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USA H1-B VISA Rules: IT Company Stocks are in bad shape in the stock market, shares of 10 top companies fell.
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USA H1-B VISA Rules: IT Company Stocks का शेयर बाजार में बुरा हाल, गिरे 10 टॉप कंपनियों के शेयर।
वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Published by: अभिलाषा पाठक Updated Mon, 22 Sep 2025 04:32 PM IST
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ट्रंप की नई वीजा नीति (Trump Visa Policy) के चलते भारतीय शेयर बाजार में आज खुलते ही आईटी क्षेत्र को नुकसान उठाना पड़ा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुक्रवार को एच-1बी वीजा की एकमुश्त फीस को 100,000 डॉलर (लगभग 88 लाख रुपए) करने की घोषणा ने आईटी दिग्गजों के शेयरों को जोरदार झटका दिया। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), इंफोसिस, विप्रो, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, टेक महिंद्रा और कोफोर्ज जैसे प्रमुख कंपनियों के शेयरों में सुबह के सौदों में 6 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी आईटी इंडेक्स (Nifty IT Index) 3 फीसदी से अधिक लुढ़ककर 35,482 अंक के स्तर पर आ गया।
टेक महिंद्रा के शेयर (Tech Mahindra Share Price) ने 5 फीसदी से अधिक गिरकर दिन का निचला स्तर 1,453 रुपए को छू दिया, जबकि इंफोसिस (Infosys) और टीसीएस (TCS) के शेयर 1,482 रुपए एनएसई 3,065 रुपए पर आ गए. एचसीएल टेक (1,415 रुपये), कोफोर्ज (1,702 रुपये) और एमफेसिस (2,817 रुपये) में भी 3-3 फीसदी से अधिक की कमी देखी गई। यह गिरावट ऐसे समय आई, जब आईटी क्षेत्र वैश्विक मांग में सुधार के संकेतों से उबर रहा था, लेकिन ट्रंप की नीति ने वापस अनिश्चितता पैदा कर दी।दरअसल भारतीय आईटी कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार काफी महत्वपूर्ण है. इन कंपनियों को सबसे अधिक राजस्व अमेरिकी बाजार से प्राप्त होता है। कंपनियां अपने कर्मचारियों को अमेरिकी बाजार में ऑनसाइट काम पर भेजती हैं, जिसके लिए एच-1बी वीजा जरूरी हो जाता है. ट्रंप ने अब एक झटके में इस वीजा के शुल्क को बढ़ाकर 1 लाख डॉलर कर दिया है। इस शुल्क का भुगतान कंपनियों को करना होगा. यह नया नियम रविवार से लागू हो गया है।
व्हाइट हाउस की इस सफाई से कुछ राहत
हालांकि, व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि 100,000 डॉलर की फीस केवल नए एच-1बी आवेदनों पर लागू होगी, न कि मौजूदा वीजा धारकों पर। नवीनीकरण या अमेरिका में पुनः प्रवेश के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। इससे आईटी कंपनियों का नुकसान कुछ सीमित होगा, लेकिन कंपनियां क्लाइंट्स पर इसका बोझ डाल पाएंगी या नहीं, इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
ट्रंप की नई नीति की घोषणा शुक्रवार को भारतीय बाजार बंद होने के बाद सामने आई थी. उसके बाद से यह आशंका लगातार जाहिर की जा रही थी कि जब सोमवार को बाजार खुलेगा, ट्रंप की नई वीजा नीति पर आईटी स्टॉक्स तुरंत प्रतिक्रिया दिखाएंगे। बाजार विशेषज्ञों की इस आशंका को आईटी स्टॉक्स ने आज सही भी साबित किया और कारोबार शुरू होते ही तमाम दिग्गज औंधे मुंह गिर गए।
ट्रंप के फैसले का भारतीय पेशेवरों पर गहरा असर पड़ेगा, जिन्हें प्रौद्योगिकी सहित अन्य क्षेत्र की कंपनियां एच1बी वीजा पर नियुक्त करती हैं।USCIS वेबसाइट के मुताबिक वित्त वर्ष 2025 (30 जून, 2025 तक के आंकड़े) के लिए अमेजन 10,044 एच-1बी वीजा स्वीकृतियों के साथ सूची में सबसे ऊपर है। शीर्ष दस लाभार्थियों की इस सूची में टीसीएस (5,505) दूसरे स्थान पर है। उसके बाद माइक्रोसॉफ्ट कॉर्प (5,189), मेटा (5,123), एप्पल (4,202), गूगल (4,181), कॉग्निजेंट (2,493), जेपी मॉर्गन चेज (2,440), वॉलमार्ट (2,390) और डेलॉयट कंसल्टिंग (2,353) का स्थान है। शीर्ष 20 की सूची में इंफोसिस (2,004), एलटीआईमाइंडट्री (1,807), और एचसीएल अमेरिका (1,728) शामिल हैं।ट्रंप ने घोषणापत्र में कहा कि एच-1बी वीजा कार्यक्रम अमेरिका में ऐसे अस्थायी श्रमिकों को लाने के लिए तैयार किया गया था, जो अतिरिक्त, उच्च-कुशल कार्य कर सकें, लेकिन इसका जानबूझकर दुरुपयोग किया गया, ताकि अमेरिकी श्रमिकों की सहायता करने के बजाय उनकी जगह कम वेतन वाले, कम-कुशल श्रमिकों को नियुक्ति किया जा सके। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “एच-1बी कार्यक्रम का दुरुपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा है। घरेलू कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने वीजा धोखाधड़ी, धन शोधन की साजिश और विदेशी श्रमिकों को अमेरिका आने के लिए प्रोत्साहित करने वाली अन्य अवैध गतिविधियों में शामिल एच-1बी-आधारित आउटसोर्सिंग कंपनियों की पहचान की है और उनकी जांच की है।”
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