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Azam Khan will leave Akhilesh after his release and will join this party!
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रिहाई के बाद आजम खां छोड़ेंगे अखिलेश का साथ, इस पार्टी में होंगे शामिल!
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: आदर्श Updated Tue, 23 Sep 2025 12:18 PM IST
सीतापुर जेल में बंद समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और रामपुर के कद्दावर मुस्लिम चेहरे आजम खां की रिहाई की उम्मीद ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को एक बार फिर गर्मा दिया है। करीब 23 महीने से जेल में बंद आजम खां को हाल ही में हाईकोर्ट से जमानत मिली है। इसके बाद से उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
इस सियासी चर्चा को बल तब मिला जब यह खबर आई कि आज़म खां की पत्नी डॉ. तजीन फात्मा ने बसपा प्रमुख मायावती से दिल्ली में मुलाकात की। कहा जा रहा है कि इस बैठक के केंद्र में खुद आजम खां थे। हालांकि, इस मुलाकात को लेकर न तो बसपा और न ही सपा की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि की गई है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यह महज इत्तेफाक नहीं, बल्कि आने वाले वक्त की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। वहीं, आज़म खां के करीबी इस दावे को सिरे से खारिज करते हैं। उनका कहना है कि तजीन फात्मा पिछले कई महीनों से दिल्ली नहीं गईं, ऐसे में इस तरह की अफवाहों में कोई दम नहीं है।
गौरतलब है कि कुछ समय पहले आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आजाद भी सीतापुर जेल में आजम खां से मिले थे। इस मुलाकात को दलित-मुस्लिम समीकरण को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा गया। अब मायावती और तजीन की कथित मुलाकात ने इस गठजोड़ की अटकलों को और हवा दी है।
लोकसभा चुनाव 2024 में टिकट बंटवारे को लेकर अखिलेश यादव और आजम खां के रिश्तों में खटास आई थी। आजम ने खुद चुनाव नहीं लड़ने की स्थिति में अखिलेश को रामपुर से मैदान में उतरने का सुझाव दिया था। इसके साथ ही उन्होंने मुरादाबाद सीट से बिजनौर की पूर्व विधायक रुचिवीरा को टिकट देने की सिफारिश की थी।
लेकिन अखिलेश ने रामपुर से चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया और उनकी पसंद को नजरअंदाज कर मौलाना मोहिब्बुल्लाह नदवी को उम्मीदवार बना दिया। इस फैसले से नाराज होकर रामपुर के कई सपा नेताओं ने चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर दिया था। तब से आजम और अखिलेश के बीच रिश्तों की खटास खुलकर सामने आ चुकी है।
हालांकि, समाजवादी पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि आजम खां का सबसे सुरक्षित राजनीतिक ठिकाना सपा ही है। उनके मुताबिक, आजम जिस अंदाज और प्रभाव के साथ राजनीति करते हैं, उसके लिए बसपा या कोई और पार्टी मुफीद नहीं होगी।
पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन ने भी साफ कहा कि आजम खां सपा के संस्थापक सदस्य हैं। उनके किसी अन्य दल में जाने की चर्चा महज अटकलें हैं। “आजम खां सपा में हैं और सपा में ही रहेंगे,” उन्होंने दोहराया।
आज़म खां के खिलाफ लगभग 96 मामले दर्ज हैं। इनमें से अब तक 12 मामलों में फैसला आ चुका है। उन्हें पांच मामलों में सजा मिली है और सात में बरी कर दिया गया है। मौजूदा समय में 59 केस सेशन कोर्ट और 19 मजिस्ट्रेट कोर्ट में विचाराधीन हैं।
दो जन्म प्रमाण पत्र के मामले में सजा मिलने के बाद अक्टूबर 2023 में उन्हें जेल जाना पड़ा था। इस दौरान उनकी पत्नी तजीन फात्मा और बेटे अब्दुल्ला आज़म भी जेल गए थे।
आजम खां की रिहाई के बाद उनका अगला राजनीतिक कदम उत्तर प्रदेश की राजनीति पर गहरा असर डाल सकता है। यदि वह बसपा या किसी अन्य दल की ओर रुख करते हैं तो यह सपा के लिए बड़ा झटका होगा। वहीं, यदि वह सपा में बने रहते हैं, तो यह अखिलेश यादव और पार्टी के लिए मुस्लिम वोट बैंक को बनाए रखने में राहत की बात होगी।
फिलहाल न तो मायावती और न ही तजीन फात्मा की ओर से मुलाकात की खबर की पुष्टि हुई है। ऐसे में यह अटकलें केवल अफवाहों और राजनीतिक हलचलों पर आधारित हैं।
रामपुर सपा जिलाध्यक्ष अजय सागर का कहना है, “अभी तक कोई तस्वीर या आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। आजम खां सपा में हैं और आगे भी रहेंगे।”
आजम खां की रिहाई के साथ-साथ उनकी अगली राजनीतिक चाल पर सभी की निगाहें टिकी हैं। चाहे वह सपा में बने रहें या नया ठिकाना तलाशें, उत्तर प्रदेश की राजनीति पर इसका गहरा असर होना तय है। अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि वह किस रास्ते जाएंगे, लेकिन इतना साफ है कि उनका नाम और उनकी अगली चाल दोनों ही 2025 की सियासत के बड़े फैक्टर होंगे।
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