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Rishikesh News: एम्स के चिकित्सकों ने चेहरे की विकृति का किया सफल उपचार
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Sat, 28 Feb 2026 01:59 AM IST
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एम्स ने एक बार फिर चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के दंत चिकित्सा विभाग की मुख एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी टीम ने जबड़े के जोड़ के संलयन (टीएमजे एंकिलोसिस) और गंभीर चेहरे की विषमता से पीड़ित मरीज का बिना किसी कृत्रिम जबड़े के जोड़ के सफल उपचार किया है।
इस जटिल सर्जरी के बाद मरीज का मुंह 41 मिमी तक खुलने लगा है और चेहरे की विकृति पूरी तरह संतुलित हो गई है। एम्स प्रशासन का कहना है कि सर्जरी के पश्चात मरीज सामान्य जीवन जी रहा है।
बीते नवंबर माह में सहरानपुर निवासी एक किशोर को परिजन उपचार के लिए एम्स लाए थे। किशोर का चेहरा पूरी तरह विकृत था और जबड़ा भी नहीं खुल पा रहा था। दंत विभाग के विशेषज्ञ डॉ. प्रेम कुमार राठौड़ ने बताया कि मरीज की स्थिति बेहद जटिल थी, मुंह बिल्कुल नहीं खुल रहा था। निचला जबड़ा लगभग 2 सेमी पीछे था और चेहरे में गंभीर असंतुलन था, जिससे वह मानसिक व सामाजिक रूप से भी प्रभावित था।
डॉ. राठौड़ ने बताया कि सामान्यतः ऐसे मामलों में कृत्रिम जोड़ प्रत्यारोपण आवश्यक माना जाता है, लेकिन इस चुनौतीपूर्ण केस में टीम ने बिना कृत्रिम जोड़ और किसी सहायक उपकरण के सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। ऑपरेशन के बाद करीब चार माह तक चिकित्सक लगातार मरीज के संपर्क में रहे।
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7 घंटे की मैराथन सर्जरी
दंत विभाग के विशेषज्ञ डॉ. प्रेम कुमार राठौड़ के अनुसार, सर्जरी बहु-स्तरीय और अत्यंत चुनौतीपूर्ण रही। एक्सरे, सीटी स्कैन आदि का बारीकी से अध्ययन कर कंप्यूटर पर सर्जरी की कार्ययोजना तैयार की गई। जिसमें जबड़े के संलयन को मुक्त कर बिना ज्वाइंट के चेहरे को संतुलित आकार दिया गया। पूरी सर्जरी में करीब 7 घंटे का समय लगा। सर्जरी के बाद मरीज का मुंह 41 मिमी तक खुलने लगा और चेहरे की विकृति पूरी तरह संतुलित हो गई।
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क्या होता है टीएमजे एंकिलोसिस
एक गंभीर स्थिति है, जिसमें जबड़े का जोड़ (जॉइंट) हड्डी या रेशेदार ऊतक के कारण आपस में जुड़ जाता है, जिससे जबड़े की गति रुक जाती है। यह मुंह खोलने में असमर्थता (लॉक जॉ), चबाने/बोलने में दिक्कत और चेहरे की विकृति पैदा कर सकता है। इसका मुख्य कारण आघात, चोट या कान का संक्रमण होते हैं। इसके प्रमुख लक्षण मुंह न खुलना, चबाने/बोलने में असमर्थता, चेहरे का टेढ़ापन (विषमता) और कभी-कभी दर्द होना हैं।
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- दंत विभाग की टीम ने कीर्तिमान स्थापित किया है। एम्स का लक्ष्य मरीजों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं, उन्नत तकनीक और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना है। - प्रो. मीनू सिंह, निदेशक एम्स ऋषिकेश
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चिकित्सकों ने लौटाई किशोर के चेहरे पर मुस्कान
राजीव खत्री
ऋषिकेश। अत्यधिक विकृत चेहरे के कारण परिवार से ठुकराया गया एक किशोर अब फिर से मुस्कराना सीख गया है। हालात ऐसे थे कि किशोर हर समय अपना चेहरा ढककर रखता था। आत्मविश्वास पूरी तरह खो चुका था।
डॉ. प्रेम कुमार राठौड़ ने बताया कि किशोर के चाचा ही उपचार के लिए उसे यहां लेकर आए थे। चेहरे की जटिल स्थिति का उपचार ऑपरेशन कर जबड़े में ज्वाइंट लगाना ही था, जिसमें 60 हजार से एक लाख तक का खर्चा आने की संभावना थी। लेकिन चाचा की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण परिजनों ने असमर्थता जता दी।
डॉ. राठौड़ ने बताया हमने चुनौती स्वीकार की और बिना ज्वाइंट के चेहरे को ठीक करने की ठानी। प्रयास सफल रहा। अब किशोर का चेहरा काफी हद तक ठीक हो गया है। चेहरा ठीक होने से मरीज का आत्म विश्वास भी लौट गया है और वह हंसने मुस्कराने लगा है।
इतना ही नहीं हर समय चेहरा ढक कर रखने वाला किशोर अब पूरे आत्मविश्वास के साथ स्कूल भी जाने लगा है। ऑपरेशन होने के बाद किशोर के पिता भी अस्पताल आए। बेटे का बदला चेहरा देख बहुत खुश हुए और बेटे पर खूब प्यार लुटाया। संवाद
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विश्व में पहली बार हुई ऐसी सर्जरी
डॉ. राठौड़ ने कहा कि मरीज के चेहरे की जो स्थिति थी वह ऑपरेशन कर बिना ज्वाइंट लगाए संभव नहीं थी लेकिन हमारी टीम ने बिना ज्वाइंट लगाए ही सर्जरी कर चेहरा संतुलित कर दिया। डॉ. राठौड़ ने दावा किया कि दुनिया में यह इस प्रकार की पहली सर्जरी है जिसे एम्स के दंत विभाग ने अंजाम दिया है।
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यह रहे टीम में शामिल
इस जटिल सर्जरी को प्रो. मीनू सिंह, डीन अकादमिक प्रो. सौरभ वार्ष्णेय, एमएस डॉ. सत्या श्री बलिजा एवं विभागाध्यक्ष डॉ. आशी चुग के मार्गदर्शन में संपन्न किया गया। सर्जरी टीम में डॉ. प्रेम कुमार राठौड़, डॉ. रोहित किरण लाल, डॉ. आकांक्षा व्यास, डॉ. अपर्णा महाजन, डॉ. नाजिश खान, डॉ. सिमरन शाह और डॉ. संतोष चिट्टीबाबू शामिल रहे।
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इस जटिल सर्जरी के बाद मरीज का मुंह 41 मिमी तक खुलने लगा है और चेहरे की विकृति पूरी तरह संतुलित हो गई है। एम्स प्रशासन का कहना है कि सर्जरी के पश्चात मरीज सामान्य जीवन जी रहा है।
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बीते नवंबर माह में सहरानपुर निवासी एक किशोर को परिजन उपचार के लिए एम्स लाए थे। किशोर का चेहरा पूरी तरह विकृत था और जबड़ा भी नहीं खुल पा रहा था। दंत विभाग के विशेषज्ञ डॉ. प्रेम कुमार राठौड़ ने बताया कि मरीज की स्थिति बेहद जटिल थी, मुंह बिल्कुल नहीं खुल रहा था। निचला जबड़ा लगभग 2 सेमी पीछे था और चेहरे में गंभीर असंतुलन था, जिससे वह मानसिक व सामाजिक रूप से भी प्रभावित था।
डॉ. राठौड़ ने बताया कि सामान्यतः ऐसे मामलों में कृत्रिम जोड़ प्रत्यारोपण आवश्यक माना जाता है, लेकिन इस चुनौतीपूर्ण केस में टीम ने बिना कृत्रिम जोड़ और किसी सहायक उपकरण के सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। ऑपरेशन के बाद करीब चार माह तक चिकित्सक लगातार मरीज के संपर्क में रहे।
7 घंटे की मैराथन सर्जरी
दंत विभाग के विशेषज्ञ डॉ. प्रेम कुमार राठौड़ के अनुसार, सर्जरी बहु-स्तरीय और अत्यंत चुनौतीपूर्ण रही। एक्सरे, सीटी स्कैन आदि का बारीकी से अध्ययन कर कंप्यूटर पर सर्जरी की कार्ययोजना तैयार की गई। जिसमें जबड़े के संलयन को मुक्त कर बिना ज्वाइंट के चेहरे को संतुलित आकार दिया गया। पूरी सर्जरी में करीब 7 घंटे का समय लगा। सर्जरी के बाद मरीज का मुंह 41 मिमी तक खुलने लगा और चेहरे की विकृति पूरी तरह संतुलित हो गई।
क्या होता है टीएमजे एंकिलोसिस
एक गंभीर स्थिति है, जिसमें जबड़े का जोड़ (जॉइंट) हड्डी या रेशेदार ऊतक के कारण आपस में जुड़ जाता है, जिससे जबड़े की गति रुक जाती है। यह मुंह खोलने में असमर्थता (लॉक जॉ), चबाने/बोलने में दिक्कत और चेहरे की विकृति पैदा कर सकता है। इसका मुख्य कारण आघात, चोट या कान का संक्रमण होते हैं। इसके प्रमुख लक्षण मुंह न खुलना, चबाने/बोलने में असमर्थता, चेहरे का टेढ़ापन (विषमता) और कभी-कभी दर्द होना हैं।
- दंत विभाग की टीम ने कीर्तिमान स्थापित किया है। एम्स का लक्ष्य मरीजों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं, उन्नत तकनीक और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना है। - प्रो. मीनू सिंह, निदेशक एम्स ऋषिकेश
चिकित्सकों ने लौटाई किशोर के चेहरे पर मुस्कान
राजीव खत्री
ऋषिकेश। अत्यधिक विकृत चेहरे के कारण परिवार से ठुकराया गया एक किशोर अब फिर से मुस्कराना सीख गया है। हालात ऐसे थे कि किशोर हर समय अपना चेहरा ढककर रखता था। आत्मविश्वास पूरी तरह खो चुका था।
डॉ. प्रेम कुमार राठौड़ ने बताया कि किशोर के चाचा ही उपचार के लिए उसे यहां लेकर आए थे। चेहरे की जटिल स्थिति का उपचार ऑपरेशन कर जबड़े में ज्वाइंट लगाना ही था, जिसमें 60 हजार से एक लाख तक का खर्चा आने की संभावना थी। लेकिन चाचा की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण परिजनों ने असमर्थता जता दी।
डॉ. राठौड़ ने बताया हमने चुनौती स्वीकार की और बिना ज्वाइंट के चेहरे को ठीक करने की ठानी। प्रयास सफल रहा। अब किशोर का चेहरा काफी हद तक ठीक हो गया है। चेहरा ठीक होने से मरीज का आत्म विश्वास भी लौट गया है और वह हंसने मुस्कराने लगा है।
इतना ही नहीं हर समय चेहरा ढक कर रखने वाला किशोर अब पूरे आत्मविश्वास के साथ स्कूल भी जाने लगा है। ऑपरेशन होने के बाद किशोर के पिता भी अस्पताल आए। बेटे का बदला चेहरा देख बहुत खुश हुए और बेटे पर खूब प्यार लुटाया। संवाद
विश्व में पहली बार हुई ऐसी सर्जरी
डॉ. राठौड़ ने कहा कि मरीज के चेहरे की जो स्थिति थी वह ऑपरेशन कर बिना ज्वाइंट लगाए संभव नहीं थी लेकिन हमारी टीम ने बिना ज्वाइंट लगाए ही सर्जरी कर चेहरा संतुलित कर दिया। डॉ. राठौड़ ने दावा किया कि दुनिया में यह इस प्रकार की पहली सर्जरी है जिसे एम्स के दंत विभाग ने अंजाम दिया है।
यह रहे टीम में शामिल
इस जटिल सर्जरी को प्रो. मीनू सिंह, डीन अकादमिक प्रो. सौरभ वार्ष्णेय, एमएस डॉ. सत्या श्री बलिजा एवं विभागाध्यक्ष डॉ. आशी चुग के मार्गदर्शन में संपन्न किया गया। सर्जरी टीम में डॉ. प्रेम कुमार राठौड़, डॉ. रोहित किरण लाल, डॉ. आकांक्षा व्यास, डॉ. अपर्णा महाजन, डॉ. नाजिश खान, डॉ. सिमरन शाह और डॉ. संतोष चिट्टीबाबू शामिल रहे।