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Police arrested three accused for duping people in name of providing them Ranger jobs in Forest Department
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Durg: वन विभाग में रेंजर की नौकरी लगाने के नाम पर आठ लाख रुपये की ठगी, पुलिस ने 3 आरोपियों को किया गिरफ्तार
अमर उजाला नेटवर्क, दुर्ग-भिलाई Published by: दुर्ग-भिलाई ब्यूरो Updated Tue, 11 Aug 2026 08:23 PM IST
दुर्ग जिले में नौकरी लगाने के नाम पर ठगी मामला सामने आया है। वन विभाग में रेंजर के पद पर नौकरी दिलाने का सपना दिखाकर आठ लाख रुपये की ठगी किया गया। मामले में भिलाई भट्ठी पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने मंत्रालय से जारी होने का दावा करते हुए फर्जी नियुक्ति पत्र भी तैयार कर पीड़ित को दिया था। करीब तीन साल बाद शिकायत सामने आने पर पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने प्रार्थी को भरोसा दिलाया था कि वे उसके बेटे की वन विभाग में रेंजर के पद पर नौकरी लगवा सकते हैं। नौकरी दिलाने के नाम पर अलग-अलग समय में उससे कुल 8 लाख रुपये लिए गए। रकम लेने के बाद आरोपियों ने मंत्रालय की सील और हस्ताक्षर वाला नियुक्ति पत्र भी सौंप दिया, जिससे प्रार्थी को कुछ समय तक ठगी का अंदाजा नहीं हुआ।
मामले का खुलासा तब हुआ, जब प्रार्थी अपने बेटे के साथ नियुक्ति पत्र की वास्तविकता जानने मंत्रालय पहुंचा। वहां उसे बताया गया कि उसके पास मौजूद नियुक्ति पत्र फर्जी है। इसके बाद प्रार्थी ने आरोपियों से अपनी रकम वापस मांगी, लेकिन वे लगातार टालमटोल करते रहे। काफी समय बीतने के बाद भी पैसे वापस नहीं मिलने पर प्रार्थी ने पुलिस से शिकायत की। शिकायत के आधार पर भिलाई भट्ठी पुलिस ने धोखाधड़ी का अपराध दर्ज कर मामले की जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने मामले में शामिल तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान भारतेन्दु मेश्राम, निवासी एकता नगर, ठेलका बोर्ड, जिला कांकेर, हनी श्रेष्ठ, निवासी कृष्णा ग्रैंड सिटी, कोहका, भिलाई और भोजेन्द्र कुमार, निवासी ग्राम टिकरी, अर्जुन्दा, जिला बालोद के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से फर्जी नियुक्ति पत्र सहित मामले से संबंधित दस्तावेज और अन्य सामान बरामद किया है। तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर दिया गया है।
तीन साल बाद पुलिस तक पहुंचा मामला
बताया जा रहा है कि नौकरी के नाम पर रकम लेने की घटना करीब तीन साल पहले की है। नियुक्ति पत्र फर्जी निकलने के बाद पीड़ित ने कई बार आरोपियों से रकम लौटाने की मांग की, लेकिन लगातार आश्वासन मिलने के बावजूद पैसे वापस नहीं किए गए। अंततः पीड़ित ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने इस तरीके से किसी अन्य व्यक्ति को भी नौकरी का झांसा देकर ठगी तो नहीं की है। मामले में बरामद दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
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