चॉकलेट, पाकिस्तानी आईडी कार्ड और सैटेलाइट फोन से पहलगाम आतंकी हमले का पाकिस्तान से लिंक मिला है। भारतीय सुरक्षाबलों ने 28-29 जुलाई को जम्मू कश्मीर में ऑपरेशन महादेव के तहत पहलगाम आतंकी हमले में शामिल तीन आतंकियों को ढेर कर दिया था। ऑपरेशन महादेव में मारे गए आतंकियों के पास से कुछ ऐसी चीजें बरामद हुईं, जिनसे साफ हो गया कि पहलगाम हमले के पीछे पाकिस्तान है। 29 जुलाई को लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बताया कि 'ऑपरेशन महादेव में मारे गए तीनों आतंकियों का पाकिस्तान से कनेक्शन मिला है। पहली बार पाकिस्तान की सरकार द्वारा आतंकियों को जारी किए गए दस्तावेज हमारे पास हैं। जिससे पहलगाम आतंकी हमले के आतंकियों का पाकिस्तान से संबंध साफ हो जाता है।'
फोरेंसिक जांच, दस्तावेज और विभिन्न लोगों की गवाही से ये साबित हुआ कि ऑपरेशन महादेव में मारे गए आतंकी ही पहलगाम आतंकी हमले के पीछे थे और लश्कर एक तैयबा के खतरनाक आतंकी थे। पहलगाम हमले के बाद से ही वे दाचिगाम-हरवान के जंगलों में छिपे हुए थे। सुरक्षाबलों और खुफिया विभाग को आतंकियों के जंगल में छिपे होने की जानकारी मिली, जिसके बाद कई दिनों तक आतंकियों की मौजूदगी की पुष्टि के लिए गुप्त अभियान चलाया गया। जब पुष्टि हो गई तो ऑपरेशन महादेव शुरू किया गया।
मारे गए आतंकियों की पहचान सुलेमान शाह उर्फ फैजल जट्ट (ए प्लस प्लस ग्रेड आतंकी), अबु हमजा उर्फ अफगान (ए ग्रेड आतंकी) और यासी उर्फ जिब्रान (ए ग्रेड आतंकी) के रूप में हुई। आंतकियों के पास से सुरक्षाबलों ने पाकिस्तान के वोटर आईडी कार्ड, पाकिस्तान के चुनाव आयोग द्वारा जारी पर्ची, वोटर क्रम संख्या, सैटेलाइट फोन से मिला माइक्रो एसडी कार्ड, जिसमें आतंकियों के परिवार के बारे में भी जानकारी थी। साथ ही आतंकियों के पास से कराची में बनी चॉकलेट के खाली पैकेट मिले।
जांच में पता चला कि आतंकी गुरेज सेक्टर से भारतीय सीमा में घुसे थे। खुफिया विभाग ने आतंकियों की रेडियो पर हुई बातचीत को ट्रैक किया। 21 अप्रैल को आतंकी बायसरन से दो किलोमीटर दूर ढोक इलाके में पहुंचे। दो कश्मीरी निवासियों ने आतंकियों को पनाह और खाना देने की बात कबूली है। पहलगाम आतंकी हमले के दिन आतंकी पैदल ही बायसरन घाटी पहुंचे। हमले के बाद आतंकी उत्तर पूर्वी इलाके दाचिगाम की तरफ निकल गए थे। सरकार ने पहलगाम आतंकी हमले के दौरान चली गोलियों के कारतूस और ऑपरेशन महादेव में आतंकियों द्वारा चला गई गोलियों के कारतूस को फोरेंसिक जांच के लिए भिजवाया, जहां से पुष्टि हुई कि पहलगाम हमले और ऑपरेशन महादेव में शामिल आतंकियों द्वारा एक ही राइफल्स से गोलियां चलाईं गईं थी।