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Rishikesh News: स्वादिष्ट जंक फूड खराब कर रहा है आपके पेट का मूड
Wed, 19 Aug 2026 07:36 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Wed, 19 Aug 2026 07:36 PM IST
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- फल-सब्जियों से दूरी और कम पानी बच्चों को बना रहा कब्ज का शिकार, विकास पर भी असर
- रोजाना 50 से 60 बच्चे पहुंच रहे बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में
- जंक फूड का बढ़ता स्वाद बच्चों के पेट पर भारी, कब्ज और पेट दर्द ने बढ़ाई चिंता
ऋषिकेश। बच्चों की थाली में बढ़ता जंक फूड अब उनकी सेहत पर भारी पड़ने लगा है। पिज्जा, बर्गर, चिप्स, नूडल्स और अन्य फास्ट फूड के अत्यधिक सेवन के साथ मौसमी फल-सब्जियों का कम सेवन और पर्याप्त पानी नहीं पीने की आदत बच्चों में कब्ज और पेट दर्द की समस्या बढ़ा रही है। राजकीय उपजिला चिकित्सालय की बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में रोजाना करीब 50 से 60 बच्चे कब्ज, पेट दर्द समेत इस तरह की शिकायतों के साथ पहुंच रहे हैं।
राजकीय उपजिला चिकित्सालय में तैनात वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नीतू तोमर का कहना है कि बच्चों की बदलती खानपान की आदतें चिंता का विषय बन रही हैं। स्वाद के कारण बच्चे घर के पौष्टिक भोजन, हरी सब्जियों और मौसमी फलों के बजाय जंक फूड को अधिक पसंद कर रहे हैं। इसके साथ ही कई बच्चे दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी भी नहीं पीते। इन आदतों का असर उनके पाचन तंत्र पर पड़ रहा है और कब्ज की शिकायत सामने आ रही है। डा. तोमर बताती हैं कि जंक फूड का अत्यधिक सेवन बच्चों के पेट की समस्या तक सीमित नहीं है। पोषक तत्वों से भरपूर भोजन की जगह लगातार जंक फूड लेने से बच्चों के संतुलित पोषण, वजन और लंबाई के विकास पर भी असर पड़ सकता है। बच्चों के शारीरिक विकास के लिए प्रोटीन, विटामिन, खनिज और फाइबर जैसे पोषक तत्व जरूरी हैं, जो संतुलित आहार से मिलते हैं।
पेट दर्द को हल्के में न लें
डॉ. नीतू तोमर बताती है कि बच्चों में बार-बार पेट दर्द, शौच में परेशानी, कई दिनों तक पेट साफ न होना या शौच के दौरान दर्द जैसी शिकायतों को अभिभावकों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार कब्ज रहने से बच्चे की दिनचर्या और खानपान भी प्रभावित हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
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अभिभावक इन बातों का रखें ध्यान
डॉ. तोमर कहती है कि बच्चों को जंक फूड पूरी तरह देने से रोकना मुश्किल हो सकता है, लेकिन इसकी मात्रा और आवृत्ति नियंत्रित की जा सकती है। घर के भोजन में हरी सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और मौसमी फल शामिल करें। बच्चों को नियमित अंतराल पर पर्याप्त पानी पीने की आदत डालें। साथ ही उनकी शारीरिक गतिविधि और खेलकूद पर भी ध्यान दें।
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- रोजाना 50 से 60 बच्चे पहुंच रहे बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में
- जंक फूड का बढ़ता स्वाद बच्चों के पेट पर भारी, कब्ज और पेट दर्द ने बढ़ाई चिंता
ऋषिकेश। बच्चों की थाली में बढ़ता जंक फूड अब उनकी सेहत पर भारी पड़ने लगा है। पिज्जा, बर्गर, चिप्स, नूडल्स और अन्य फास्ट फूड के अत्यधिक सेवन के साथ मौसमी फल-सब्जियों का कम सेवन और पर्याप्त पानी नहीं पीने की आदत बच्चों में कब्ज और पेट दर्द की समस्या बढ़ा रही है। राजकीय उपजिला चिकित्सालय की बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में रोजाना करीब 50 से 60 बच्चे कब्ज, पेट दर्द समेत इस तरह की शिकायतों के साथ पहुंच रहे हैं।
राजकीय उपजिला चिकित्सालय में तैनात वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नीतू तोमर का कहना है कि बच्चों की बदलती खानपान की आदतें चिंता का विषय बन रही हैं। स्वाद के कारण बच्चे घर के पौष्टिक भोजन, हरी सब्जियों और मौसमी फलों के बजाय जंक फूड को अधिक पसंद कर रहे हैं। इसके साथ ही कई बच्चे दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी भी नहीं पीते। इन आदतों का असर उनके पाचन तंत्र पर पड़ रहा है और कब्ज की शिकायत सामने आ रही है। डा. तोमर बताती हैं कि जंक फूड का अत्यधिक सेवन बच्चों के पेट की समस्या तक सीमित नहीं है। पोषक तत्वों से भरपूर भोजन की जगह लगातार जंक फूड लेने से बच्चों के संतुलित पोषण, वजन और लंबाई के विकास पर भी असर पड़ सकता है। बच्चों के शारीरिक विकास के लिए प्रोटीन, विटामिन, खनिज और फाइबर जैसे पोषक तत्व जरूरी हैं, जो संतुलित आहार से मिलते हैं।
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पेट दर्द को हल्के में न लें
डॉ. नीतू तोमर बताती है कि बच्चों में बार-बार पेट दर्द, शौच में परेशानी, कई दिनों तक पेट साफ न होना या शौच के दौरान दर्द जैसी शिकायतों को अभिभावकों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार कब्ज रहने से बच्चे की दिनचर्या और खानपान भी प्रभावित हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
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अभिभावक इन बातों का रखें ध्यान
डॉ. तोमर कहती है कि बच्चों को जंक फूड पूरी तरह देने से रोकना मुश्किल हो सकता है, लेकिन इसकी मात्रा और आवृत्ति नियंत्रित की जा सकती है। घर के भोजन में हरी सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और मौसमी फल शामिल करें। बच्चों को नियमित अंतराल पर पर्याप्त पानी पीने की आदत डालें। साथ ही उनकी शारीरिक गतिविधि और खेलकूद पर भी ध्यान दें।