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Uttarkashi News: मालगाड का पुल बहने से 18 गांवों की आवाजाही ठप
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Wed, 25 Mar 2026 05:33 PM IST
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चार वर्ष पूर्व आपदा में बह गया था पुल, लोग परेशान
पुरोला। नगर पालिका क्षेत्र सहित कमल सिरांई क्षेत्र के जैसाण थोक के सात गांवों समेत करीब 18 गांवों की आवाजाही के लिए मालगाड पर बना आरसीसी पुल चार वर्ष पूर्व आपदा में बह गया था जिसके बाद से क्षेत्रीय लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने इस संबंध में डीएम को ज्ञापन सौंपकर जल्द ही आरसीसी पुलिया निर्माण करने की मांग की।
वर्ष 2021-23 में बहा यह पुल नगर पालिका, रामा-कमल सिरांई क्षेत्र और जैसाण थोक के सात गांवों के लिए जीवनरेखा के रूप में कार्य करता था। यह पुल खलाड़ी, शरमाली, आराकोट, पुजेली, चपटाड़ी, नेत्री, सल्ला और चालनी गांवों के ग्रामीणों की रोजमर्रा की आवाजाही का मुख्य साधन था। साथ ही दर्जनों गांवों के लिए श्मशान घाट तक पहुंचने का यही प्रमुख मार्ग भी है।
पुल बहने के बाद खासकर बरसात में माल गाड के उफान के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही शवयात्रा को श्मशान घाट तक पहुंचाने के लिए अब लोगों को लगभग दो किलोमीटर लंबा वैकल्पिक रास्ता तय करना पड़ता है जिससे समय और श्रम दोनों की कठिनाई बढ़ गई है। कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को लिखित व मौखिक रूप से पुलिया निर्माण की मांग रखी लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इस मौके पर बलदेव रावत, स्यालिक राम नौटियाल, हकूमत रावत, अमीन सिंह, जगमोहन सिंह, धीरपाल रावत, फकीर चंद, स्यालिकराम नौटियाल, मनोज रतूड़ी, सरदार सिंह रावत आदि मौजूद रहे।
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पुरोला। नगर पालिका क्षेत्र सहित कमल सिरांई क्षेत्र के जैसाण थोक के सात गांवों समेत करीब 18 गांवों की आवाजाही के लिए मालगाड पर बना आरसीसी पुल चार वर्ष पूर्व आपदा में बह गया था जिसके बाद से क्षेत्रीय लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने इस संबंध में डीएम को ज्ञापन सौंपकर जल्द ही आरसीसी पुलिया निर्माण करने की मांग की।
वर्ष 2021-23 में बहा यह पुल नगर पालिका, रामा-कमल सिरांई क्षेत्र और जैसाण थोक के सात गांवों के लिए जीवनरेखा के रूप में कार्य करता था। यह पुल खलाड़ी, शरमाली, आराकोट, पुजेली, चपटाड़ी, नेत्री, सल्ला और चालनी गांवों के ग्रामीणों की रोजमर्रा की आवाजाही का मुख्य साधन था। साथ ही दर्जनों गांवों के लिए श्मशान घाट तक पहुंचने का यही प्रमुख मार्ग भी है।
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पुल बहने के बाद खासकर बरसात में माल गाड के उफान के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही शवयात्रा को श्मशान घाट तक पहुंचाने के लिए अब लोगों को लगभग दो किलोमीटर लंबा वैकल्पिक रास्ता तय करना पड़ता है जिससे समय और श्रम दोनों की कठिनाई बढ़ गई है। कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को लिखित व मौखिक रूप से पुलिया निर्माण की मांग रखी लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इस मौके पर बलदेव रावत, स्यालिक राम नौटियाल, हकूमत रावत, अमीन सिंह, जगमोहन सिंह, धीरपाल रावत, फकीर चंद, स्यालिकराम नौटियाल, मनोज रतूड़ी, सरदार सिंह रावत आदि मौजूद रहे।