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काशीपुर: कैंसर ने छीना पति...कागजात ने रोकी बच्चों की पढ़ाई, चार बच्चों की विधवा मां का दर्द

Sat, 01 Aug 2026 12:18 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, काशीपुर
अमर उजाला नेटवर्क, काशीपुर Published by: Heera Updated Sat, 01 Aug 2026 12:18 PM IST
सार

काशीपुर में पति की कैंसर से मौत के बाद मजदूरी कर चार बच्चों का पालन-पोषण कर रही विधवा सलमा को दस्तावेज न होने के कारण बच्चों का स्कूल में दाखिला नहीं मिल पा रहा है। सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाने के दावे के बावजूद वह प्रवेश के लिए भटक रही है।

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A woman is making rounds of schools due to lack of documents in kashipur
सांकेतिक तस्वीर।

विस्तार

 

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बच्चों को पढ़ा-लिखाकर बेहतर भविष्य देने का सपना दस्तावेजी औपचारिकताओं के कारण अधूरा रह गया है। चार बच्चों की मां स्कूल में दाखिले के लिए कई दिनों से चक्कर काट रही है लेकिन आधार कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र समेत अन्य दस्तावेज उपलब्ध न होने के कारण बच्चों का प्रवेश नहीं हो पा रहा है। एक ओर सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर दस्तावेजों के अभाव में जरूरतमंद बच्चों को प्रवेश के लिए भटकना पड़ रहा है।

ग्राम दारापुर, सूरजनगर, ठाकुरद्वारा निवासी सुलेमान पत्नी सलमा और बच्चों के साथ काशीपुर के महेशपुरा में किराये पर रहते थे। मजदूरी कर वह परिवार का भरण-पोषण करते थे। इसी दौरान कैंसर से उनकी मौत हो गई। पति की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी सलमा के कंधों पर आ गई। वह लोगों के घरों में काम कर परिवार का गुजारा कर रही हैं।

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मकान मालिक शरीफ ने सलमा को बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद वह बच्चों के दाखिले के लिए राजकीय प्राथमिक विद्यालय महेशपुरा और राजकीय प्राथमिक विद्यालय सुदामालाल पहुंचीं लेकिन बच्चों के दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा। अब बच्चों के दस्तावेज बनवाने के लिए वह नगर निगम और अन्य सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रही हैं। उन्होंने प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों से बच्चों का स्कूल में दाखिला कराने की गुहार लगाई है।

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आग में जल गए थे बच्चों के दस्तावेज
सलमा ने बताया कि उनके पति परिवार में इकलौते कमाने वाले थे। गांव में झोपड़ी बनाकर परिवार के साथ रहते थे। एक दिन वह गेहूं काटने के लिए जंगल गए थे। इसी दौरान झोपड़ी में आग लग गई जिससे घर में रखे सभी दस्तावेज और सामान जलकर राख हो गए। इसके बाद परिवार रोजगार की तलाश में काशीपुर आ गया।

उन्होंने बताया कि पति के कैंसर के इलाज में घर की जमीन भी बिक गई लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। करीब दो साल पहले पति की मृत्यु हो गई। बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र और आधार कार्ड नहीं बन सके। उनके चार बच्चों अरमान (10), सद्दाम (9), गोलू (8) और हुसैन (7) ने अभी तक स्कूल में पढ़ाई शुरू नहीं की है।

 

महिला के बच्चों का स्कूल में प्रवेश नहीं हो पाने की जानकारी नहीं है। इन बच्चों का राजकीय प्राथमिक विद्यालय में प्रवेश कराने के लिए प्रयास किया जाएगा। - धीरेंद्र कुमार साहू, बीईओ, काशीपुर

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