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Rishikesh News: श्मशान घाट की जमीन पर्यटन विभाग को देने पर जताई चिंता
Fri, 07 Aug 2026 06:46 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Fri, 07 Aug 2026 06:46 PM IST
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श्मशान की जमीन को लेकर एकत्रित लोग- संवाद
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- घाट की जमीन को राजस्व रिकार्ड में दर्ज करने की मांग
ऋषिकेश। शिवपुरी में जिला पंचायत सदस्य हुकुम सिंह भंडारी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने बैठक कर 44 गांवों के पैतृक श्मशान घाट की भूमि पर्यटन विभाग को आवंटित किए जाने का विरोध किया। ग्रामीणों ने कहा कि जिला प्रशासन टिहरी गढ़वाल की ओर से भट्टीखाले तोक स्थित खसरा नंबर 137, खाता संख्या 07 की करीब छह नाली भूमि पर्यटन विभाग को दिए जाने से घाट तक जाने का रास्ता बंद होने की आशंका है जिससे शवदाह में परेशानी होगी। बैठक के बाद ग्रामीणों ने एसडीएम नरेंद्रनगर को ज्ञापन भेजकर भूमि को श्मशान घाट के नाम दर्ज करने की मांग की। हुकुम सिंह भंडारी ने बताया कि उक्त पैतृक घाट का उपयोग 44 गांवों के लोग करते हैं और जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल ने 14 फरवरी 2025 को यह भूमि पर्यटन विभाग को आवंटित की थी। उन्होंने कहा कि सहमति बनी थी कि राष्ट्रीय राजमार्ग से गंगा नदी तक 20 से 30 मीटर रास्ता और घाट निर्माण के बाद ही भूमि पर्यटन विभाग को दी जाएगी, साथ ही इसे राजस्व अभिलेखों में पैतृक घाट के रूप में दर्ज किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि अब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। उन्होंने राजस्व विभाग से घाट को रिकॉर्ड में दर्ज कर सुरक्षित करने की मांग की है। बैठक में दयाल सिंह भंडारी, सुरेंद्र भंडारी, शोभन भंडारी, कमल सिंह भंडारी, संदीप भंडारी, सोनी रावत, बबीता देवी, रिंकी पुंडीर होशियार सिंह आदि उपस्थित रहे।
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ऋषिकेश। शिवपुरी में जिला पंचायत सदस्य हुकुम सिंह भंडारी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने बैठक कर 44 गांवों के पैतृक श्मशान घाट की भूमि पर्यटन विभाग को आवंटित किए जाने का विरोध किया। ग्रामीणों ने कहा कि जिला प्रशासन टिहरी गढ़वाल की ओर से भट्टीखाले तोक स्थित खसरा नंबर 137, खाता संख्या 07 की करीब छह नाली भूमि पर्यटन विभाग को दिए जाने से घाट तक जाने का रास्ता बंद होने की आशंका है जिससे शवदाह में परेशानी होगी। बैठक के बाद ग्रामीणों ने एसडीएम नरेंद्रनगर को ज्ञापन भेजकर भूमि को श्मशान घाट के नाम दर्ज करने की मांग की। हुकुम सिंह भंडारी ने बताया कि उक्त पैतृक घाट का उपयोग 44 गांवों के लोग करते हैं और जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल ने 14 फरवरी 2025 को यह भूमि पर्यटन विभाग को आवंटित की थी। उन्होंने कहा कि सहमति बनी थी कि राष्ट्रीय राजमार्ग से गंगा नदी तक 20 से 30 मीटर रास्ता और घाट निर्माण के बाद ही भूमि पर्यटन विभाग को दी जाएगी, साथ ही इसे राजस्व अभिलेखों में पैतृक घाट के रूप में दर्ज किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि अब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। उन्होंने राजस्व विभाग से घाट को रिकॉर्ड में दर्ज कर सुरक्षित करने की मांग की है। बैठक में दयाल सिंह भंडारी, सुरेंद्र भंडारी, शोभन भंडारी, कमल सिंह भंडारी, संदीप भंडारी, सोनी रावत, बबीता देवी, रिंकी पुंडीर होशियार सिंह आदि उपस्थित रहे।