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GST 2.0 has been implemented, but how successful will this change prove to be?
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लागू हुआ GST 2.0 लेकिन कितना कामयाब साबित होगा यह बदलाव?
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: आदर्श Updated Tue, 23 Sep 2025 12:36 PM IST
क्या रोजमर्रा की जिंदगी अब थोड़ी आसान होने वाली है? 22 सितंबर से लागू हुई जीएसटी दरों की नई व्यवस्था, जिसे सरकार ने “GST रिफॉर्म 2.0” का नाम दिया है, ने देशभर के उपभोक्ताओं में एक नई उम्मीद जगा दी है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस महीने की शुरुआत में घोषणा की थी कि अब जीएसटी को केवल दो स्लैब 5% और 18% में सरल बनाया गया है। पहले की जटिल व्यवस्था की जगह यह नया मॉडल आम जनता के लिए समझने और लागू करने में आसान होगा।
सबसे बड़ी राहत मिडिल क्लास को मिली है। कार, बाइक, टीवी, एसी जैसे इलेक्ट्रॉनिक और व्हीकल सेगमेंट में कीमतें कम हुई हैं। वहीं, कई घरेलू खाद्य उत्पाद जैसे रोटी, परांठा, पनीर, खाखरा, जेम, केचप, पिज्जा ब्रेड और UHT मिल्क को अब जीरो टैक्स कैटेगरी में रखा गया है।
शिक्षा से जुड़ी चीजें जैसे पेंसिल शार्पनर, इरेजर, नोटबुक, ग्राफ बुक, वॉल मैप्स और एटलस अब जीएसटी मुक्त हैं।
दवाइयों पर भी बड़ा असर देखने को मिला है। 36 जीवनरक्षक दवाइयाँ जिनमें कैंसर, दुर्लभ बीमारियों और हृदय रोगों की दवाएँ शामिल हैं पूरी तरह टैक्स फ्री कर दी गई हैं। बाकी दवाइयाँ 12% से घटकर अब 5% स्लैब में आ गई हैं।
कपड़े और तैयार वस्त्र जिनकी कीमत ₹2,500 से अधिक है, अब 18% जीएसटी के दायरे में आ गए हैं। इसी तरह, सिगरेट और बीड़ी उत्पाद, पेट्रोलियम से जुड़े फ्यूल और कुछ आयातित कच्चे माल पर भी टैक्स दरें बढ़ाई गई हैं।
नई दरों का असर बाज़ार में तुरंत दिखने लगा है। अमूल ने अपने 700 से ज्यादा प्रोडक्ट्स पर दाम घटाने की घोषणा की है। इसमें घी, मक्खन, आइसक्रीम, बेकरी आइटम और फ्रोजन स्नैक्स शामिल हैं।
कितना सफल होगा जीएसटी 2.0?
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह सुधार मांग बढ़ाने और महंगाई नियंत्रित करने में मदद करेगा। जरूरी वस्तुओं पर टैक्स घटाने से उपभोक्ता खर्च बढ़ेगा, जिससे छोटे कारोबारियों और उद्योगों को सहारा मिलेगा।
हालांकि, उच्च वर्ग के लिए लग्जरी वस्त्र और आयातित उत्पाद महंगे हो गए हैं। लेकिन सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है जनसाधारण और मिडिल क्लास को राहत देना और टैक्स स्ट्रक्चर को सरल बनाना।
जीएसटी रिफॉर्म 2.0 को अब तक का सबसे बड़ा “प्रो-मिडिल क्लास” कदम माना जा रहा है। अगर कंपनियाँ राहत का फायदा उपभोक्ताओं तक सही ढंग से पहुँचाती हैं, तो यह सुधार न केवल खपत बढ़ाएगा बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को भी रफ्तार देगा।
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