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चरखी दादरी: श्याम प्रभु के भजनों से सराबोर हुई पुरानी अनाज मंडी, फाग पर्व पर बही भक्ति की धारा
दादरी शहर की पुरानी अनाज मंडी में प्रतिवर्ष की भांति इस बार भी फाग उत्सव के उपलक्ष्य में श्री श्याम प्रभु के भव्य संकीर्तन का आयोजन किया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान में स्थानीय कलाकारों ने अपनी मधुर वाणी से भजनों का ऐसा गुणगान किया कि पांडाल भक्ति रस की धारा में सराबोर हो गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत पूजन और बाबा श्याम की जोत प्रज्वलित कर किया गया। इस दौरान बाबा का अलौकिक श्रृंगार और छप्पन भोग का प्रसाद मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा। संकीर्तन में पहुंचे स्थानीय भजन गायकों ने फागण का मेला आ गया और सांवरिया सेठ जैसे लोकप्रिय भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कलाकारों की सुरीली प्रस्तुतियों पर श्रद्धालु झूमने को मजबूर हो गए और पूरा वातावरण जय श्री श्याम के जयकारों से गूंज उठा।
आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि फाग पर्व पर आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम आपसी भाईचारे और श्रद्धा का प्रतीक है। दोपहर तक चले इस कीर्तन में भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने माथा टेककर सुख-समृद्धि की कामना की। कार्यक्रम के समापन पर बाबा को भोग लगाकर श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर शहर के गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में श्याम प्रेमी मौजूद रहे।
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अरोड़ा ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि शर्तें असंतुलित रही तो उसका सीधा प्रभाव किसानों, लघु उद्योगों, ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय संप्रुभता पर पड़ सकता है। व्यापार समझौते आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन वह समानता, पारिदर्शता और जनिहत के आधार पर होने चाहिए। यदि किसी समझौते में घरेलू हितों की पर्याप्त सुरक्षा न हो, तो दीर्घकालिक प्रभाव व्यापक हो सकते है। 6 फरवरी 2026 को हुए फ्रेमवर्क एग्रीमेंट के बाद यह चर्चा तेज हुई कि अमेरिका से कई कृषि उत्पादों के आयात पर शुल्क में छूट दी जा सकती है। भारत में वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग 430 लाख मीट्रिक टन मक्का उत्पादन हुआ, जबकि अमेरिका का उत्पादन इससे कई गुणा अधिक है। आशंका जताई जा रही है कि यदि ड्यूटी-फ्री अमेरिकी मक्का और उससे जुड़े उत्पाद भारतीय बाजार में आते हैं तो घरेलू किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलना कठिन हो सकता है। इसी प्रकार ज्वार और सोयाबीन जैसे उत्पादों में भी प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है। भारत हर वर्ष बड़ी मात्रा में सोयाबीन का उत्पादन करता है, जबकि अमेरिका विश्व के प्रमुख उत्पादकों में शामिल है। यदि विदेशी उत्पाद कम कीमत पर उपलब्ध होते है तो किसानों की आय पर दबाव बढ़ सकता है। कपास आयात में पहले ही वृद्धि दर्ज की जा चुकी है। उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यदि अमेरिकी कपास को ड्यूटी-फ्री अनुमति मिलती है तो घरेलू कीमतों पर असर पड़ेगा। देश के प्रमुख वस्त्र केंद्र तिरुपुर, सूरत, पानीपत और लुधियाना में कार्यरत लघु व मध्यम उद्योगों के सामने प्रतिस्पर्धा की चुनौती बढ़ सकती है। उससे रोजगार और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि आठ मार्च को पंजाब सरकार सूबे की महिलाओं को एक हजार रुपये प्रतिमाह देने की शुरूआत कर सकती है। यदि सरकार पुराने एरियर के साथ 48 हजार रुपये एकमुश्त महिलाओं के खाते में डालती है तो वह इसका स्वागत करेंगे। यदि केवल एक-दो माह के पैसे डाले जाते हैं तो यह केवल एक चुनावी स्टंट होगा। जिसे वह जनता के बच लेजाकर लोगों को जागरूक करेंगे। इस अवसर पर जिला कांग्रेस प्रधान बलविंदर सिंह धालीवाल, ब्लाक कांग्रेस शहरी अध्यक्ष दीपक सलवान, ब्लाक कांग्रेस देहाती अध्यक्ष अमरजीत सिंह सैदोवाल, मार्केट कमेटी पूर्व उप चेयरमैन राजिंदर कौड़ा, कांग्रेस नेता संजीव बुग्गा, नगर पार्षद नरिंदर मंसू, नगर पार्षद करन महाजन, कांग्रेस नेता रमेश डडविंडी, संदीप सहगल, विधायक राणा के कार्यालय सचिव मनप्रीत सिंह मांगट के अलावा अन्य कांग्रेस नेतागण शामिल थे।
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