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Udham Singh Nagar News: पुरानी कार के दस्तावेज और पंजीकरण में फर्जीवाड़े की आशंका
Thu, 13 Aug 2026 01:13 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Thu, 13 Aug 2026 01:13 AM IST
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रुद्रपुर। एक ही रजिस्ट्रेशन और चेसिस नंबर पर दो कारों के पंजीकरण के मामले में अब परिवहन विभाग तीसरे व्यक्ति की भूमिका की भी जांच कर रहा है। मामला सामने आने के बाद दोनों वाहनों की जांच की गई। प्रथम दृष्टया नई कार को सही माना जा रहा है जबकि दूसरी कार के दस्तावेज और पंजीकरण में फर्जीवाड़े की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल संबंधित वाहन को विभाग के नियंत्रण में रखा गया है।
हरिद्वार निवासी सहदेव कुमार पाल ने अपनी स्विफ्ट डिजायर कार के बीमा नवीनीकरण के दौरान इसी नंबर पर दूसरी कार का बीमा होने की जानकारी मिलने के बाद एआरटीओ कार्यालय में शिकायत की थी। जांच में पता चला कि यूके 06 एएन 0807 नंबर की दूसरी कार कालाढूंगी निवासी नीरज कुमार के नाम पर दर्ज है। दोनों वाहनों को कार्यालय बुलाकर जांच की गई तो उनके रजिस्ट्रेशन और चेसिस नंबर समान पाए गए। अब एआरटीओ कार्यालय तीनों पक्षों से पूछताछ और दस्तावेज की जांच कर रहा है। खासतौर पर उस व्यक्ति की भूमिका खंगाली जा रही है जिसके माध्यम से दूसरी कार की बिक्री हुई थी। नीरज कुमार के अनुसार उन्होंने कार केलाखेड़ा के एक डीलर से खरीदी थी। ऐसे में जांच इस बिंदु पर भी केंद्रित है कि वाहन किससे खरीदा गया और किसने उसे वैध बताकर आगे बेचा।
एआरटीओ, मोहित कोठारी ने बताया कि जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि फर्जीवाड़ा किस स्तर पर हुआ और असली गुनहगार कौन है। विभाग यह भी पता लगा रहा है कि फर्जी दस्तावेज के आधार पर वाहन स्वामी को कार बेचने में किसकी भूमिका रही।
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हरिद्वार निवासी सहदेव कुमार पाल ने अपनी स्विफ्ट डिजायर कार के बीमा नवीनीकरण के दौरान इसी नंबर पर दूसरी कार का बीमा होने की जानकारी मिलने के बाद एआरटीओ कार्यालय में शिकायत की थी। जांच में पता चला कि यूके 06 एएन 0807 नंबर की दूसरी कार कालाढूंगी निवासी नीरज कुमार के नाम पर दर्ज है। दोनों वाहनों को कार्यालय बुलाकर जांच की गई तो उनके रजिस्ट्रेशन और चेसिस नंबर समान पाए गए। अब एआरटीओ कार्यालय तीनों पक्षों से पूछताछ और दस्तावेज की जांच कर रहा है। खासतौर पर उस व्यक्ति की भूमिका खंगाली जा रही है जिसके माध्यम से दूसरी कार की बिक्री हुई थी। नीरज कुमार के अनुसार उन्होंने कार केलाखेड़ा के एक डीलर से खरीदी थी। ऐसे में जांच इस बिंदु पर भी केंद्रित है कि वाहन किससे खरीदा गया और किसने उसे वैध बताकर आगे बेचा।
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एआरटीओ, मोहित कोठारी ने बताया कि जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि फर्जीवाड़ा किस स्तर पर हुआ और असली गुनहगार कौन है। विभाग यह भी पता लगा रहा है कि फर्जी दस्तावेज के आधार पर वाहन स्वामी को कार बेचने में किसकी भूमिका रही।
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