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Roorkee News: बैसाखी स्नान से पहले रोडवेज की आमदनी को नहीं मिली रफ्तार, तीन लाख की गिरावट
संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की
Updated Sun, 12 Apr 2026 06:44 PM IST
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बैसाखी स्नान से पहले रोडवेज की आमदनी को नहीं मिली रफ्तार, तीन लाख की गिरावट
चालक-परिचालक बोले निजी वाहनों से आने लगे हैं अब अधिकांश श्रद्धालु
लगातार सवारी और इनकम घटने से मायूस होने लगे रुड़की डिपो कर्मचारी
रुड़की। बैसाखी स्नान पर्व से पहले के दौरान इस साल स्थानीय डिपो को उम्मीद के मुताबिक आमदनी नहीं मिल पा रही है। हर साल जहां इस समय पर बसों में भारी भीड़ देखने को मिलती थी वहीं इस बार यात्रियों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही। इसका सीधा असर डिपो की आय पर पड़ा है। अनुमानित तौर पर डिपो को इस कारण तीन लाख रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है।
रोडवेज बसों के चालकों और परिचालकों का कहना है कि अब अधिकांश श्रद्धालु निजी वाहनों का उपयोग करने लगे हैं। पहले जहां लोग समूह में बसों से यात्रा करते थे अब वे अपनी सुविधा के अनुसार कार, बाइक या अन्य निजी साधनों से सफर करना पसंद कर रहे हैं। सोलानी पुल और ढंडेरा मार्ग से हरिद्वार का रूट बंद होने के कारण भी संचालन प्रभावित है। एक चालक ने बताया कि पहले बैसाखी पर बसों में खड़े होने तक की जगह नहीं मिलती थी लेकिन इस बार कई फेरे आधे खाली ही चले। वहीं, एक परिचालक ने कहा कि लगातार सवारी घट रही है जिससे डिपो की आय पर भी असर पड़ रहा है और मनोबल गिर रहा है। निजी वाहनों की बढ़ती संख्या और बेहतर सुविधा के कारण लोग रोडवेज की ओर कम आकर्षित हो रहे हैं। इसके अलावा कुछ यात्रियों ने बसों की समयबद्धता और सुविधाओं पर भी असंतोष जताया है जिससे वे निजी साधनों की ओर रुख कर रहे हैं। मंडलीय प्रबंधक (संचालन) सुरेश चौहान ने कहा कि निगम इस गिरावट का विश्लेषण कर रहा है। बसों की संख्या, समय-सारणी और सेवा गुणवत्ता में सुधार के प्रयास भी किए जाएंगे।
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पिछले साल बैसाखी पर नौ लाख थी आमदनी
नाम न छापने की शर्त पर एक कर्मचारी ने बताया कि पिछले साल बैसाखी स्नान के समय पर आमदनी करीब नौ लाख पहुंच गई थी। हालांकि अब 4:30 बजे तक आमदनी का अनुमान 3.50 लाख ही लगाया गया।
आमदनी पर एक नजर
10-6,48,940
11-7,49,121
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चालक-परिचालक बोले निजी वाहनों से आने लगे हैं अब अधिकांश श्रद्धालु
लगातार सवारी और इनकम घटने से मायूस होने लगे रुड़की डिपो कर्मचारी
रुड़की। बैसाखी स्नान पर्व से पहले के दौरान इस साल स्थानीय डिपो को उम्मीद के मुताबिक आमदनी नहीं मिल पा रही है। हर साल जहां इस समय पर बसों में भारी भीड़ देखने को मिलती थी वहीं इस बार यात्रियों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही। इसका सीधा असर डिपो की आय पर पड़ा है। अनुमानित तौर पर डिपो को इस कारण तीन लाख रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है।
रोडवेज बसों के चालकों और परिचालकों का कहना है कि अब अधिकांश श्रद्धालु निजी वाहनों का उपयोग करने लगे हैं। पहले जहां लोग समूह में बसों से यात्रा करते थे अब वे अपनी सुविधा के अनुसार कार, बाइक या अन्य निजी साधनों से सफर करना पसंद कर रहे हैं। सोलानी पुल और ढंडेरा मार्ग से हरिद्वार का रूट बंद होने के कारण भी संचालन प्रभावित है। एक चालक ने बताया कि पहले बैसाखी पर बसों में खड़े होने तक की जगह नहीं मिलती थी लेकिन इस बार कई फेरे आधे खाली ही चले। वहीं, एक परिचालक ने कहा कि लगातार सवारी घट रही है जिससे डिपो की आय पर भी असर पड़ रहा है और मनोबल गिर रहा है। निजी वाहनों की बढ़ती संख्या और बेहतर सुविधा के कारण लोग रोडवेज की ओर कम आकर्षित हो रहे हैं। इसके अलावा कुछ यात्रियों ने बसों की समयबद्धता और सुविधाओं पर भी असंतोष जताया है जिससे वे निजी साधनों की ओर रुख कर रहे हैं। मंडलीय प्रबंधक (संचालन) सुरेश चौहान ने कहा कि निगम इस गिरावट का विश्लेषण कर रहा है। बसों की संख्या, समय-सारणी और सेवा गुणवत्ता में सुधार के प्रयास भी किए जाएंगे।
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पिछले साल बैसाखी पर नौ लाख थी आमदनी
नाम न छापने की शर्त पर एक कर्मचारी ने बताया कि पिछले साल बैसाखी स्नान के समय पर आमदनी करीब नौ लाख पहुंच गई थी। हालांकि अब 4:30 बजे तक आमदनी का अनुमान 3.50 लाख ही लगाया गया।
आमदनी पर एक नजर
10-6,48,940
11-7,49,121