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Uttarkashi News: कुदरत की मार के बाद अब लंगूरों की दहशत
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Sat, 28 Feb 2026 05:42 PM IST
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हर्षिल के सेब बागवानों को दोहरी मार, लंगूर कर रहे हैं सेब के बगान तबाह
उत्तरकाशी। हर्षिल घाटी में लंगूरों की दहशत बनी है। लंगूरों ने सेब के पेड़ों को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है। इससे काश्तकारों को दोगुना नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि पहले मौसम की बेरुखी के कारण उत्पादन के नुकसान का डर सता रहा है वहीं अब बढ़ती लंगूरों की संख्या ने सेब बागवानों को चिंता में डाल दिया है।
स्थानीय निवासी खुशहाल सिंह नेगी, मनोज नेगी, दीपक राणा का कहना है कि इन दिनों लंगूरों की ओर से सेब के सभी पेड़ क्षतिग्रस्त किए जा रहे हैं। उनकी ओर से पूरे पेड़ की खाल निकालकर उसे बरबाद किया जा रहा है। साथ ही फलों का उत्पादन करने वाली टहनियों को छोटे-छाेटे आकार में तोड़कर उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है।
इस वर्ष उम्मीद अनुसार बारिश और बर्फबारी नहीं हुई है। साथ ही समय से पहले तापमान बढ़ने के कारण सेब के उत्पादन को अधिक नुकसान हो सकता है। स्थिति यह हो गई है कि गत वर्ष आपदा के कारण सेब का नुकसान उठाना पड़ा। वहीं अब मौसम और उसके बाद लंगूरों की बढ़ती संख्या ने काश्तकारों को चिंतित कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार इस संबंध में वन विभाग और प्रशासन को सूचित किया गया कि लंगूरों को रोकने के लिए उचित योजना बनाई जाए लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। अगर जल्द ही लंगूरों को रोकने के लिए ठोस योजना नहीं बनाई जाती है तो आंदोलन के लिए भी बाध्य होना पड़ेगा।
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उत्तरकाशी। हर्षिल घाटी में लंगूरों की दहशत बनी है। लंगूरों ने सेब के पेड़ों को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है। इससे काश्तकारों को दोगुना नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि पहले मौसम की बेरुखी के कारण उत्पादन के नुकसान का डर सता रहा है वहीं अब बढ़ती लंगूरों की संख्या ने सेब बागवानों को चिंता में डाल दिया है।
स्थानीय निवासी खुशहाल सिंह नेगी, मनोज नेगी, दीपक राणा का कहना है कि इन दिनों लंगूरों की ओर से सेब के सभी पेड़ क्षतिग्रस्त किए जा रहे हैं। उनकी ओर से पूरे पेड़ की खाल निकालकर उसे बरबाद किया जा रहा है। साथ ही फलों का उत्पादन करने वाली टहनियों को छोटे-छाेटे आकार में तोड़कर उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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इस वर्ष उम्मीद अनुसार बारिश और बर्फबारी नहीं हुई है। साथ ही समय से पहले तापमान बढ़ने के कारण सेब के उत्पादन को अधिक नुकसान हो सकता है। स्थिति यह हो गई है कि गत वर्ष आपदा के कारण सेब का नुकसान उठाना पड़ा। वहीं अब मौसम और उसके बाद लंगूरों की बढ़ती संख्या ने काश्तकारों को चिंतित कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार इस संबंध में वन विभाग और प्रशासन को सूचित किया गया कि लंगूरों को रोकने के लिए उचित योजना बनाई जाए लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। अगर जल्द ही लंगूरों को रोकने के लिए ठोस योजना नहीं बनाई जाती है तो आंदोलन के लिए भी बाध्य होना पड़ेगा।