भारत ने अपनी सामरिक क्षमता का जोरदार प्रदर्शन करते हुए अग्नि-5 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। स्ट्रेटेजिक फोर्स कमांड द्वारा ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से यह लॉन्च किया गया। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक मिसाइल ने सभी ऑपरेशनल और टेक्निकल पैरामीटर पर खरा उतरते हुए लक्ष्य को सटीकता से भेदा। परीक्षण से पहले बंगाल की खाड़ी में नोटम जारी किया गया था। यह मिसाइल 5,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तक हमला कर सकती है, जिससे चीन के उत्तरी इलाकों तक भी आसानी से पहुंचा जा सकता है। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि यह परीक्षण रणनीतिक बल कमान की निगरानी में हुआ और सभी तकनीकी और संचालन संबंधी मानकों को सफलतापूर्वक परखा गया।
इस परीक्षण से पहले अग्नि-5 को 11 मार्च 2024 को 'मिशन दिव्यास्त्र' के तहत पहली बार MIRV तकनीक के साथ टेस्ट किया गया था। MIRV तकनीक का मतलब है- एक ही मिसाइल में कई परमाणु हथियार लगे होते हैं, जो अलग-अलग रफ्तार और रास्तों से सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित अलग-अलग लक्ष्यों पर हमला कर सकते हैं। हालांकि MIRV से लैस अग्नि-5 को पूरी तरह ऑपरेशनल बनने में अभी कुछ साल और लगेंगे क्योंकि इसके और कई परीक्षण बाकी हैं।
फिलहाल, भारत की रणनीतिक बल कमान के पास केवल एक-एक वारहेड वाली मिसाइलें हैं। इनमें पृथ्वी-2 (350 किमी), अग्नि-1 (700 किमी), अग्नि-2 (2,000 किमी), अग्नि-3 (3,000 किमी) और सबसे लंबी दूरी की अग्नि-5 मिसाइलें शामिल हैं, जो चीन को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
अग्नि-5 मिसाइल की खासियत की बात करें तो एक तीन स्टेज वाली, ठोस ईंधन से चलने वाली मिसाइल है। इसे विशेष धातु से बने कंटेनर से लॉन्च किया जा सकता है, यानी मिसाइल पहले से ही तैयार हालत में रहती है और किसी भी समय दागी जा सकती है। कंटेनर प्रणाली की वजह से मिसाइल को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है और इसे रेल या सड़क मार्ग के जरिए कहीं भी ले जाकर किसी भी स्थान से दागा जा सकता है।