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Rishikesh News: डायलिसिस के निर्धारित सेशन न छोड़ें किडनी रोगी
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Thu, 12 Mar 2026 02:43 AM IST
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19-एम्स में विश्व गुर्दा दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ करती एम्स निदेशक प्रो.मीनू
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विश्व गुर्दा दिवस सप्ताह के दौरान एम्स के गुर्दा रोग विभाग की ओर से सतत चिकित्सा शिक्षा के तहत कार्यशाला आयोजित की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि किडनी रोगी डायलिसिस के निर्धारित सेशन न छोड़ें। यह रोगी के लिए खतरनाक हो सकता है। कार्यशाला में पेरिटोनियल डायलिसिस की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी गई।
बुधवार को गुर्दा रोग विभाग में किडनी रोगों की डायग्नोस्टिक तकनीकों के बारे में व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) मीनू सिंह ने किया। प्रो. सिंह ने कहा कि किडनी रोगियों का इलाज करते समय डायलिसिस प्रक्रिया के प्रबंधन पर गंभीरता बरतना बहुत जरूरी है। यह एक जीवन रक्षक प्रक्रिया है और प्रबंधन की कमी से रोगी के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंच सकता है।
विभागाध्यक्ष प्रो. रविकांत ने कहा कि डायलिसिस का कोई भी सत्र छोड़ना किडनी रोगी के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि डायलिसिस करवाने वाला रोगी नियमित स्तर पर अपना डायलिसिस करवाए। डाॅ. शेरोन कंडारी, डाॅ. दीपेश धूत और डाॅ. साहिल गर्ग आदि ने ने बेसिक प्रिन्सिपल ऑफ डायलिसिस, प्रक्रिया के दौरान वाॅल्यूम मैनेजमेंट, हीमोडायलिसिस और पेरिटोनियल डायलिसिस की क्लीनिकल भिन्नताओं आदि विषयों पर जानकारी दी। इस अवसर पर डाॅ. अंकित अग्रवाल, डाॅ. लतिका चावला, डाॅ. लोकेश डाॅ. अनिल, डाॅ. अभय, डाॅ. संदीप, डाॅ. रितेश, डॉ. सायन आदि मौजूद रहे।
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बुधवार को गुर्दा रोग विभाग में किडनी रोगों की डायग्नोस्टिक तकनीकों के बारे में व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) मीनू सिंह ने किया। प्रो. सिंह ने कहा कि किडनी रोगियों का इलाज करते समय डायलिसिस प्रक्रिया के प्रबंधन पर गंभीरता बरतना बहुत जरूरी है। यह एक जीवन रक्षक प्रक्रिया है और प्रबंधन की कमी से रोगी के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंच सकता है।
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विभागाध्यक्ष प्रो. रविकांत ने कहा कि डायलिसिस का कोई भी सत्र छोड़ना किडनी रोगी के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि डायलिसिस करवाने वाला रोगी नियमित स्तर पर अपना डायलिसिस करवाए। डाॅ. शेरोन कंडारी, डाॅ. दीपेश धूत और डाॅ. साहिल गर्ग आदि ने ने बेसिक प्रिन्सिपल ऑफ डायलिसिस, प्रक्रिया के दौरान वाॅल्यूम मैनेजमेंट, हीमोडायलिसिस और पेरिटोनियल डायलिसिस की क्लीनिकल भिन्नताओं आदि विषयों पर जानकारी दी। इस अवसर पर डाॅ. अंकित अग्रवाल, डाॅ. लतिका चावला, डाॅ. लोकेश डाॅ. अनिल, डाॅ. अभय, डाॅ. संदीप, डाॅ. रितेश, डॉ. सायन आदि मौजूद रहे।