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पठानकोट बॉर्डर क्षेत्र में 15 करोड़ से बनेगा 100 बेड का डिवीजनल अस्पताल
पठानकोट के विधानसभा हलका भोआ के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने की दिशा में पंजाब सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। नरोट जैमल सिंह के मौजूदा अस्पताल को अपग्रेड कर करीब 14 से 15 करोड़ रुपये की लागत से 100 बिस्तरों वाला डिवीजनल अस्पताल बनाया जाएगा। अस्पताल के अपग्रेड होने के बाद भारत-पाक सीमा से सटे गांवों और रावी नदी के पार रहने वाले करीब 100 गांव के लोगों को इलाज के लिए दूर पठानकोट या अमृतसर जाने की जरूरत काफी हद तक कम हो जाएगी।
कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक ने विधानसभा हलका भोआ के गांव जसवाली स्थित रेस्ट हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दी। उन्होंने कहा कि नरोट जैमल सिंह में 100 बेड का अस्पताल बनना हलके के लोगों के लिए बड़ी उपलब्धि है। खासकर सीमावर्ती क्षेत्र में रहने वाले लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
इमरजेंसी और ऑपरेशन की भी मिलेगी सुविधा
नए डिवीजनल अस्पताल में मरीजों को कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने की योजना है। यहां इमरजेंसी सेवाओं के साथ ऑपरेशन की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इसके अलावा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाएगा तथा महिलाओं की डिलीवरी के लिए भी आवश्यक व्यवस्था की जाएगी। अस्पताल की ओपीडी सेवाओं को बेहतर बनाने के साथ-साथ ब्लड बैंक की सुविधा भी स्थापित की जाएगी, ताकि आपात स्थिति में मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध हो सके।
गंभीर मरीजों को दूर नहीं जाना पड़ेगा
सीमावर्ती इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण गंभीर मरीजों को अक्सर पठानकोट या अन्य बड़े शहरों के अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। ऐसे में नरोट जैमल सिंह में 100 बेड का अस्पताल बनने से स्थानीय लोगों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। इमरजेंसी के दौरान समय पर इलाज मिलने से मरीजों को बड़े अस्पताल तक ले जाने में लगने वाला महत्वपूर्ण समय भी बचाया जा सकेगा।
डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए खुलेंगे रोजगार के अवसर
अस्पताल का विस्तार होने के बाद यहां डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, तकनीकी कर्मचारियों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की आवश्यकता होगी। इससे क्षेत्र के लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। मंत्री कटारूचक ने कहा कि सरकार का उद्देश्य ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करना है, ताकि लोगों को बेहतर इलाज के लिए शहरों पर निर्भर न रहना पड़े।
डेढ़ साल से चल रहे थे प्रयास
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि नरोट जैमल सिंह अस्पताल को अपग्रेड करवाने के लिए वह पिछले करीब डेढ़ साल से लगातार प्रयास कर रहे थे। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री के साथ कई बार विचार-विमर्श किया गया। अब अस्पताल को 100 बेड के डिवीजनल अस्पताल के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। नरोट जैमल सिंह में बनने वाला यह अस्पताल इसी नीति का हिस्सा है और इससे भोआ विधानसभा क्षेत्र के साथ-साथ आसपास के सीमावर्ती गांवों के लोगों को भी लाभ मिलेगा।
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