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Rishikesh News: लेखक गांव में विरासत कला उत्सव का भव्य आगाज
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Sat, 14 Mar 2026 02:56 AM IST
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थानों लेखक गांव में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ करते मुख्य अतिथि। स्रोत-आयोजक
- फोटो : बबली और राजकुमार भगत।
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लेखक गांव थानो में शुक्रवार की शाम शब्दों की ऐसी सरगम बिखरी कि पूरा वातावरण साहित्य और संवेदना से महक उठा। सात दिवसीय विरासत कला उत्सव का भव्य आगाज हुआ, जिसमें कविता की ओजस्वी, व्यंग्यात्मक और भावपूर्ण धारा देर रात तक बहती रही।
कार्यक्रम का आयोजन उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय तथा लेखक गांव की संयुक्त पहल पर किया जा रहा है। शुक्रवार को उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पारिस्थितिकी पर्यटन परिषद के उपाध्यक्ष ओम प्रकाश जमदग्नि ने शिरकत की।
कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया और तालियों की गूंज से सभागार बार-बार गूंजता रहा। दिल्ली के कवि डॉ. रसिक गुप्ता ने पथ प्रदर्शक बनी युगों से, है कलम की धार ही, सार्थक हो जिंदगी बेशक जिएं दिन चार ही कविता का पाठ किया।
उत्तर प्रदेश से आए डॉ. अर्जुन सिसोदिया ने समसामयिक व्यंग्य चिंगारी जहां-जहां दीखे ले जाकर आंधी रखते हो, सीने में नफरत रखते हो, होठों पर गांधी रखते हो कविता का पाठ किया। मध्य प्रदेश से आए राकेश दांगी ने अपनी रचना में कहा संपूर्ण विश्व के सहायक आए हैं, सृष्टि के प्रथम गायक आए है कविता सुनाई।
वहीं दिल्ली से आई सरला मिश्रा ने नारी शक्ति पर अपनी भावपूर्ण रचना सुनाते हुए कहा कि प्रभु की एक अलौकिक रचना, दो कुलतारी है, सृष्टि का आधार जगत में, होती नारी है। दिल्ली से आए श्रीकांत श्री ने अपनी हास्य-व्यंग्य रचना से माहौल हल्का कर दिया, जबकि डॉ. ऋतु सिंह ने देशभक्ति से ओतप्रोत कविता अपनी आंखों में ख्वाबों की बारात है, सरहदों पर सिपाही जो तैनात है सुनाई। कवि सम्मेलन का संचालन शिवम ढौंडियाल ने किया। कार्यक्रम में गणेश खुगशाल ‘गणी’, डॉ. सर्वेश उनियाल व सुदेश शर्मा आदि मौजूद रहे।
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कार्यक्रम का आयोजन उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय तथा लेखक गांव की संयुक्त पहल पर किया जा रहा है। शुक्रवार को उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पारिस्थितिकी पर्यटन परिषद के उपाध्यक्ष ओम प्रकाश जमदग्नि ने शिरकत की।
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कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया और तालियों की गूंज से सभागार बार-बार गूंजता रहा। दिल्ली के कवि डॉ. रसिक गुप्ता ने पथ प्रदर्शक बनी युगों से, है कलम की धार ही, सार्थक हो जिंदगी बेशक जिएं दिन चार ही कविता का पाठ किया।
उत्तर प्रदेश से आए डॉ. अर्जुन सिसोदिया ने समसामयिक व्यंग्य चिंगारी जहां-जहां दीखे ले जाकर आंधी रखते हो, सीने में नफरत रखते हो, होठों पर गांधी रखते हो कविता का पाठ किया। मध्य प्रदेश से आए राकेश दांगी ने अपनी रचना में कहा संपूर्ण विश्व के सहायक आए हैं, सृष्टि के प्रथम गायक आए है कविता सुनाई।
वहीं दिल्ली से आई सरला मिश्रा ने नारी शक्ति पर अपनी भावपूर्ण रचना सुनाते हुए कहा कि प्रभु की एक अलौकिक रचना, दो कुलतारी है, सृष्टि का आधार जगत में, होती नारी है। दिल्ली से आए श्रीकांत श्री ने अपनी हास्य-व्यंग्य रचना से माहौल हल्का कर दिया, जबकि डॉ. ऋतु सिंह ने देशभक्ति से ओतप्रोत कविता अपनी आंखों में ख्वाबों की बारात है, सरहदों पर सिपाही जो तैनात है सुनाई। कवि सम्मेलन का संचालन शिवम ढौंडियाल ने किया। कार्यक्रम में गणेश खुगशाल ‘गणी’, डॉ. सर्वेश उनियाल व सुदेश शर्मा आदि मौजूद रहे।