Pithoragarh: बीमार बुजुर्ग चार दिन तक घर पर तड़पता रहा, डोली के लिए नहीं मिले युवा; अस्पताल पहुंचते ही मौत
पिथौरागढ़ के मुनस्यारी स्थित दूरस्थ गांव हरकोट में सड़क सुविधा और युवाओं के अभाव के चलते बुजुर्ग धन सिंह मेहरा की मौत हो गई। वे बीमार थे, लेकिन गांव तक सड़क न होने और डोली ढोने वाले युवा न मिलने के कारण उन्हें समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका।
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पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी विकासखंड के दूरस्थ गांव हरकोट में एक हृदय विदारक घटना सामने आई है। तमाम दावों के बीच आज तक गांव तक सड़क नहीं पहुंच सकी। बीमार बुजुर्ग को डोली के सारे अस्पताल पहुंचाने के लिए युवा करने भी नहीं मिले। ऐसे में चार दिन तक बीमार बुजुर्ग घर पर तड़पता रहा। बमुश्किल युवाओं को खोज कर डोली के सहारे उसे अस्पताल पहुंचाया गया। समय पर अस्पताल नहीं पहुंचने से उसकी मौत हो गई।
जानकारी के मुताबिक मुनस्यारी विकासखंड के हरकोट के मालूपाती तोक निवासी धन सिंह मेहरा बीते चार दिनों से गंभीर बीमार थे। उन्हें अस्पताल इसलिए नहीं पहुंचा जा सका क्योंकि गांव तक सड़क नहीं है और डोली पकड़ने के लिए गांव में कोई युवा मौजूद नहीं है। ऐसे में धन सिंह घर पर तड़पते रहे। परिजनों ने बमुश्किल सोमवार को जिला मुख्यालय से कुछ युवा बुलाए और उन्हें एक किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पर कर बदहाल रास्ते के बीच डोली के सहारे मुख्य सड़क तक पहुंचा। तब जाकर उन्हें सीएससी मुनस्यारी ले जाया गया। यहां एक घंटे बाद ही इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। डॉक्टर ने कहा कि यदि समय पर अस्पताल पहुंचने तो शायद उनकी जान बच सकती थी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क होती तो उन्हें समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकता था जिससे उनकी जान बच सकती थी। उनकी मौत से परिजनों और ग्रामीणों में खासा आक्रोश है। वही बुजुर्ग की मौत सिस्टम पर कई सवाल खड़े कर गई है। गांव के विकास के लिए इन्हें सड़कों से जोड़ने के तमाम दावे किए जा रहे हैं। सीमांत जिले में इन गांवों के बीच सड़क के अभाव में बीमारी और गर्भवतियों को डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाना नियति बन चुका है। समय पर अस्पताल नहीं पहुंचने से बीमारी की जान बचाना मुश्किल हो रहा है। मालू पाती के धन सिंह मेहरा को भी इन्हीं खोखले दावों की मार सकते हुए दुनिया से अलविदा कहना पड़ा है।
गांव तक सड़क पहुंचाने की कवायद सिर्फ सर्वे तक सीमित पिथौरागढ़। हरकोट गांव के मालूपाती तक सड़क पहुंचने के लिए कई बार सर्वे हो चुकी है। सड़क पहुंचने की कवायत सिर्फ सर्वे तक ही सीमित है। जानकारी के मुताबिक सड़क निर्माण के लिए भूगर्भी सर्वेक्षण किया गया। अब तक इसकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। सड़क क्यों नहीं बन रही, इसमें क्या अड़चन है यह कोई नहीं जानता। इस अनदेखी के चलते ग्रामीण कई दुश्वारियां झेल रहे हैं और बीमार समय पर अस्पताल न पहुंचने से दम तोड़ रहे हैं।
बुजुर्ग की मौत से ग्रामीणों में आक्रोश
मालूपाती केक बुजुर्ग धन सिंह मेहरा की मौत से परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि सिस्टम की अनदेखी से बुजुर्ग की मौत हुई है। यदि हमारे गांव तक सड़क पहुंचती तो बीमार बुजुर्ग को समय से अस्पताल पहुंचाया जाता। ऐसे में उनकी जान बच सकती थी। ग्रामीणों ने कहा कि सिस्टम नटू गांव से पलायन रोक सका है और ना ही गांव तक सड़क पहुंच सका है। उन्होंने कहा कि हमारे लोग मूलभूत सुविधाओं के अभाव में मर रहे हैं और विकास के दावे किए जा रहे हैं।
बुजुर्ग सांस की दिक्कत से जूझ रहे थे। उसका हरसंभव इलाज किया लेकिन उनकी जान नहीं बस सकी। यदि समय से इलाज किया जाता तो शायद उनकी जान बच सकती थी। -डॉ. जेएस चुफाल, सीएमओ, पिथौरागढ़