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Sagar's Asad became Atharva: He embraced Sanatana Dharma with Vedic chanting at Assi Ghat in Varanasi.
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सागर के असद बने अथर्व: बनारस के अस्सी घाट पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अपनाया सनातन धर्म
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर Published by: सागर ब्यूरो Updated Mon, 29 Dec 2025 09:17 PM IST
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मध्य प्रदेश के सागर जिले के एक युवक ने अपनी आस्था और अंतरात्मा की आवाज पर एक बड़ा निर्णय लिया है। सागर निवासी असद खान ने धर्म और समाज के बंधनों को पीछे छोड़ते हुए वाराणसी के पावन अस्सी घाट पर सनातन धर्म में 'घर वापसी' की। अब उनकी नई पहचान 'अथर्व त्यागी' के रूप में होगी।
अथर्व त्यागी ने बनारस पहुंचकर पूरे वैदिक विधि-विधान के साथ हिंदू धर्म स्वीकार किया। अस्सी घाट पर पंडितों की मौजूदगी में उनका पंचगव्य स्नान कराया गया, जिसके बाद उन्होंने मां गंगा में डुबकी लगाकर पवित्रीकरण किया। शास्त्रोक्त पद्धति से उनका मुंडन संस्कार हुआ और फिर हवन-पूजन के साथ मंत्रोच्चार के बीच उन्होंने धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी की। इसके पश्चात, अथर्व ने काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा का जलाभिषेक किया और शाम को विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती में भी सम्मिलित हुए। भंडारे के साथ उनके इस नए जीवन की औपचारिक शुरुआत हुई।
क्यों बदला धर्म?
अथर्व (पूर्व नाम असद) ने बताया कि वे लंबे समय से इस्लाम की कुछ कुरीतियों और खान-पान के बंधनों से असहज थे। उन्होंने कहा:
मेरी आस्था बचपन से ही भगवान महाकाल में थी, लेकिन सामाजिक और पारिवारिक दबाव के कारण मैं इसे व्यक्त नहीं कर पाता था। मुझे मूर्ति पूजा से रोका जाता था और मांस-मछली के सेवन के लिए मजबूर किया जाता था। अब मैं मानसिक रूप से स्वतंत्र महसूस कर रहा हूं।
'त्यागी' उपनाम के पीछे का संदेश
अथर्व ने अपने नए नाम के साथ 'त्यागी' उपनाम जोड़ा है। उनका कहना है कि चूंकि उन्होंने स्वेच्छा से पुराने धर्म का त्याग किया है, इसलिए यह उपनाम उनकी नई पहचान और उनके निर्णय को हमेशा याद दिलाता रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला पूरी तरह उनका निजी है और इसके लिए उन पर कोई बाहरी दबाव नहीं था। वर्तमान में सागर से बनारस तक का यह सफर और अथर्व की घर वापसी पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।
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