{"_id":"6a7981a0b9d67fa75203b647","slug":"video-nahan-farmers-workers-protest-jail-bharo-andolan-central-government-2026-08-10","type":"video","status":"publish","title_hn":"Nahan News: केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नाहन में रोष रैली, जनवादी संगठनों ने की नारेबाजी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Nahan News: केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नाहन में रोष रैली, जनवादी संगठनों ने की नारेबाजी
Ankesh Dogra
Updated Mon, 10 Aug 2026 01:15 PM IST
Link Copied
केंद्र सरकार की कथित जनविरोधी नीतियों के खिलाफ सोमवार को नाहन में किसान सभा और संयुक्त मजदूर संगठनों की समन्वय समिति के बैनर तले रोष रैली निकाली गई। जेल भरो आंदोलन के तहत आयोजित प्रदर्शन में किसान, मजदूर और जनवादी संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर विभिन्न मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।
प्रदर्शनकारी पहले रानी झांसी पार्क में एकत्र हुए। इसके बाद यहां से रोष रैली निकालते हुए उपायुक्त कार्यालय पहुंचे। रैली के दौरान केंद्र सरकार की आर्थिक और श्रम नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। बाद में प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन भी सौंपा।
किसान सभा के जिला अध्यक्ष राजेंद्र ठाकुर, सीटू के महासचिव आशीष कुमार और सतपाल मान ने कहा कि देशभर में जेल भरो आंदोलन आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों, मजदूरों, कर्मचारियों और आम जनता पर जनविरोधी आर्थिक नीतियां थोपी जा रही हैं।
वक्ताओं ने चार लेबर कोड, भारत-अमेरिका प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए), अन्य मुक्त व्यापार समझौतों और निजीकरण की नीतियों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन नीतियों से किसान और मजदूर वर्ग के हित प्रभावित हो रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने किसानों के पुश्तैनी कब्जों को नियमित करने, वन संरक्षण कानून-1980 में संशोधन करने और भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते को रद्द करने की मांग की। सभी फसलों के लिए सी2+50 प्रतिशत के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य देने और किसान आत्महत्या से प्रभावित परिवारों को 25 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग भी उठाई गई।
मजदूरों के लिए 42 हजार रुपये मासिक न्यूनतम वेतन और मनरेगा में सालाना 200 दिन रोजगार के साथ 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी सुनिश्चित करने की मांग रखी गई।
प्रदर्शनकारियों ने एफसीआई को मजबूत करने, खाद्य गोदामों के निजीकरण पर रोक लगाने और कृषि क्षेत्र में एफडीआई पर रोक की मांग की। इसके अलावा खाद की कमी और कालाबाजारी खत्म करने तथा किसानों के लिए सार्वजनिक फसल और पशुधन बीमा योजना लागू करने की मांग भी उठाई गई।
वक्ताओं ने 60 वर्ष से अधिक आयु के किसानों को 10 हजार रुपये मासिक सामाजिक सुरक्षा देने, बाढ़ और सूखा प्रभावितों को राहत, शिक्षा के व्यापारीकरण पर रोक, बिजली विधेयक-2025 को रद्द करने और स्मार्ट मीटर की जबरन स्थापना बंद करने की मांग की।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।