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Uttarkashi News: नदी में बिछाई टाइल, रास्ते के नाम पर डूबे लाखों रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Thu, 19 Mar 2026 05:35 PM IST
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ग्रामीणों ने लगाया भष्ट्राचार का आरोप, पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग
पुरोला। घुंडाड़ा गांव में स्पेशल कंपोनेंट प्लान के तहत मरघट के सार्वजनिक रास्ते के निर्माण में अनियमितताओं का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में भष्ट्राचार का आरोप लगाते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
तहसील मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित घुंडाड़ा गांव में लघु सिंचाई विभाग की ओर से लगभग 26 लाख की लागत से गांव से कमल नदी घाट तक दीवार व इंटरलॉकिंग मार्ग का निर्माण कराया जाना था लेकिन ठेकेदार ने मानकों की अनदेखी करते हुए कार्य को गलत स्थान पर कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि घुंडाड़ा गांव के नीचे कमल नदी पुल के पास, जहां बरसात के समय नदी का जलस्तर बढ़ने पर पूरा क्षेत्र डूब जाता है।
वहीं, पहले से भरे गए कॉलम के ऊपर बिना दीवार व खंडजा तैयार किए सीधे इंटरलॉकिंग टाइल बिछा दी गई। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना तकनीकी निरीक्षण और मानकों के निर्माण कार्य कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मामले की जल्द जांच नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। वहीं, कार्यदायी संस्था लघु सिंचाई विभाग के अवर अभियंता विपिन कुमार ने बताया कि ठेकेदार को करीब 120 मीटर मार्ग निर्माण के लिए लगभग दो लाख रुपये का भुगतान किया गया है। उन्होंने कहा कि नदी क्षेत्र में किए जा रहे कार्य को तत्काल रोकने के निर्देश दे दिए गए हैं। साथ ही आगे कोई भुगतान नहीं किया जाएगा।
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पुरोला। घुंडाड़ा गांव में स्पेशल कंपोनेंट प्लान के तहत मरघट के सार्वजनिक रास्ते के निर्माण में अनियमितताओं का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में भष्ट्राचार का आरोप लगाते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
तहसील मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित घुंडाड़ा गांव में लघु सिंचाई विभाग की ओर से लगभग 26 लाख की लागत से गांव से कमल नदी घाट तक दीवार व इंटरलॉकिंग मार्ग का निर्माण कराया जाना था लेकिन ठेकेदार ने मानकों की अनदेखी करते हुए कार्य को गलत स्थान पर कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि घुंडाड़ा गांव के नीचे कमल नदी पुल के पास, जहां बरसात के समय नदी का जलस्तर बढ़ने पर पूरा क्षेत्र डूब जाता है।
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वहीं, पहले से भरे गए कॉलम के ऊपर बिना दीवार व खंडजा तैयार किए सीधे इंटरलॉकिंग टाइल बिछा दी गई। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना तकनीकी निरीक्षण और मानकों के निर्माण कार्य कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मामले की जल्द जांच नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। वहीं, कार्यदायी संस्था लघु सिंचाई विभाग के अवर अभियंता विपिन कुमार ने बताया कि ठेकेदार को करीब 120 मीटर मार्ग निर्माण के लिए लगभग दो लाख रुपये का भुगतान किया गया है। उन्होंने कहा कि नदी क्षेत्र में किए जा रहे कार्य को तत्काल रोकने के निर्देश दे दिए गए हैं। साथ ही आगे कोई भुगतान नहीं किया जाएगा।