जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) मेड़ता की मानवीय पहल से 18 वर्षों से बेड़ियों में जकड़ी मानसिक रूप से बीमार एवं बौद्धिक रूप से असक्षम महिला को सम्मानजनक जीवन की नई उम्मीद मिली है। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार तथा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) की ‘मानसिक रूप से बीमार एवं बौद्धिक दिव्यांग व्यक्तियों हेतु विधिक सेवाएं योजना-2024’ के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत चलाए जा रहे ‘बेड़ियों से मुक्ति, सम्मानजनक जीवन’ विशेष अभियान के अंतर्गत ग्राम मैडास निवासी सानू देवी को बेड़ियों से मुक्त कराया गया।
डीएलएसए, पुलिस और चिकित्सा विभाग ने मिलकर कराया रेस्क्यू
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मेड़ता की अध्यक्ष श्रीमती तारा अग्रवाल एवं सचिव संजय कुमार मालवीया के निर्देशन में गठित टीम ने चिकित्सा एवं पुलिस विभाग के समन्वय से मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई की। महिला की स्थिति का आकलन करने के बाद उसे बेड़ियों से मुक्त कराया गया तथा तत्काल प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया गया।
बेहतर इलाज के लिए जोधपुर किया गया निःशुल्क रेफर
इसके बाद महिला को बेहतर एवं विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मनोविकार विभाग, मथुरादास माथुर राजकीय चिकित्सालय, जोधपुर के लिए निःशुल्क रेफर किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने उसके उपचार, पुनर्वास और आवश्यक विधिक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी है।
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'बेड़ियों से मुक्ति' अभियान का उद्देश्य क्या है?
सचिव संजय कुमार मालवीया ने बताया कि इस विशेष अभियान का उद्देश्य ऐसे मानसिक रूप से बीमार एवं बौद्धिक दिव्यांग व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें अमानवीय परिस्थितियों से मुक्त कराना, समय पर उपचार उपलब्ध कराना, पुनर्वास सुनिश्चित करना तथा उन्हें गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार दिलाना है। उन्होंने कहा कि समाज को भी ऐसे लोगों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है, ताकि उन्हें उपेक्षा या बंधन में रखने के बजाय चिकित्सा एवं कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जा सके।