाएगा।
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इन दिनों सेब पक कर तैयार है और उन्हें तोड़ने का कार्य चल रहा है। मनोज खड़ायत ने बताया कि ग्राहक सेब खरीदने के लिए घर में आते हैं। डिलेसियस 200-250 और गाला सेब 300 रुपये किलोग्राम बिक रहा है। सड़क नहीं होने से ढुलान अधिक पड़ता है।
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सड़क नहीं होने से हो रहा है व्यवधान
एप्पल मैन मनोज खड़ायत ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में सेब का बगीचा तैयार करने में काफी लागत लगाई है। मंडी व्यवस्था एवं बगीचे तक सड़क नहीं होने की वजह से उत्पादन बढ़ाने में व्यवधान हो रहा है। सरकार की योजनाओं में मानक के अनुरूप कार्य नहीं होता है। इसलिए कोई योजना नहीं ली।
जिले में होता है 1537 क्विंटल सेब का उत्पादन
उद्यान विभाग के अनुसार जिले में सेब का 233.59 हेक्टेयर क्षेत्रफल है। यहां 1537 क्विंटल सेब का उत्पादन होता है। मुख्य उद्यान अधिकारी अभिनव कुमार ने बताया कि एम-9 एवं एम-111 प्रजाति के पौधे किसानों को उपलब्ध कराए जाते हैं। 20 नाली भूमि पर 12 लाख रुपये की लागत से एम-9 के पौधे लगाने पर सरकार की ओर से 60 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। 20 नाली में 7.50 की लागत से एम-111 प्रजाति के पौधे लगाने पर काश्तकार को 60 फीसदी सब्सिडी दी जा रही है। इसके अलावा इच्छुक किसानों को निशुल्क पौध उपलब्ध कराई जा रही है।