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Chamba: वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की उठी मांग
भारत सरकार द्वारा प्रस्तुत वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को लेकर मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी के पदाधिकारियों ने अध्यक्ष लतीफ मोहम्मद की अगुवाई में एसी टू डीसी पीपी सिंह के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। जिसमें कुछ प्रावधानों पर गंभीर आपत्ति और गहरी चिंता प्रकट की हैं। यह अधिनियम न केवल भारत के संविधान द्वारा धार्मिक स्वतंत्रता, संपत्ति के अधिकार तथा अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों का उल्लंघन करता है। बल्कि यह सामाजिक सौहार्द को भी प्रभावित कर सकता है। यह अधिनियम मुस्लिम समुदाय की धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान पर प्रत्यक्ष आघात करता है। यह अधिनियम वक्फ संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण को अत्यधिक बढ़ाता है। जिससे धार्मिक संस्थाओं की स्वतंत्रता एवं पारंपरिक व्यवस्थाएं संकट में पड़ सकती हैं। साथ ही अधिनियम में कई ऐसे प्रावधान जोड़े गए हैं जो न्यायिक समीक्षा से परे माने जा रहे हैं जो भारतीय लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के सर्वथा प्रतिकूल हैं। कहा कि वक्फ संपत्ति की जांच का अधिकार जिलाधिकारियों को दी जाऐं। यह एक समुदाय की धार्मिक संपत्तियों पर सरकारी हस्तक्षेप का मार्ग प्रशस्त करता है, जो अनुच्छेद 26 के प्रतिकूल है। वफ्ट बोर्ड व परिषद में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति धार्मिक संस्था की पहचान एवं संचालन की आत्मनिर्भरता को समाप्त करता है। धारा 3सी ऐतिहासिक वक्फ संपत्तियों के अस्तित्व को संकट में डालता है जो सौ वर्षों से अधिक समय से धार्मिक कार्यों में प्रयुक्त हो रही हैं। धारा 10, 13, 16 धार्मिक न्यास की पहचान, धार्मिक उद्देश्यों की मान्यता और धार्मिक स्थलों के संरक्षण को निरस्त करने की दिशा में बढ़ते कदम हैं। वक्फ न केवल एक धार्मिक अवधारणा है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, विरासत, तालीम, इबादत और बुनियादी पहचान का हिस्सा है। इस अधिनियम के माध्यम से सरकार ने न केवल हमारी आस्था पर चोट की है। बल्कि एक समूची कौम के अधिकारों को कानूनी तरीके से छीनने की कोशिश की है। जिससे न केवल संवैधानिक मूल्यों की उपेक्षा होगी। बल्कि देश की गंगा-जमुनी तहजीब पर भी आघात पहुंचेगा। कहा कि यह अधिनियम संविधान के अनुच्छेद 25 व 26 का उल्लंघन है। जो हमें अपने धर्म का पालन करने और धार्मिक संस्थाओं का स्वतंत्र संचालन करने की स्वतंत्रता देता है। ज्ञापन के माध्यम से मांग कि है कि वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर वक्फ संस्थाओं की स्वायत्तता की रक्षा की जाए। वक्फ बोर्ड एवं वक्फ परिषद में केवल मुस्लिम प्रतिनिधियों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए और वक्फ संपत्तियों को संविधानिक संरक्षण दिया जाए।
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