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युद्धग्रस्त विश्व में शांति का मार्ग योग : धामी
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Sat, 14 Mar 2026 02:55 AM IST
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परमार्थ निकेतन पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को रुद्राक्ष का पौधा भेंट करते स्वामी चिदानं
- फोटो : meeran shaib news
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परमार्थ निकेतन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिरकत की। उन्होंने कहा कि युद्धग्रस्त विश्व में योग ही मानवता के लिए शांति का एकमात्र मार्ग है।
इस दौरान उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पावन धरती केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि योग, अध्यात्म और आयुष की भी महान संगम स्थली है। कहा कि सरकार के निरंतर प्रयासों से उत्तराखंड को योग की वैश्विक राजधानी के रूप में सुदृढ़ता से स्थापित किया जा रहा है, ताकि विश्व भर से शांति और स्वास्थ्य की खोज में आने वाले साधकों को यहां एक श्रेष्ठ वातावरण उपलब्ध हो सके।
सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं है, बल्कि यह योग और ध्यान की जन्मभूमि भी है, जहां से जीवन की ऊर्जा और आध्यात्मिक चेतना का प्रवाह संपूर्ण विश्व में फैल रहा है। कहा कि योग नीति सबसे पहले उत्तराखंड में लागू हुई है। सरकार पांच नए योगधाम स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार आयुष वेलनेस सेंटर्स व योग वेलनेस सेंटर्स स्थापित करने की योजना बना रही है। इस राज्य में पोर्टल के माध्यम से आयुष परामर्श भी दिया जा रहा है। हमारी सरकार योग व आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अनेक कार्ययोजना बना रही है।
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि देवभूमि की पावन धरा ने योग की अनंत परंपराओं, विधाओं और आध्यात्मिक ऊर्जा को जन्म दिया है। हर घाट, हर पर्वत और हर नदियों का जल यहां के योग और साधना के वातावरण को समृद्ध करता है। डाॅ. साध्वी भगवती सरस्वती जी ने सभी विशिष्ट अतिथियों और संपूर्ण योगी परिवार का परमार्थ परिवार की ओर से अभिनंदन किया।
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योग मात्र एक शारीरिक क्रिया नहीं, बल्कि हमारी प्राचीन गौरवशाली विधा
सीएम धामी ने कहा कि योग मात्र एक शारीरिक क्रिया नहीं, बल्कि हमारी प्राचीन गौरवशाली विधा और एक ऐसा सार्वभौमिक विज्ञान है, जो मनुष्य के मन, शरीर और आत्मा के बीच उत्कृष्ट संतुलन स्थापित करता है। एक नेचुरल वैल्यू सिस्टम के रूप में यह हमारे जीवन में मानसिक शांति का संचार करता है और आधुनिक समय की चुनौतियों के बीच मन एवं शरीर को पूर्णतः तनाव मुक्त रखने का सशक्त माध्यम है। सीएम ने कहा कि योग के माध्यम से न केवल एकाग्रता बढ़ती है, बल्कि व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। यह एक ऐसी शक्ति है जो जाति, भाषा, धर्म और भूगोल की तमाम सीमाओं को लांघकर संपूर्ण विश्व को एक सूत्र में पिरोती है।
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इस दौरान उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पावन धरती केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि योग, अध्यात्म और आयुष की भी महान संगम स्थली है। कहा कि सरकार के निरंतर प्रयासों से उत्तराखंड को योग की वैश्विक राजधानी के रूप में सुदृढ़ता से स्थापित किया जा रहा है, ताकि विश्व भर से शांति और स्वास्थ्य की खोज में आने वाले साधकों को यहां एक श्रेष्ठ वातावरण उपलब्ध हो सके।
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सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं है, बल्कि यह योग और ध्यान की जन्मभूमि भी है, जहां से जीवन की ऊर्जा और आध्यात्मिक चेतना का प्रवाह संपूर्ण विश्व में फैल रहा है। कहा कि योग नीति सबसे पहले उत्तराखंड में लागू हुई है। सरकार पांच नए योगधाम स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार आयुष वेलनेस सेंटर्स व योग वेलनेस सेंटर्स स्थापित करने की योजना बना रही है। इस राज्य में पोर्टल के माध्यम से आयुष परामर्श भी दिया जा रहा है। हमारी सरकार योग व आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अनेक कार्ययोजना बना रही है।
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि देवभूमि की पावन धरा ने योग की अनंत परंपराओं, विधाओं और आध्यात्मिक ऊर्जा को जन्म दिया है। हर घाट, हर पर्वत और हर नदियों का जल यहां के योग और साधना के वातावरण को समृद्ध करता है। डाॅ. साध्वी भगवती सरस्वती जी ने सभी विशिष्ट अतिथियों और संपूर्ण योगी परिवार का परमार्थ परिवार की ओर से अभिनंदन किया।
योग मात्र एक शारीरिक क्रिया नहीं, बल्कि हमारी प्राचीन गौरवशाली विधा
सीएम धामी ने कहा कि योग मात्र एक शारीरिक क्रिया नहीं, बल्कि हमारी प्राचीन गौरवशाली विधा और एक ऐसा सार्वभौमिक विज्ञान है, जो मनुष्य के मन, शरीर और आत्मा के बीच उत्कृष्ट संतुलन स्थापित करता है। एक नेचुरल वैल्यू सिस्टम के रूप में यह हमारे जीवन में मानसिक शांति का संचार करता है और आधुनिक समय की चुनौतियों के बीच मन एवं शरीर को पूर्णतः तनाव मुक्त रखने का सशक्त माध्यम है। सीएम ने कहा कि योग के माध्यम से न केवल एकाग्रता बढ़ती है, बल्कि व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। यह एक ऐसी शक्ति है जो जाति, भाषा, धर्म और भूगोल की तमाम सीमाओं को लांघकर संपूर्ण विश्व को एक सूत्र में पिरोती है।