मध्य प्रदेश के खंडवा नगर निगम में गुरुवार दोपहर उस वक्त हंगामे की स्थिति बनी, जब वार्ड क्रमांक सात, चीरा खदान टेकरी के रहवासी बड़ी संख्या में वार्ड की समस्याओं को लेकर निगम पहुंचे थे, लेकिन उन्हें आयुक्त के गेट पर ताला लगा मिला। इसके बाद नलों में पानी नहीं आने की समस्या के चलते, मटके लेकर पहुंची महिलाओं ने कमिश्नर के गेट पर ही मटके फोड़ अपना विरोध जताया। यही नहीं, वे लोग नारेबाजी करते हुए निगम के गेट पर ही बैठ गए। इस दौरान उनके साथ निगम के नेता प्रतिपक्ष दीपक राठौड़ सहित कांग्रेसी पार्षद भी समर्थन में दिखे।
रहवासियों की मांग है कि उन्हें हजारों रुपए के बिल तो दिए जा रहे हैं, लेकिन महीनों से पानी नहीं मिल रहा, और तो और निगम नल काटने की धमकी देता है। उनके वार्ड की सड़क और नाली की भी गंभीर समस्या है, लेकिन उनकी समस्या सुनने कमिश्नर उनसे मिलना तक नहीं चाह रहीं। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि डेढ़ सौ करोड़ की विश्व योजना में जमकर भ्रष्टाचार हुआ है। इसको लेकर निगम को श्वेत पत्र जारी कर बताना चाहिए कि उन्होंने इस पर क्या किया। या कांग्रेसी पार्षदों को एक माह के लिए इसका जिम्मा दे दे दिया जाए। तब वे शहर की पानी की व्यवस्था को दुरुस्त कर देंगे, या फिर अपने पद से इस्तीफा दे देंगे।
250 परिवार के 600 लोगों की बस्ती के हाल बेहाल
धरने पर बैठी महिला कमला राठौड़ ने बताया कि उनके वार्ड चीरा खदान टेकरी में जब से नल लगे हैं, तब से कभी कभार ही पानी आता है। लेकिन उसका बिल टाइम से आता है। उनके वार्ड में रोड का काम भी गिट्टी मिट्टी डालकर अधूरा ही छोड़ दिया है। वहां निगम के कर्मचारी बिल नहीं भरने पर नल काटने आ जाते हैं, लेकिन वो हमें पानी देंगे तभी तो हम बिल भरेंगे। हम गरीब जनता की कोई सुनवाई नहीं है, हमें कीड़ा मकोड़ा समझ रखा है। एक माह से नल में पानी नहीं आया है। ऐसे हमारे करीब ढाई सौ परिवार के 600 लोगों की बस्ती के यही हाल हैं। सभी के हजारों रुपए के बिल आ रहे हैं। इसलिए अभी हमने मटके भी फोड़े और धरना भी दिया। हमें सुविधा मिले तो हम बिल भरने का मना नहीं कर रहे, लेकिन हमें रोड़, पानी और नाली की समस्या है।
बीते तीन माह में शहर का हो चुका बंटाधार
नगर निगम के गेट पर धरना दे रहे निगम के नेता प्रतिपक्ष मल्लू राठौर ने बताया कि खंडवा की जनता पिछले 15 सालों से गर्मियों में पीने के पानी के लिए परेशान होती रहती है। अभी तो गर्मी शुरू ही नहीं हुई है और इसको लेकर वार्ड नंबर 7 के रहवासी निगम आयुक्त से मिलने आए थे। लेकिन आयुक्त नहीं मिली तो उनके गेट पर मटके फोड़े गए। कमिश्नर मैडम लोगों से मिलना नहीं चाह रही हैं। वह तानाशाही रवैया अपना चुकी हैं। शायद उन्होंने कसम खा रखी है जो महापौर बोलेंगी, वही वो करेंगी। इसलिए हम कमिश्नर से पूछना चाहते हैं कि, क्या उन्हें महापौर ने यह कहा है कि आम लोगों से नहीं मिलना है। पार्षदों का सम्मान नहीं करना है। और टैक्स वसूल कर उसे ठेकेदारों को दे दो, लेकिन कर्मचारियों को तनख्वाह मत दो। या हरे भरे 31 पेड़ काट दो। हमारे शहर का इन तीन माह में बंटाधार हो चुका है। इसलिए हमारी मांग है कि कोई काबिल डिप्टी कलेक्टर रेंज का कमिश्नर यहां लाया जाए, जो आम जनता से मिले।
एक माह के लिए कांग्रेस पार्षदों को सौंप दें पानी की व्यवस्था
इधर नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि हम डेढ़ सौ करोड़ रुपए खर्च करने के बावजूद शहर को पानी नहीं पिला पा रहे हैं। पानी को लेकर अभी से त्राही त्राही मची हुई है। तो इस योजना में कितना भ्रष्टाचार हुआ होगा। अगर ऐसा नहीं है तो, विश्व कंपनी और नगर निगम एक-एक श्वेत पत्र जारी कर बताएं उन्होंने क्या किया है। वहीं, मल्लू राठौर ने जिला कलेक्टर और निगम कमिश्नर से मीडिया के माध्यम से कहा कि यदि उनसे शहर की पानी की व्यवस्था नहीं सुधर रही, तो एक माह के लिए वह इसे कांग्रेस पार्षदों को सौंप दे। वे लोग एक माह में शहर की पानी की सप्लाई व्यवस्था को सुचारू रूप से करवा देंगे, नहीं तो अपने पदों से इस्तीफा दे देंगे।