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Chhattisgarh: बालोद में नदी को पुनर्जीवित करने के लिए जन आंदोलन, मिलकर बदली तांदुला की तस्वीर
बालोद ब्यूरो
Updated Wed, 31 Dec 2025 05:41 PM IST
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बालोद जिले की जीवनदायिनी तांदुला नदी, जो न केवल स्थानीय बल्कि दुर्ग, भिलाई और बेमेतरा जैसे महत्वपूर्ण शहरों की जल आवश्यकताओं को भी पूरा करती है, अब एक नए और स्वच्छ स्वरूप में लौट रही है। वर्षों की उपेक्षा, गंदगी और जलकुंभी से त्रस्त इस नदी को 'नीर चेतना अभियान' के तहत एक जन आंदोलन का रूप देकर पुनर्जीवित किया गया है। इस अभियान में प्रशासन और जनता ने मिलकर सराहनीय प्रयास किए हैं, जिससे नदी की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है।
कभी अपनी कलकल धारा के लिए पहचानी जाने वाली तांदुला नदी की हालत जलकुंभी, प्लास्टिक कचरा और अन्य गंदगी के कारण दयनीय हो गई थी। इस समस्या के समाधान हेतु एक वृहद सफाई अभियान चलाया गया, जिसमें बड़ी मात्रा में ठोस कचरा और प्लास्टिक को नदी से बाहर निकाला गया। इस सफाई अभियान ने नदी के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। पहले चरण में प्रशासन ने युद्धस्तर पर सफाई का कार्य संपन्न कराया, जिसके बाद अब आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से इसे निरंतर एक जन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।
जनप्रतिनिधियों ने इस पहल का पुरजोर समर्थन किया है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के उपाध्यक्ष यज्ञ दत्त शर्मा ने इसे नदियों को बचाने की दिशा में एक अत्यंत सकारात्मक कदम बताया। भाजपा जिलाध्यक्ष चेमन देशमुख ने तांदुला नदी को कई जिलों की जीवनरेखा बताते हुए कहा कि यह साफ-सुथरी नदी भविष्य के लिए एक अमूल्य धरोहर साबित होगी। जनपद उपाध्यक्ष दुर्गानंद साहू ने इस जन आंदोलन को जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि करार दिया, जिसके सकारात्मक परिणाम दशकों तक दिखाई देंगे।
कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा और पुलिस अधीक्षक योगेश पटेल स्वयं नदी में उतरकर सफाई कार्य में न केवल शामिल हुए, बल्कि प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारियों और पुलिस जवानों के साथ श्रमदान करते हुए आम जनता को पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित किया। कलेक्टर मिश्रा ने कहा कि नदी को उसके वास्तविक रूप में लौटाना प्रशासन की प्राथमिकता है और अब इसे नियमित जनभागीदारी के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। एसपी योगेश पटेल ने नदी की वर्तमान स्थिति में आए सुधार को सोच में आए बदलाव का प्रतीक बताया और निरंतरता बनाए रखने पर जोर दिया।
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