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SIR in West Bengal: SIR process begins in Bengal, Adhir Ranjan Chowdhury makes many shocking claims!
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SIR in West Bengal: बंगाल में SIR प्रक्रिया शुरू अधीर रंजन चौधरी ने किए कई चौंकाने वाले दावे!
वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Published by: भास्कर तिवारी Updated Thu, 01 Jan 2026 04:00 AM IST
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कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, "राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस और बाकी सभी पार्टियों ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए थे, और हमने पहले ही कहा था कि चुनाव आयोग जवाब नहीं देता। बंगाल से आकर ये लोग जो सवाल उठा रहे हैं, वही सवाल हमने बिहार में भी उठाए थे। यह पुरानी बात है। बंगाल में SIR प्रक्रिया शुरू होने से पहले, ममता बनर्जी खुद कहती थीं कि वह बंगाल में SIR नहीं होने देंगी.सत्ताधारी पार्टी के नेता और उनके भतीजे(अभिषेक बनर्जी) भी कहते थे कि अगर किसी ने बंगाल में SIR कराने की हिम्मत की, तो वे खून की नदियां बहा देंगे. अब वे एक प्रतिनिधिमंडल लेकर आए हैं, जबकि ड्राफ्ट पहले ही जारी हो चुका है और अंतिम सूची जारी होने वाली है। बंगाल में 90-92% BLO सरकारी कर्मचारी हैं। क्या उनमें ममता बनर्जी के खिलाफ कुछ करने की हिम्मत है? नहीं, है। दूसरे राज्यों में ज़्यादा वोटर्स के नाम हटाए गए, लेकिन बंगाल में उतने नहीं हटाए गए.बंगाल में, विधानसभा और लोकसभा चुनावों को छोड़कर पंचायत चुनावों, नगर पालिका चुनावों और बाकी सभी चुनावों में नामांकन दाखिल नहीं करने दिए जाते.बंगाल में, TMC सिर्फ़ वोट चोरी नहीं वोट डकैती करती है।
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) की प्रक्रिया शुरू होने पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने इस प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त करते हुए इसे आम जनता और विशेष रूप से मतुआ समुदाय के लिए एक बड़ी चुनौती बताया है। चौधरी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर मांग की है कि मतुआ समुदाय के लोगों को पुराने दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत करने की शर्त से छूट दी जाए, क्योंकि यह समुदाय विभाजन के दौरान धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आया था और उनके पास 25 साल पुराने दस्तावेज होना लगभग असंभव है।
अधीर रंजन ने आरोप लगाया है कि SIR प्रक्रिया में धांधली की संभावना है क्योंकि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह राज्य सरकार (TMC) के नियंत्रण में हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया के जरिए "वोटों की चोरी" की कोशिश की जा सकती है। उन्होंने कहा कि मतुआ समुदाय के लोगों ने दशकों से मतदान किया है और जनप्रतिनिधि चुने हैं, लेकिन अब SIR के बहाने उन्हें मताधिकार से वंचित करने (Disenfranchise) का डर दिखाया जा रहा है।
चौधरी के अनुसार, 2002 की मतदाता सूची को आधार मानकर लोगों से साक्ष्य मांगना "क्रूर और अनुचित" है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर नियमों में ढील नहीं दी गई, तो लाखों वास्तविक नागरिक अपनी नागरिकता और वोट देने के अधिकार पर संकट महसूस करेंगे।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी और टीएमसी दोनों ही इस मुद्दे को अपने वोट बैंक के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि आम जनता डर के साये में है।
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