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90 shopkeepers running businesses for three decades making rounds of offices for ownership rights; Education Department's NOC proves to be a hurdle.
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तीन दशक से दुकानें चला रहे 90 दुकानदार, मालिकाना हक के लिए दफ्तरों के चक्कर; शिक्षा विभाग की एनओसी बनी अड़चन
बहादुरगढ़। तीन दशक तक नगर परिषद को किराया देने के बावजूद नाहरा-नाहरी रोड के करीब 90 दुकानदार आज अपनी ही दुकानों के मालिकाना हक के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। हरियाणा सरकार की स्वामित्व योजना भी इन दुकानदारों की पीड़ा दूर नहीं कर पाई। दुकानदारों का कहना है कि नगर परिषद वर्षों से उनसे किराया वसूलती रही, लेकिन अब मालिकाना हक देने की बारी आई तो जमीन को शिक्षा विभाग की बताकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा जा रहा है। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी ने इस बारे में अब विभाग मुख्यालय से इस संबंध में कानूनी राय मांगी है। ऐसे में दुकानदार अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन समाधान के नाम पर केवल आश्वासन मिल रहे हैं।
दुकानदारों के मुताबिक वे करीब 25 से 30 वर्षों से इन दुकानों में कारोबार कर अपने परिवारों का पालन-पोषण कर रहे हैं। नगर परिषद लंबे समय तक दुकानों का किराया वसूलती रही। वर्ष 2022 में प्रदेश सरकार ने स्वामित्व योजना शुरू की, जिसके तहत 20 वर्ष या इससे अधिक समय से सरकारी संपत्तियों पर किरायेदार के रूप में काबिज पात्र दुकानदारों को निर्धारित कलेक्टर रेट पर नियमानुसार छूट देते हुए मालिकाना हक देने का प्रावधान किया गया। शहर के रेलवे रोड सहित अन्य स्थानों के 203 दुकानदारों को इसका लाभ भी मिल चुका है, लेकिन नाहरा-नाहरी रोड के दुकानदार इससे वंचित हैं।
दुकानदारों का कहना है कि जब वे नगर परिषद अधिकारियों से मालिकाना हक की मांग करते हैं तो उन्हें बताया जाता है कि दुकानों की जमीन शिक्षा विभाग की है। उनका सवाल है कि यदि जमीन शिक्षा विभाग की थी तो इतने वर्षों तक नगर परिषद उनसे किराया किस आधार पर वसूलती रही। दुकानदारों का आरोप है कि नगर परिषद को शिक्षा विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर योजना का लाभ देने की प्रक्रिया आगे बढ़ानी चाहिए, लेकिन दोनों विभागों के बीच मामला उलझा हुआ है।
जब वे वर्षों से किराया देते आए हैं और स्वामित्व योजना की पात्रता पूरी करते हैं तो उन्हें मालिकाना हक से क्यों वंचित रखा जा रहा है। सरकार से मांग की कि विभागों के बीच फंसे मामले का तत्काल समाधान कर नाहरा-नाहरी रोड के सभी पात्र दुकानदारों को स्वामित्व योजना का लाभ दिया जाए।
---दिलीप, दुकानदार
वे कई बार सीएम विंडो पर भी शिकायत कर चुके हैं। जिला उपायुक्त, नगर परिषद और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के सामने अपनी समस्या रखी, लेकिन हर बार मामला एक विभाग से दूसरे विभाग के पास भेज दिया जाता है। इससे उनमें रोष है।
--लवली, दुकानदार।
सरकार की योजना अनुसार नाहरा-नाहरी रोड के 53 दुकानदारों ने आवेदन कर रखा है। नगर परिषद ने जिला नगर आयुक्त के माध्यम से जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिख रखा है। यह जमीन शिक्षा विभाग की है। ऐसे में नगर परिषद की ओर से मालिकाना हक नहीं दिया जा सकता। शिक्षा विभाग से एनओसी मिलने के बाद ही सरकार के आदेश अनुसार दुकानदारों को मालिकाना हक दिया जा सकता है।
---संजय रोहिल्ला, कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद, बहादुरगढ़।
मेरे संज्ञान में यह मामला आते हैं मैंने इस संबंध में विभाग मुख्यालय को पत्र लिख रखा है। कानूनी राय ली जा रही है। जमीन हमारी है और दुकानों का किराया नगर परिषद ले रही है तो ये गलत है। दुकानों का किराया भी मांगा जाएगा। विभाग मुख्यालय से जो भी आदेश आएंगे, उसी अनुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी।
----रतिंदर सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी, झज्जर
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