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Roorkee News: बारिश और नमी से आम की फसल पर मंडराया झुलसा रोग का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की
Updated Mon, 23 Mar 2026 06:47 PM IST
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- बारिश और आसमान में बादलों का डेरा बढ़ा रहा बागबानों की चिंता
लक्सर। आम के पेड़ों पर अच्छा बौर आने से काश्तकार उत्साहित हैं लेकिन मौसम का मिजाज उन्हें चिंतित कर रहा है। बारिश और तेज हवाओं से बौर गिरने के साथ नमी से मंजरी झुलसा रोग की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में मार्च के महीने में आसमान में बादलों का डेरा, बारिश और वातावरण में नमी से किसानों की चिंता बढ़ी हुई है।
लक्सर, सुल्तानपुर, रायसी क्षेत्र में आम के कई बाग हैं। यहां बड़े पैमाने पर आम का उत्पादन होता है। इस बार आम के पेड़ों पर अच्छी बौर आई है। मौसम अनुकूल रहने से इस बार आम की पैदावार में बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि मौजूदा मौसम से काश्तकारों की चिंता बढ़ा रही है। मार्च के महीने में पेड़ों पर बौर आने के साथ टिकोले बनने की प्रक्रिया शुरू होती है। इन दिनों आम की फसल संवेदनशील अवस्था में रहती है। ऐसे में बारिश और ओलावृष्टि से बौर झुलसने के साथ परागण की प्रक्रिया भी बाधित हो सकती है। कृषि विज्ञान केंद्र धनौरी के प्रभारी डॉ. पुरुषोत्तम शर्मा के अनुसार बारिश और वातावरण में अधिक नमी रहने से झुलसा रोग तेजी से फैल सकता है। इसमें बौर सूखकर काला पड़ने लगता है। इन परिस्थितियों में खर्रा रोग का भी खतरा बना रहता है। इसमें बौर पर सफेद पाउडर जैसा पदार्थ जमने लगता है और बौर झड़ना शुरू हो जाता है। इन परिस्थितियों में बचाव के लिए कीटनाशक और फफूंदनाशक के प्रयोग के साथ धूप और हवा के बेहतर आवागमन के लिए फालतू अथवा सूखी टहनियों को हटाने, बाग की साफ सफाई और संतुलित खाद का इस्तेमाल करना चाहिए।
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लक्सर। आम के पेड़ों पर अच्छा बौर आने से काश्तकार उत्साहित हैं लेकिन मौसम का मिजाज उन्हें चिंतित कर रहा है। बारिश और तेज हवाओं से बौर गिरने के साथ नमी से मंजरी झुलसा रोग की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में मार्च के महीने में आसमान में बादलों का डेरा, बारिश और वातावरण में नमी से किसानों की चिंता बढ़ी हुई है।
लक्सर, सुल्तानपुर, रायसी क्षेत्र में आम के कई बाग हैं। यहां बड़े पैमाने पर आम का उत्पादन होता है। इस बार आम के पेड़ों पर अच्छी बौर आई है। मौसम अनुकूल रहने से इस बार आम की पैदावार में बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि मौजूदा मौसम से काश्तकारों की चिंता बढ़ा रही है। मार्च के महीने में पेड़ों पर बौर आने के साथ टिकोले बनने की प्रक्रिया शुरू होती है। इन दिनों आम की फसल संवेदनशील अवस्था में रहती है। ऐसे में बारिश और ओलावृष्टि से बौर झुलसने के साथ परागण की प्रक्रिया भी बाधित हो सकती है। कृषि विज्ञान केंद्र धनौरी के प्रभारी डॉ. पुरुषोत्तम शर्मा के अनुसार बारिश और वातावरण में अधिक नमी रहने से झुलसा रोग तेजी से फैल सकता है। इसमें बौर सूखकर काला पड़ने लगता है। इन परिस्थितियों में खर्रा रोग का भी खतरा बना रहता है। इसमें बौर पर सफेद पाउडर जैसा पदार्थ जमने लगता है और बौर झड़ना शुरू हो जाता है। इन परिस्थितियों में बचाव के लिए कीटनाशक और फफूंदनाशक के प्रयोग के साथ धूप और हवा के बेहतर आवागमन के लिए फालतू अथवा सूखी टहनियों को हटाने, बाग की साफ सफाई और संतुलित खाद का इस्तेमाल करना चाहिए।
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