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Hazampur village in Hansi bears witness to a history and heritage spanning approximately 300 years.
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हांसी के हाजमपुर गांव लगभग 300 वर्ष पुराना इतिहास और विरासत का गवाह
हांसी जिले से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित हाजमपुर गांव का इतिहास लगभग 300 वर्ष पुराना माना जाता है। ग्रामीणों के अनुसार गांव का नाम यहां रहने वाले दो मुस्लिम भाइयों हाजम और जमाल के नाम पर पड़ा। हाजम के नाम से हाजमपुर और कुछ दूरी पर बसे जमाल के नाम से जमालपुर गांव अस्तित्व में आया।
आपको बता दे कि इतिहास के जानकारों और ग्रामीणों के मुताबिक यह गांव देश की आजादी से करीब 220 वर्ष पहले बस चुका था। गांव में आज भी एक ऐतिहासिक कुआं मौजूद है, जो कभी पूरे गांव की प्यास बुझाने का मुख्य स्रोत हुआ करता था। ग्रामीण बताते हैं कि पहले इस कुएं से पूरे गांव को पानी उपलब्ध कराया जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इसमें पानी नहीं भरा जा रहा है।
गांव की एक और विशेष पहचान हाजम के समय की पुरानी मस्जिद है। समय के साथ इस ऐतिहासिक इमारत को नया स्वरूप दिया गया और वर्तमान में यहां गुरुद्वारा साहिब स्थापित है। विभाजन के बाद पाकिस्तान से आए सिख समुदाय के परिवारों द्वारा यहां धार्मिक गतिविधियां संचालित की जाती हैं और श्रद्धालु नियमित रूप से मत्था टेकने पहुंचते हैं।
गांव के सरपंच अनिल नेहरा ने बताया कि हाजमपुर की वर्तमान जनसंख्या लगभग 5,500 है, जबकि गांव में करीब 2,800 मतदाता हैं। ग्रामीणों के अनुसार हाजमपुर से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित बलियाली गांव में पहले मुस्लिम समुदाय की आबादी अधिक थी। पुराने समय में आसपास के क्षेत्र में होने वाले झगड़ों और चोरी की घटनाओं के कारण हाजमपुर और बलियाली का नाम भी चर्चा में रहता था।
गांव के बुजुर्ईग ईश्वर सिंह ने कहा कि यदि गांव के वर्तमान स्वरूप की बात करें तो यहां के अधिकांश लोग कृषि कार्य से जुड़े हुए हैं। और खेती ही आय का मुख्य स्रोत है। हालांकि गांव ने कई ऐसे अधिकारी भी दिए हैं जिन्होंने विभिन्न सरकारी विभागों में उच्च पदों पर सेवाएं दी हैं। वही रामभक्त ने बताया कि गांव के निवासी पुलिस विभाग में आईजी पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। वहीं राजेंद्र संभरवाल बिजली विभाग में निदेशक पद पर कार्य कर चुके हैं और रत्न वर्मा भी बिजली बोर्ड में निदेशक के पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। सभी जातियों के लोग मिलकर जुलकर रहते है।
अजमेर सिंह ने कहा कि हाजमपुर के अनेक युवा और अधिकारी पुलिस विभाग में डीएसपी सहित विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं, जो गांव की शिक्षा और प्रशासनिक योगदान की पहचान बने हुए हैं। राजेश कुमार ने कहा कि हाजमपुर आज अपने ऐतिहासिक महत्व, धार्मिक विरासत और प्रशासनिक सेवाओं में योगदान देने वाले लोगों के कारण क्षेत्र में एक अलग पहचान रखता है।
गांव के निवासी सुनील कुमार ने बताया कि गांव में एक प्राचीन कुआं और एक पुरानी मस्जिद आज भी मौजूद है, जो गांव के ऐतिहासिक अस्तित्व की गवाही देते हैं। उन्होंने बताया कि यह गांव काफी वर्षों पहले बसा था और यहां की पुरानी धरोहरें गांव के समृद्ध इतिहास को दर्शाती हैं। ग्रामीणों के अनुसार, गांव की पहचान उसके ऐतिहासिक स्थलों और सांप्रदायिक सौहार्द की परंपरा से जुड़ी हुई है, जिसे आज भी संजोकर रखा गया है।
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