न्यूयॉर्क इन दिनों दुनियाभर के नेताओं का गढ़ बना हुआ है। वजह है संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) का सालाना सत्र, जहां बड़े-बड़े राष्ट्राध्यक्ष, राजनयिक और कूटनीतिक चेहरे एक साथ जुटे हैं। इसी भीड़भाड़ और हलचल के बीच अब एक मुलाकात होने वाली है, जिस पर हर किसी की नज़र टिक गई है भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो आमने-सामने बैठने वाले हैं।
भारतीय समयानुसार रात करीब 8.30 बजे होने वाली यह बातचीत यूं तो यूएनजीए के दौरान होने वाली तमाम मुलाकातों जैसी लग सकती है, लेकिन इसमें खास बात छुपी है। वजह साफ है पिछले कुछ महीनों से भारत और अमेरिका के रिश्तों में मिठास और कड़वाहट दोनों का स्वाद चखा जा चुका है। कभी रणनीतिक साझेदारी और तकनीकी सहयोग पर एक-दूसरे की तारीफ, तो कभी व्यापार और टैरिफ को लेकर तीखी तकरार।सबसे बड़ा झटका तब लगा जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने भारत पर 50% टैरिफ थोप दिया। इसका असर सीधा भारतीय उद्योगों और निर्यातकों पर पड़ा। भारत ने खुलकर कहा कि यह बोझ उसके कारोबारियों के लिए भारी है, जबकि अमेरिका का तर्क था कि व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है और उसे संतुलित करना जरूरी है। नतीजा तनाव बढ़ा और रिश्तों में खटास आ गई।
ऐसे में जयशंकर और रुबियो की यह सीधी बातचीत बेहद अहम मानी जा रही है। मेज पर सबसे बड़ा मुद्दा साफ है व्यापार। लेकिन दिलचस्प बात यह भी है कि यह इस साल दोनों नेताओं की तीसरी आमने-सामने की मुलाकात होगी। जनवरी में वॉशिंगटन में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान पहली चर्चा हुई। जुलाई में दूसरी बार दोनों वॉशिंगटन में मिले। और अब तीसरी मुलाकात न्यूयॉर्क में हो रही है लगातार तीन बार बातचीत होना इस बात का सबूत है कि भले ही रिश्तों में उतार-चढ़ाव आए हों, लेकिन संवाद की डोर टूटी नहीं है। यही डोर अब दोनों देशों के बीच भरोसे और साझेदारी को नए सिरे से परिभाषित कर सकती है।