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VIDEO : केंद्रीय बजट 2025-26 के खिलाफ रामपुर चौधरी अड्डे में विरोध प्रदर्शन
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) लोकल कमेटी रामपुर ने वामपंथी दलों के आह्वान पर केंद्रीय बजट 2025-26 के खिलाफ रामपुर चौधरी अड्डे में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन को सम्बोधित करते हुए सीपीआईएम लोकल कमेटी रामपुर सचिव कुलदीप डोगरा, अमित, दिनेश मेहता, प्रेम चौहान तथा रणजीत ने कहा कि केंद्रीय बजट 2025-26 लोगों की तात्कालिक और बुनियादी जरूरतों के साथ विश्वासघात है। लोगों के हाथों में क्रय शक्ति की कमी, बड़े पैमाने पर बेरोजगारी और घटती मजदूरी के कारण अर्थव्यवस्था में मांग की समस्या को दूर करने के बजाय, मोदी सरकार ने बजट के माध्यम से खर्चों में कटौती करते हुए भी अमीरों को रियायतें दी है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट 2025-26 निजी निवेश को बढ़ावा देकर, सार्वजनिक संपत्तियों को निजी क्षेत्र की सेवा में रखकर और बिजली क्षेत्र के निजीकरण आदि के माध्यम से धन के अधिक संचय को बढ़ावा देता है। यह बजट बीमा क्षेत्र में 100 फीसद प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का रास्ता खोलता है। केंद्रीय बजट में बेरोजगारी के मुद्दे को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है और खाद्य सब्सिडी, कृषि और संबद्ध गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, सामाजिक कल्याण और शहरी विकास पर व्यय पिछले साल की तुलना में स्थिर या कम है। मनरेगा के लिए आवंटन 86,000 करोड़ रुपये पर स्थिर है, जबकि मांग बढ़ी है। आयकर छूट सीमा को बढ़ाकर 12 लाख रुपये करने से लोगों के एक वर्ग को राहत मिली है, लेकिन बड़ी संख्या में कामकाजी लोग जो मूल्य वृद्धि और जीएसटी जैसे अप्रत्यक्ष करों से पीड़ित हैं, उन्हें इससे बाहर रखा गया है। कर छूट सीमा बढ़ाने से होने वाले नुकसान की भरपाई अमीर तबके और कॉरपोरेट पर कर की दरें बढ़ाकर की जा सकती थी। लेकिन सरकार ने ऐसा न करने का फैसला किया और इसके बजाय कॉरपोरेट क्षेत्र और अति-अमीरों को फायदा पहुंचाया। उन्होंने कहा कि वामपंथी दल बजट में सभी जनविरोधी प्रस्तावों को खारिज करते हैं और मांग करते हैं कि इनके स्थान पर निम्नलिखित वैकल्पिक प्रस्ताव लाए जाएं, जो लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाकर मांग पैदा करने, रोजगार के अवसर पैदा करने और मजदूरी बढ़ाने में मदद कर सकें। वैकल्पिक प्रस्ताव लोगों के शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा लाभों के अधिकार को सुनिश्चित करने में मदद करेंगे। वामपंथी दल निम्नलिखित प्रस्तावों को पेश करने की मांग करते हैं, जिन्हें वित्त विधेयक में जगह मिल ना चाहिए।
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