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Pithoragarh News: पहाड़ चढ़ने से विशेषज्ञों का इन्कार
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Fri, 08 May 2026 11:04 PM IST
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पिथौरागढ़। सीमांत जिलों के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से लोगों को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है। पर्वतीय जिलों में विशेषज्ञों की नियुक्ति की सेवा विस्तार योजना सफल नहीं हो पाई है।
इस योजना के तहत प्रदेश भर में 12 विशेषज्ञों की तैनाती हुई थी। वहीं सीमांत और दुर्गम जिले में सेवा विस्तार से केवल एक बाल रोग विशेषज्ञ तैनात हुआ। अन्य विशेषज्ञ मैदानी क्षेत्रों में ही रहे, उन्होंने पहाड़ चढ़ने से इन्कार कर दिया। सीमांत जिले के अस्पताल बाल, महिला रोग, रेडियोलॉजिस्ट और कार्डियोलॉजिस्ट की कमी से जूझ रहे हैं। यहां बाल रोग विशेषज्ञ के आठ स्वीकृत पदों के मुकाबले एक और महिला रोग विशेषज्ञ के सात स्वीकृत पदों के मुकाबले दो ही तैनात हैं। तीन विशेषज्ञ हल्द्वानी जैसे मैदानी क्षेत्र में तैनात किए गए हैं। इससे दुर्गम और पहाड़ी जिलों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने का प्रयास अधूरा रह गया है।
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सीमांत जिले में दिल का एक भी डॉक्टर नहीं, स्थायी रेडियोलॉजिस्ट भी नहीं मिले
पिथौरागढ़। सीमांत जिले के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के दावे हवाई साबित हुए हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले में दिल का डॉक्टर नहीं है। हार्ट अटैक के मरीजों को हायर सेंटर रेफर कर उनकी जान आफत में डालना मजबूरी बना है। वहीं जिले में एक भी स्थायी रेडियोलॉजिस्ट तैनात नहीं हैं। सामान्य चिकित्सक को छह महीने का रेडियोलॉजी को कोर्स कराकर गर्भवतियों और मरीजों का अल्ट्रासाउंड किया जा रहा है। संवाद
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कोट-
जिले में विशेषज्ञों के रिक्त पदों की सूचना निदेशालय को दी गई है। विशेषज्ञों की तैनाती शासन स्तर पर ही संभव है। जिले के अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए विभाग गंभीरता से काम कर रहा है।
डॉ. एसएस नबियाल, सीएमओ, पिथौरागढ़
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इस योजना के तहत प्रदेश भर में 12 विशेषज्ञों की तैनाती हुई थी। वहीं सीमांत और दुर्गम जिले में सेवा विस्तार से केवल एक बाल रोग विशेषज्ञ तैनात हुआ। अन्य विशेषज्ञ मैदानी क्षेत्रों में ही रहे, उन्होंने पहाड़ चढ़ने से इन्कार कर दिया। सीमांत जिले के अस्पताल बाल, महिला रोग, रेडियोलॉजिस्ट और कार्डियोलॉजिस्ट की कमी से जूझ रहे हैं। यहां बाल रोग विशेषज्ञ के आठ स्वीकृत पदों के मुकाबले एक और महिला रोग विशेषज्ञ के सात स्वीकृत पदों के मुकाबले दो ही तैनात हैं। तीन विशेषज्ञ हल्द्वानी जैसे मैदानी क्षेत्र में तैनात किए गए हैं। इससे दुर्गम और पहाड़ी जिलों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने का प्रयास अधूरा रह गया है।
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सीमांत जिले में दिल का एक भी डॉक्टर नहीं, स्थायी रेडियोलॉजिस्ट भी नहीं मिले
पिथौरागढ़। सीमांत जिले के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के दावे हवाई साबित हुए हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले में दिल का डॉक्टर नहीं है। हार्ट अटैक के मरीजों को हायर सेंटर रेफर कर उनकी जान आफत में डालना मजबूरी बना है। वहीं जिले में एक भी स्थायी रेडियोलॉजिस्ट तैनात नहीं हैं। सामान्य चिकित्सक को छह महीने का रेडियोलॉजी को कोर्स कराकर गर्भवतियों और मरीजों का अल्ट्रासाउंड किया जा रहा है। संवाद
कोट-
जिले में विशेषज्ञों के रिक्त पदों की सूचना निदेशालय को दी गई है। विशेषज्ञों की तैनाती शासन स्तर पर ही संभव है। जिले के अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए विभाग गंभीरता से काम कर रहा है।
डॉ. एसएस नबियाल, सीएमओ, पिथौरागढ़