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Pithoragarh News: जिला अस्पताल में चर्म रोग विशेषज्ञ न होने से होम्योपैथिक अस्पताल में बढ़े मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Tue, 10 Mar 2026 11:06 PM IST
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पिथौरागढ़। मौसम बदलने से त्वचा रोग भी बढ़ने लगा है और जिला अस्पताल में इलाज के लिए डॉक्टर नहीं हैं। चर्म रोग विशेषज्ञ न होने से मरीज मजबूरन होम्योपैथी अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं। ऐसे में होम्योपैथिक अस्पताल में भी ओपीडी में उछाल आया है। चिकित्सकों के मुताबिक हर रोज जिले के विभिन्न हिस्सों से 30 से 50 मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं।
दरअसल, जिला अस्पताल में तैनात एकमात्र चर्म रोग विशेषज्ञ का तबादला सीएचसी धारचूला कर दिया गया है। ऐसे में जिला अस्पताल में चर्म रोग का इलाज बंद हो गया है। मौसम में बदलाव के चलते लोग दाद, खाज, खुजली, शरीर में चकत्ते निकलने, फंगल इंफेक्शन आदि की समस्या से जूझते हुए इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं लेकिन विशेषज्ञ न होने से उन्हें इसके लिए भटकना पड़ रहा है। ऐसे में मरीज अब होम्योपैथिक अस्पताल पर निर्भर हैं। चिकित्सकों के मुताबिक, होम्योपैथी में त्वचा रोगों का बेहतर इलाज होता है। इलाज मिलने से यहां ओपीडी में भी उछाल आया है। चिकित्सकों के मुताबिक, पूर्व में यहां हर रोज ओपीडी 20 से 30 पहुंचती थी। अब हर रोज 120 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें चर्म रोगियों की संख्या 30 से 50 के करीब है।
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निजी अस्पतालों में नहीं है चर्म रोग विशेषज्ञ
पिथौरागढ़। धारचूला सीएचसी को छोड़कर किसी भी सरकारी अस्पताल में चर्म रोग का इलाज नहीं हो रहा है। वहीं जिले में निजी अस्पतालों में भी चर्म रोग विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में बेड़ीनाग, गंगोलीहाट, मुनस्यारी, थल, मुवानी, कनालीछीना सहित अन्य हिस्सों के चर्म रोगी इलाज के लिए जिला मुख्यालय पहुंच रहे हैं। यहां भी चर्म रोग विशेषज्ञ न होने से उन्हें होम्योपैथिक अस्पताल पर निर्भर रहना पड़ रहा है। संवाद
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कोट-चर्म रोग से जूझते हुए बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। होम्योपैथी में चर्म रोग का बेहतर इलाज होने की लोगों को जानकारी नहीं है। चर्म रोग का यहां बेहतर इलाज हो रहा है। - डॉ. आशुतोष जोशी, चिकित्साधिकारी, जिला होम्योपैथिक अस्पताल, पिथौरागढ़
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दरअसल, जिला अस्पताल में तैनात एकमात्र चर्म रोग विशेषज्ञ का तबादला सीएचसी धारचूला कर दिया गया है। ऐसे में जिला अस्पताल में चर्म रोग का इलाज बंद हो गया है। मौसम में बदलाव के चलते लोग दाद, खाज, खुजली, शरीर में चकत्ते निकलने, फंगल इंफेक्शन आदि की समस्या से जूझते हुए इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं लेकिन विशेषज्ञ न होने से उन्हें इसके लिए भटकना पड़ रहा है। ऐसे में मरीज अब होम्योपैथिक अस्पताल पर निर्भर हैं। चिकित्सकों के मुताबिक, होम्योपैथी में त्वचा रोगों का बेहतर इलाज होता है। इलाज मिलने से यहां ओपीडी में भी उछाल आया है। चिकित्सकों के मुताबिक, पूर्व में यहां हर रोज ओपीडी 20 से 30 पहुंचती थी। अब हर रोज 120 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें चर्म रोगियों की संख्या 30 से 50 के करीब है।
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निजी अस्पतालों में नहीं है चर्म रोग विशेषज्ञ
पिथौरागढ़। धारचूला सीएचसी को छोड़कर किसी भी सरकारी अस्पताल में चर्म रोग का इलाज नहीं हो रहा है। वहीं जिले में निजी अस्पतालों में भी चर्म रोग विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में बेड़ीनाग, गंगोलीहाट, मुनस्यारी, थल, मुवानी, कनालीछीना सहित अन्य हिस्सों के चर्म रोगी इलाज के लिए जिला मुख्यालय पहुंच रहे हैं। यहां भी चर्म रोग विशेषज्ञ न होने से उन्हें होम्योपैथिक अस्पताल पर निर्भर रहना पड़ रहा है। संवाद
कोट-चर्म रोग से जूझते हुए बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। होम्योपैथी में चर्म रोग का बेहतर इलाज होने की लोगों को जानकारी नहीं है। चर्म रोग का यहां बेहतर इलाज हो रहा है। - डॉ. आशुतोष जोशी, चिकित्साधिकारी, जिला होम्योपैथिक अस्पताल, पिथौरागढ़