गंगरेल बांध के निर्माण के लिए अपनी जमीन और मकान गंवाने वाले 52 गांवों के प्रभावित परिवार आज भी व्यवस्थापन की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। हाईकोर्ट के निर्देश के छह साल बाद भी व्यवस्थापन नहीं होने का आरोप लगाते हुए डुबान प्रभावित गंगरेल जलाशय में जल सत्याग्रह शुरू किया है। आंदोलन के तीसरे दिन नौ लोगों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसके बावजूद प्रभावितों का आरोप है कि शासन-प्रशासन की ओर से उनकी सुध लेने कोई नहीं पहुंचा।
डुबान संघर्ष समिति के कार्यकारी अध्यक्ष हरिशंकर मरकाम के मुताबिक गंगरेल बांध के निर्माण के दौरान 52 गांवों के लोगों की खेती की जमीन और मकान डूब क्षेत्र में आ गए थे। प्रभावित परिवार लंबे समय से व्यवस्थापन की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि हाईकोर्ट ने छह साल पहले उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए जिला प्रशासन और राज्य सरकार को व्यवस्थापन के निर्देश दिए थे लेकिन अब तक इस पर अमल नहीं हुआ है।
हरिशंकर मरकाम ने आरोप लगाया कि प्रभावित परिवार पिछले छह साल से व्यवस्थापन के लिए प्रशासन के दरवाजे खटखटा रहे हैं लेकिन उनकी मांग पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि लंबे इंतजार और लगातार अनदेखी से प्रभावित परिवार परेशान हैं और खुद को प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं। इसी वजह से उन्हें मजबूरी में जल सत्याग्रह का रास्ता अपनाना पड़ा है।
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गंगरेल जलाशय में प्रभावितों का जल सत्याग्रह लगातार तीसरे दिन भी जारी है। पानी में खड़े रहने के दौरान नौ लोगों की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि उनकी स्थिति गंभीर होने के बावजूद अब तक शासन-प्रशासन का कोई प्रतिनिधि उनसे मिलने नहीं पहुंचा है।
इस मामले में जिला कलेक्टर ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। अब देखना होगा कि लंबे समय से व्यवस्थापन की मांग कर रहे डुबान प्रभावितों के आंदोलन पर प्रशासन क्या कदम उठाता है और उनकी मांगों के समाधान के लिए क्या पहल की जाती है।