प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर प्रदेशभर के विकासखंड मुख्यालयों में आयोजित एक दिवसीय धरना प्रदर्शन के दौरान गौरेला–पेंड्रा–मरवाही जिले में कांग्रेस की गुटीय राजनीति खुलकर सामने आ गई। मनरेगा बचाव संग्राम और धान खरीदी की समय-सीमा बढ़ाने जैसी जनहित मांगों को लेकर आयोजित यह धरना, मुद्दों से अधिक पार्टी की अंदरूनी खींचतान और वर्चस्व संघर्ष के कारण सुर्खियों में रहा।
गौरेला विकासखंड मुख्यालय में धरना उस समय विवाद में बदल गया, जब गौरेला के एक कांग्रेस कार्यकर्ता ने पेंड्रा विकासखंड से आए कार्यकर्ताओं को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि “हर कार्यक्रम में पेंड्रा वाले आ जाते हैं।” इस टिप्पणी को पेंड्रा गुट के कार्यकर्ताओं ने अपमानजनक बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया। पेंड्रा से जिला कांग्रेस अध्यक्ष के साथ पहुंचे कार्यकर्ताओं ने मौके पर ही आपत्ति जताई, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।
कुछ ही देर में धरना स्थल पर नारेबाजी की जगह आरोप-प्रत्यारोप का माहौल बन गया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों को हस्तक्षेप कर मामला शांत कराना पड़ा। हालांकि, तब तक कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी सार्वजनिक हो चुकी थी, जिससे पार्टी की संगठनात्मक एकजुटता पर सवाल खड़े हो गए। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में जिले का नाम गौरेला–पेंड्रा–मरवाही रखे जाने के बाद से ही विकासखंड स्तर पर नेतृत्व के बीच वर्चस्व की होड़ शुरू हो गई थी। यह खींचतान समय-समय पर संगठनात्मक कार्यक्रमों में सामने आती रही है।
बताया जा रहा है कि हाल ही में हुए कांग्रेस जिला अध्यक्ष चुनाव के दौरान भी गुटबाजी खुलकर देखने को मिली थी, जिसके चलते पार्टी दो स्पष्ट धड़ों में बंटी नजर आई। ताजा धरना प्रदर्शन को उसी अंदरूनी संघर्ष की एक और कड़ी के रूप में देखा जा रहा है, जहां जनहित के मुद्दे पीछे छूट गए और गुटीय राजनीति पूरी तरह हावी नजर आई।