नानाजी देशमुख वेटरनरी साइंस विश्वविद्यालय में रिसर्च मद की राशि से हवाई यात्रा और कार खरीदने का मामला जांच में सामने आया है। प्रशासनिक स्तर पर जांच में यह भ्रष्टाचार उजागर हुआ है। पंचगव्य योजना के तहत गोबर-गोमूत्र तथा दूध से कैंसर जैसी बीमारी को ठीक करने के लिए रिसर्च के नाम पर लाखों रुपये के भ्रष्टाचार का मामला सामने आने से विश्वविद्यालय में हड़कंप की स्थिति व्याप्त है।
गौरतलब है कि रिसर्च राशि के दुरुपयोग की शिकायत मिलने पर जिला कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने अतिरिक्त कलेक्टर आर एस मरारी के नेतृत्व में दो सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी ने जांच के दौरान पाया कि नानाजी देशमुख साइंस विश्वविद्यालय को गाय के गोबर व गोमूत्र तथा दूध से कैंसर की बीमारी को ठीक करने के लिए रिसर्च करने राज्य सरकार ने साल 2011 में साढे़ तीन करोड़ रुपये दिये थे। रिसर्च मद से पौने दो करोड़ रुपये का व्यय कच्चा पदार्थ व मषीन कई गुना अधिक रेट में खरीदा गया है। इसके अलावा 15 लाख रुपये के फर्नीचर व इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदा गया है। इसके अलावा रिसर्च मद से लगभग लगभग पांच लाख रुपये का भुगतान किया गया है। अनुसंधान के संबंध में यात्रा नहीं करने के बावजूद भी हवाई यात्रा में इस मद से तीन लाख रुपये व्यय किये गये। एडीएम के द्वारा जांच रिपोर्ट जिला कलेक्टर को सौंपी है।
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इस संबंध में नानाजी देशमुख वेटरनरी साइंस विश्वविद्यालय के कुलपति मनदीप शर्मा का कहना है कि रिसर्च प्रोग्राम साल 2818 में समाप्त हो गया था। रिसर्च प्रोग्राम के टेक्निकल व फायनेंसियल रिकॉर्ड को स्वीकृति प्रदान की गयी थी।